फरेब का बाजारः विज्ञापन पर न जाएं, अपनी अक्ल लगाएं

News18India

Updated: November 29, 2012, 10:07 AM IST
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नई दिल्ली। हॉर्लिक्स के इस्तेमाल से आपके बच्चे का कद बढ़ जाएगा, शरीर मजबूत होगा और बुद्धि तेज होगी। इसी तरह कॉम्प्लान पीने से बच्चों की बुद्धि तेज होती है। विज्ञापनों में किए गए ऐसे दावों का इन कंपनियों के पास कोई आधार नहीं होता। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ने ऐसे विज्ञापनों को गंभीरता से लिया है। एफएसएसएआई ने 38 ब्रैंड्स के दावों की जांच शुरू की है। 19 केसों में कंपनियों को शो कॉज नोटिस जारी कर दिया गया है।

संसद में पेश की गई फूड रेग्युलेटर की रिपोर्ट में कहा गया है कि कई कंपनियां न सिर्फ विज्ञापनों में बल्कि प्रॉडक्ट्स की पैकिंग में भी गलत जानकारी दे रही हैं। जैसे कि कॉम्प्लैन का दावा था कि इसे यूज करने वाले बच्चों की ग्रोथ आम बच्चों के मुकाबले दोगुनी हो जाती है। इसके साथ ही बूस्ट और हॉरलिक्स भी बिना किसी स्टडी के दावा कर रहे थे कि उनके चॉकलेट ड्रिंक्स से स्टैमिना बढ़ता है।

एक अखबार ने जब इस मामले में संबंधित कंपनियों से बात की तो इस मामले में उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। संसद में पेश रिपोर्ट में एफएसएसएआई ने बताया है कि कुछ प्रॉडक्ट्स ऐसे भी पाए गए जिनकी पैकिंग में जो दिखाया गया था अंदर वैसा कुछ नहीं था। जैसे कि केलॉग्स एक्स्ट्रा मूसली के पैकेट में बनी तस्वीर में कई सारे फ्रूट दिखाए गए हैं लेकिन प्रॉडक्ट में वे फल हैं ही नहीं।

इसके साथ ही सफोला, राजधानी बेसन और रियल ऐक्टिव फाइबर समेत कई सारे प्रॉडक्ट्स जांच के दायरे में हैं, जो दावा करते हैं कि उनके यूज से न सिर्फ वजन कम होता है, बल्कि फिटनेस भी अच्छी होती है। कुछ कंपनियों की तरफ से आए जवाब को फूड रेग्युलेटर ने रिजेक्ट कर दिया है। साफ है, धोखे के बाजार में फरेब के विज्ञापनों के जरिए आपकी जेब काटी जा रही है।

हिन्दुस्तान में दिल के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है, मोटापे के मरीजों की तादाद भी देश में तेजी से बढ़ रही है, डायबिटीज के मरीज भी भारत में सबसे अधिक हैं। ये कुछ तथ्य हैं और इन्हीं तथ्यों पर बाजार और बड़ी-बड़ी कंपनियों की नजर है। बीमारियों से मुनाफा कमाने का आइडिया आज का बाजार और बाजार पर राज करने वाली कंपनियों को बखूबी पता है।

क्या सफोला में बनी चीजें जी भर खाकर आप अपने दिल को संभाल कर रख सकते हैं? कंपनी की माने तो हां, लेकिन जानकारों की मानें तो ना। मेरिको लिमिटेड ने अपने उत्पाद के पैकेट पर दिल को संकेत रूप में लगा रखा है और दावा किया है कि उनका उत्पाद सफोला दिल को सेहतमंद रखता है। परिवार के सेहतमंद दिल का राज उसमें छुपा है। इसी तरह ब्रिटेनिया न्यूट्रीच्वाइस का दावा है कि उनके उत्पाद में अलग से चीनी नहीं डाली जाती, कॉम्पलैक्स कार्बोहाइड्रेट नहीं होते यानी कि वो डायबिटीक फ्रेंडली होते हैं।

फूड रेग्यूलेटर का मानना है कि ये दावे गुमराह करने वाले हैं। फूड रेग्यूलेटर के मुताबिक ऐसी कंपनियां जो अपने उत्पाद को बेचने के लिए भ्रामक विज्ञापनों का सहारा लेती हैं बाजार में उनकी काफी भरमार है। फूड सेफ्टी अधिनियम 2006 और पैकेजिंग-लेबलिंग अधिनियम 2011 के तहत उल्लंघन के मामले में कई बड़ी कंपनियों के नाम भी शामिल हैं। एफएसएसएआई की ओर से जारी एक लिस्ट में कई बड़ी कंपनियों के खिलाफ पैकेजिंग-लेबलिंग अधिनियम का उल्लंघन करने के मामले भी सामने आए हैं।

एफएसएसएआई के मुताबिक इन कंपनियों के खिलाफ अधिनियम उल्लंघन के मामले दर्ज किए गए हैं और संबंधित अधिकारी को जानकारी दे दी गई है। अथॉरिटी की ओर से कैडबरी के उत्पाद बोर्नविटा लिटिल चैंप्स में डीएचए की मौजूदगी और इसके फायदे को साबित नहीं करने के संबंध में मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा राजधानी फ्लोर मिल्स के राजधानी बेसन पर भी आपत्ति है। इसके विज्ञापन में ‘हार्ट लोगो’ और 'करो दिल से दोस्ती' स्लोगन को गुमराह करने वाला माना गया है।

यही नहीं, केलोग्स स्पेशल के ने अपना बाजार महिलाओं को निशाने पर रखकर खड़ा किया है। कंपनी का दावा है कि छरहरी काया पाने के लिए उनका उत्पाद मुफीद है लेकिन अथॉरिटी इस दावे को पचा नहीं पा रहीं। इस विज्ञापन को भी कायदे के खिलाफ माना जा रहा है। लोगों को लुभाने और दिमाग पर छाने की होड़ में अब तो ऐसे-ऐसे विज्ञापन आ रहे हैं, जिन्हें परिवार के साथ देखना किसी सजा से कम नहीं।

First published: November 29, 2012
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