सलमान पर बॉलीवुड की खामोशी पर बोले इरफान, सबको दुकान चलानी है...

News18India

Updated: June 26, 2016, 3:22 PM IST
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मुंबई। फिल्म अभिनेता इरफान खान ने IBN7 के खास कार्यक्रम हॉट सीट में बॉलीवुड, समाज, राजनीति पर खुलकर बात की। बॉलीवुड में हर रोज हो रहे विवादों पर भी इरफान ने चुप्पी तोड़ी। सलमान खान के 'रेप' पर दिए गए बयान पर बॉलीवुड की चुप्पी पर इरफान ने कहा कि यहां सभी को अपनी दुकान चलानी है...।

बॉलीवुड में गंभीर अभिनेता की छवि रखने वाले इरफान ने कहा, 'सलमान ने क्या कहा मुझे नहीं पता, किस अंदाज में कहा नहीं पता लेकिन अगर उनको लगता है कि माफी मांगी जानी चाहिए तो वह मांगे न कि सोशल मीडिया के दबाव में ऐसा करें।' इरफान ने कहा कि पश्चिम से उठाया गया शब्द 'सॉरी' सिर्फ ऐसा बनकर रह गया है कि इसे कह देने से बात खत्म हो जाती है। लेकिन अगर कोई इसे जबर्दस्ती बोलता है तो इसका कोई मतलब नहीं रह जाता है।

इरफान के मुताबिक, सोशल मीडिया पर फैलाया गया झूठ बहुत दिन तक टिकता नहीं है। सही बात ही आगे चलती है। इसीलिए किसी की बात सालों तक जिंदा रहती है। पूरी दुनिया उपभोक्तावाद की तरफ बढ़ रही है। हमने रिफ्लेक्ट करने के दरवाजे बंद कर दिए हैं। पहलाज निहलानी के विवाद पर उन्होंने कहा कि निहलानी को जैसे नियम दिए गए हैं वह उसी के हिसाब से रिएक्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आपने किसी फिल्म में एक समुदाय के नाम का इस्तेमाल किया तो उस समुदाय के लोग उठकर कुछ बोलने लगेंगे। अगर सेंसरबोर्ड ने कुछ चीज प्रमाणित कर दी है फिर भी क्यों विवाद होता है? क्यों नहीं सिस्टम प्रोटेक्ट करता है?

अभिनेता के मुताबिक सेंसरशिप का आइडिया ही बेकार है। टीवी खुला हुआ है। ऐसी फिल्में जिसमें औरत को सिर्फ मजा देने की मशीन बताया जाता है, उसे इस्तेमाल करने वाली चीज बताया जाता है, ऐसी फिल्मों को सेंसर क्यों नहीं किया जाता है? कौन सीमा निर्धारित करेगा? जब समाज कंसर्न होगा तभी कुछ होगा। आज हम जिस दौर में है वहां सभी लोग इस्तेमाल कर लेना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, 'कंसर्न पॉलिटिशियन पहले सिस्टम को बदलेगा। वह फ्लरिश होने के साधन उपलब्ध कराएगा। हमारा काम रिफ्लेक्ट करना है, हमें सेंसर की नहीं सर्टिफिकेट की जरूरत है। ताकी लोगों को पता लगे कि कोई फिल्म किस तरह के लोगों के लिए हैं। 8 साल का बच्चा आज इंटरनेट पर कुछ भी देख सकता है।' उन्होंने माना कि आज एजेंडा सोशल मीडिया द्वारा तय किया जा रहा है, लोग प्रभावित हो जाते हैं। इस तरह का महौल से आप घबराते भी हो। वैसे ही जिंदगी में अड़चने हैं और यह मुसीबतें और बढ़ा देता है। यह एक पेड ऑर्गेनाइजेशन है, जो कुछ खास चीजों पर करता है, ये जेनुइन लोग नहीं है।

फिल्म अभिनेता ने कहा कि आज सेल्फी का भी मार्केट बन गया है। लोगों को तब तक संतुष्टि नहीं मिलती जब तक वह सेल्फी न ले लें। इंडस्ट्री में कलेक्टिव बॉडी है ही नहीं। साउथ की इंडस्ट्री ऑर्गेनाइज है लेकिन बॉलीवुड में हर किसी को यह रहता है कि मेरा काम हो जाए बस... आग लगे बस्ती में, मैं मस्त रहूं मस्ती में... हमारे कंसर्न खत्म हो चुके हैं।

इरफान ने 10 साल पहले के अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा, 'मैंने तब एक लेख पढ़ा था जिसमें बताया गया था कि पंजाब में एक ट्रेन जाती है जो कैंसर एक्सप्रेस कहवलाती है। ऐसा इसलिए हैं क्योंकि वहां इतना फर्टिलाइजर इस्तेमाल हुआ है कि कुएं से तेजाब निकल रहा है। बच्चों को कैंसर हो रहा है। इस आलोचना से अगर हमारे राजनेता संबंधित होते तो वह कुछ कर चुके होते लेकिन नहीं किया।'

अपनी एक खास सोच और समझ रखने वाले इरफान ने कहा कि 50-60 के दशक में सिनेमा बनाने वाले लोग देश को लेकर चिंतित थे लेकिन अब असलियत दिखाना छोड़ दिया है। उसके बाद सिनेमा नीचे की तरफ गया है। वास्तविकता से दूर होता गया और विश्वसनीयता हटती गई। अब तो हॉलीवुड हमारे सामने चैलेंज है। वह हमें निगल रहा है। हमारा यूथ फिल्में देखने के लिए तैयार है लेकिन हमारे पास फिल्में हैं नहीं।

आप इस पूरे इंटरव्यू को वीडियो में देखिए....

First published: June 26, 2016
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