हेल्थ इज वेल्थ: कैसे बचें स्लीप डिसार्डर से

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Updated: October 6, 2014, 11:06 AM IST
हेल्थ इज वेल्थ: कैसे बचें स्लीप डिसार्डर से
क्या रातभर सोने के बाद भी आप थका हुआ महसूस करते हैं। दिन में आपको बार-बार झपकी लेने का मन करता है, या फिर, गाड़ी चलाते वक्त आपकी आंख लग जाती है।
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नई दिल्ली। क्या रातभर सोने के बाद भी आप थका हुआ महसूस करते हैं। दिन में आपको बार-बार झपकी लेने का मन करता है, या फिर, गाड़ी चलाते वक्त आपकी आंख लग जाती है। अगर हां, तो इसे हल्के में मत लीजिए। क्योंकि, ये थकान नहीं, बिमारी के लक्षण है। इसे स्लीप डिसार्डर कहते है, जो दुनियाभर में 45 फीसदी लोगों को होता है और दिल की बिमारी के साथ भी इसका संबंध है।

हेयर स्टाइलिस्ट विल्मा को नींद की बिमारी थी। चाहे जो करें, रात में 2 बजे से पहले वो सो ही नहीं पाती थीं और फिर दिनभर उन्हें नींद सताती थी। दोपहर 3 बजे से पहले वो ठीक से काम ही नहीं कर पाती थी। ऑफिस मीटिंग्स में झपकी आती और बार-बार वॉशरूम में वो सोने चली जाती थी। लेकिन जब घरेलू जिंदगी पर असर पड़ने लगा, तब विल्मा पहुंची स्लीप स्पेशलिस्ट के पास। इलाज के दौरान पता चला कि विल्मा को ऑयरन की कमी थी। साथ ही, उसके सोने के रूटीन को भी थेरेपी के जरिए बदला गया।

विल्मा की समस्या को तो समाधान मिल गया। लेकिन, भारत में हर 5 में से 1 इंसान कभी ना कभी स्लीप डिसऑर्डर यानी नींद की बिमारियों से पीडित रहता है। वजह है हमारी भाग दौड़ भरी व्यस्त जीवन शैली और बढ़ता मोटापा। बड़ी समस्या ये भी है की इसके मरीज समय रहते इलाज नहीं करवाते। क्योंकि नींद ना आना हमें बहुत छोटी बात लगती है। लेकिन, ये सोचना गलत है। नींद ना आना बड़ी बीमारियों के लक्षण भी हो सकते हैं। हमारे लिए रोज 7-8 घंटे की नींद जरूरी होती है। यह न सोचें कि वीकेंड में 12 घंटे सोने से नींद पूरी हो जाती है।

स्लीप डिसॉर्डर्स क्लीनिक की डॉ. प्रीति देवनानी का कहना है कि नींद पूरी ना होने से ब्लड शुगर, बीपी कंट्रोल नहीं होता है, वजन बढ़ता है, दिल की बीमारी और ब्रेन स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है। डॉ. प्रीति देवनानी ने यह भी बताया कि इससे महिलाओं में डिप्रेशन बढ़ता है और बच्चों को ध्यान देने में परेशानी होती है। यहां तक कि नींद न आने की बीमारी हमारी उग्र कम कर देती है।

स्लीप डिसॉर्डर के लक्षणों के बारे में बताते हुए डॉ. प्रीति देवनानी ने कहा कि इसमें नींद आने में दिक्कत होती है और बार-बार नींद टूटती है। सुबह सुबह थकावट महसूस होती है और दिन में झपकियां आती रहती हैं। मरीज को गाड़ी चलाते वक्त नींद आती है और वह सोते वक्त खर्राटे लेता है।

डॉक्टर बताते हैं कि अगर रात को नींद आने में दिक्कत महसूस हो रही हो, या रात में आप बार-बार उठतें है, या फिर रातभर सोने के बाद भी आपको थकावट महसूस होती है, तो आपको नींद की बिमारी हो सकती है। इसके अलावा दिन में झपकी आना, गाडी चलाते वक्त आँख लग जाना भी इसके लक्षण है। नींद में खर्राटे लेना अपने आप में एक स्लीप डिसॉर्डर है। इन सभी लक्षणों का इलाज थैरपी से हो सकता है। कुछ मामलों में जैसे खर्राटे के लिए डिवाइस के इस्तेमाल से भी मदद मिलती है। लेकिन, सबसे ज्यादा फायदा अपनी जीवनशैली बदलने से होगा। नींद के लिए एक रूटीन बनाना होगा।

डॉ. प्रीति देवनानी का कहना है कि अपने सोने-जागने का समय तय करें। रात में जल्दी खाना खाएं। साने से पहले सिगरेट, शराब ना लें और वातावरण शांत रखें। इस बीमारी में एक्सरसाइज से भी मदद मिलती है। काम घर पर नहीं ले जाने से भी नींद आने में मदद मिलेगी। सबसे बड़ी बात, सोने के एक घंटे पहले मोबाईल, आई-पैड जैसे गैजेट से अपने आप को डिस्कनेक्ट कर लें और इन्हें बेडरूम से हटा दें। आम तौर पर वयस्क को हर रात 7-7.5 घंटे और स्कूली बच्चों को 10 घंटे नींद की जरुरत है। याद रखें वीकेंड पर 12 घंटे सोने से बात नहीं बनती है।
First published: October 6, 2014
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