दीपावली स्पेशल: इस बार स्वदेशी बत्तियों वाली दिवाली मनाकर देखिए...

मोहम्मद शफी शम्सी | News18India.com

Updated: October 30, 2016, 8:44 AM IST
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कोलकाता। भारत देश में चीनी सामान का पुरजोर विरोध आम लोग भी कर रहे हैं। लोगों में जागरुकता आई है कि वो विदेशी सामानों की जगह स्वदेशी को वरीयता दे रहे हैं। इसी क्रम में वॉट्सऐप्प, फेसबुक पर तमाम मैसेज भी लोग जमकर साझा कर रहे हैं।

बड़े प्रोडक्टस की बात तो बाद में करें। हमारे रोज़ की काम आने वाली चीज़ें जो हम चलते-फिरते खरीदते हैं, ज़्यादातर अब चाइनीज हो गईं हैं। पेंसिल, कलम, खिलौने, मेक-अप या फिर बिजली के उपकरण के सामान अब चीनी ही हो चले हैं। दिवाली पर कई साल पहले तक हम छोटे बल्ब वाली लड़ियों से घर सजाते थे। उतार कर रख देते थे फिर निकाल कर लगाते थे। जब से चाइनीज लाइटें बाज़ार में आई हैं, हमारा स्वभाव यूज-एंड-थ्रो वाला हो गया है। हम में काफी चीज़ें एक बार इस्तेमाल करने की मानसिकता आ गयी है। हम किफायत से इस्तेमाल करने की कला भुला रहे हैं। छोटे-छोटे कारखाने जहां ऐसी सैंकड़ों छोटी वस्तुएँ बनती थीं अब बंद हो गए हैं।

दीपावली स्पेशल: इस बार स्वदेशी बत्तियों वाली दिवाली मनाकर देखिए...
photo Getty images

अर्थशास्त्र के आधार पर नीतियां बनती हैं, हमने आयात किया और निर्यात भी। पर बड़े फायदों के बीच कुछ छोटे पेशे समाप्त से हो गए। क्या असर डाला है चीनी वस्तुओं ने हम पर? न केवल यूज-एंड-थ्रो कल्चर आया, बल्कि बाज़ार में बिक रहे प्रोडक्टस की शेल्फ-लाइफ से भी हमारा भरोसा उठ गया।

तो अब इस दिवाली हम क्या करेंगे – कौन सी बत्तियों से घर सजाएंगे? दिये तो रोशन होंगे ही पर धार्मिक होने के साथ इस बार मन कुछ देसी चीजों के बारे में फिर उतावला हुआ है। क्या ढूंढ कर मिलेगी, वो छोटे बल्ब वाली बत्ती की लड़ी? क्या सजाने को होंगे चमकीले कागज के डिज़ाइन वाले फूल? क्या हाथ से बने सजावट को दुबारा बनाया जा सकता है? क्या फिर खेल सकते हैं हम हाथ के बने मिट्टी के खिलौनों से? खीलें और बताशे। क्यों ना फिर पहने वो हाथ के बुने कपड़े का कुर्ता। देश में क्या फिर एक बार एहसास हो सकता है स्वदेसी पर अभिमान का? क्या इस दिवाली हम फिर से वही गीत गुनगुनाएंगे, वही खिलौने अपनाएंगे, जिनमें हमारा बचपन बीता?

इस दीपावली पर एक दिया अपना भी हो। भले ही एक हो पर देसी हो तो दिलों को रोशन करेगा। यह दिवाली फीलिंग्स वाली है। जज़्बों में देश है और देश में स्वदेसी चीज़ें। आइये मनाते हैं स्वदेशी बत्तियों वाली दिवाली, फिर से।

First published: October 27, 2016
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