वायु प्रदूषण के चलते एंटीबायोटिक दवाएं हो रही हैं बेअसर

आईएएनएस
Updated: March 3, 2017, 6:28 PM IST
वायु प्रदूषण के चलते एंटीबायोटिक दवाएं हो रही हैं बेअसर
वायु प्रदूषण से बैक्टीरिया की क्षमता में बढ़ोतरी हो जाने के कारण सांस से जुड़ी परेशानी के इलाज में दी जाने वाली एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर हो जाती हैं.
आईएएनएस
Updated: March 3, 2017, 6:28 PM IST
वायु प्रदूषण से बैक्टीरिया की क्षमता में बढ़ोतरी हो जाने के कारण सांस से जुड़ी परेशानी के इलाज में दी जाने वाली एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर हो जाती हैं. यह बात एक शोध में सामने आई है.

ब्रिटेन में लीसेस्टर यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर जूली मोरीसे ने कहा कि शोध से हमें यह समझने में मदद मिली है कि किस तरह वायु प्रदूषण मानव जीवन को प्रभावित करता है.

मोरीसे ने कहा कि इससे पता चलता है कि इंफेक्शन पैदा करने वाले बैक्टीरिया पर वायु प्रदूषण का काफी प्रभाव पड़ता है. वायु प्रदूषण से इंफेक्शन का प्रभाव बढ़ जाता है. इस शोध में बताया गया है कि वायु प्रदूषण कैसे हमारे शरीर के श्वसन तंत्र (नाक, गले और फेफड़े) को प्रभावित करता है.

वायु प्रदूषण का प्रमुख घटक कार्बन है. यह डीजल, जैव ईंधन व बायोमास के जलने से पैदा होता है. शोध से पता चलता है कि यह प्रदूषक जीवाणु के उत्पन्न होने और उसके समूह बनाने की प्रक्रिया को बदल देता है. इससे उनके श्वसन मार्ग में वृद्धि और छिपने और हमारा इम्यूनिटी सिस्टम से लड़ने में सक्षम हो जाता है.

यह शोध दो मानव रोगाणुओं स्टेफाइलोकोकस अयूरियस और स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया पर किया गया. यह दोनों प्रमुख श्वसन संबंधी रोगकारक हैं जो एंटीबायोटिक के प्रति हाई लेवल का प्रतिरोध दिखाते हैं.

शोध दल ने पाया कि कार्बन स्टेफाइलोकोकस अयूरियस के एंटीबायोटिक बर्दाश्त करने की क्षमता को बदल देता है. यह स्टेफालोकोकस निमोनिया के समुदाय की पेनिसिलीन के प्रति प्रतिरोधकता को भी बढ़ा देता है.

इसके अलावा पाया गया कि कार्बन स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया को नाक से निचले श्वसन तंत्र में फैलाता है, जिससे बीमारी का खतरा बढ़ जाता है.
First published: March 3, 2017
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