एक अनोखा मंदिर, जहां होती है भारत माता की पूजा!

आईएएनएस
Updated: August 14, 2012, 5:30 AM IST
एक अनोखा मंदिर, जहां होती है भारत माता की पूजा!
यह ऐसा मंदिर है, जिसमें न तो घंटे, घंटी और जाजम है और न ही पूजा-पाठ के लिए हवन कुंड है, अगर कुछ है तो हाथ में तिरंगा लिए भारत माता की मूर्ति।
आईएएनएस
Updated: August 14, 2012, 5:30 AM IST
इंदौर। मंदिरों में आमतौर पर देवी देवताओं के साथ लोग अपने आराध्य की मूर्ति स्थापित कर उन्हें पूजते हैं, मगर मध्य प्रदेश के इंदौर में एक ऐसा मंदिर है जहां भारत माता की पूजा होती है। इस मंदिर में कोई आरती नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति गीतों की गूंज सुनाई देती है। सदगुरू धार्मिक एवं परमार्थिक ट्रस्ट ने आम जन में राष्ट्रीय भावना जागृत करने के मकसद से सुखलिया इलाके में भारत माता मंदिर का निर्माण कराया है। वैसे तो यह बाहर से आम मंदिर की तरह नजर आता है, मगर भीतर से ऐसा नहीं है। यह ऐसा मंदिर है, जिसमें न तो घंटे, घंटी और जाजम है और न ही पूजा-पाठ के लिए हवन कुंड है, अगर कुछ है तो हाथ में तिरंगा लिए भारत माता की मूर्ति।

इस मंदिर में बॉर्डर वाली गहरे रंग की साड़ी पहने हाथ में तिरंगा थामे स्थापित भारत माता की प्रतिमा के पीछे भारत का नक्शा बना हुआ है। इस मंदिर में कोई पुजारी नहीं है। यह मंदिर नियमित रूप से सुबह-शाम खुलता है। इस मंदिर की देख-रेख की जिम्मेदारी बुजुर्ग महिला राजाबाई पर रहती है। संत उदय सिंह देशमुख 'भइयू महाराज' का कहना है कि आमजन में राष्ट्रधर्म की भावना विकसित करना उनका मकसद है, इसी बात को ध्यान में रखकर उन्होंने भारत माता मंदिर का निर्माण कराया है। यह मंदिर लोगों को धर्म के नाम पर लड़ाता नहीं, बल्कि राष्ट्रधर्म के जरिए जोड़ता है।

इस मंदिर के पास ही नगर निगम और आमजन के सहयोग से मंदिर के करीब ही करगिल स्मारक व पार्क का निर्माण कराया गया है, ताकि यहां आने वाले बच्चे देश के लिए कुर्बानी देने वाले नायकों के बारे में जान सकें। सूर्योदय आश्रम के योग साधना प्रभाग की डॉ सुरेखा भारती कहती हैं कि भारत माता का मंदिर और करगिल स्मारक हर किसी के लिए प्रेरणास्रोत है। यहां हर रोज लगभग 200 लोगों का आना होता है। सूर्योदय आश्रम की प्रबंधक देविका राजे फालके ने बताया कि 15 अगस्त के स्वाधीनता दिवस पर देवी-देवताओं की तरह विधि-विधान से भारत माता की पूजा अर्चना होगी। राष्ट्रध्वज वंदन के साथ राष्ट्रभाव की प्रतिज्ञा दिलाई जाएगी और प्रतिमा की महाआरती होगी।

First published: August 14, 2012
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