एम्स की रिपोर्ट, मोबाइल रेडिएशन से बढ़ता है ब्रेन ट्यूमर का खतरा

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Updated: March 7, 2017, 7:51 PM IST
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मोबाइल रेडिएशन को लेकर क्या कंपनियां झूठ बोलती हैं? क्या लोगों का ध्यान भटकाने के लिए रिसर्च में जानबूझकर ऐसा बताया जा रहा है कि मोबाइल से रेडिएशन नहीं होता? क्या वाकई मोबाइल हमें बीमार कर रहा है? ऐसे कई सवालों के जवाब देश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान में से एक  एम्स की स्टडी से आपको मिल जाएंगे.

एम्स ने मोबाइल रेडिशन पर रिसर्च करने वाली अलग-अलग रिपोर्ट का अध्ययन कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है. और रिपोर्ट का सार समझें तो यही लगता है कि कंपनियां अपने फायदे के लिए गलत आंकड़े पेश करती हैं.

एम्स की रिपोर्ट, मोबाइल रेडिएशन से बढ़ता है ब्रेन ट्यूमर का खतरा
मोबाइल रेडिएशन को लेकर क्या कंपनियां झूठ बोलती हैं? क्या लोगों का ध्यान भटकाने के लिए रिसर्च में जानबूझकर ऐसा बताया जा रहा है कि मोबाइल से रेडिएशन नहीं होता?

बता दें कि दुनियाभर में 48,452 लोगों पर हुए ऐसे 22 अध्ययनों पर ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ साइंसेस यानि एम्स विश्लेषण करते हुए कहा है कि मोबाइल रेडिएशन से ब्रेन ट्यूमर का खतरा 33 फीसदी तक बढ़ जाता है. वहीं सरकारी फंडेड रिसर्च ने भी मोबाइल से ब्रेन ट्यूमर का खतरा बताया है.

इंडस्ट्री फंडेड रिसर्च के मुताबिक मोबाइल से ब्रेन ट्यूमर के प्रमाण नहीं मिलते है. लेकिन अभी भी कंपनियां ये मानने को तैयार नहीं है कि मोबाइल रेडिएशन को लेकर वो कुछ छुपाती हैं.

First published: March 7, 2017
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