महाकुंभ 2013: जहां हठयोगी लेटे हैं कांटों की सेज पर

आईएएनएस

Updated: February 25, 2013, 4:35 AM IST
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इलाहाबाद। तीर्थराज प्रयाग में चल रहे महाकुंभ मेले में तरह-तरह के बाबा अपने हठयोग से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। कोई 11 साल से एक पैर पर खड़ा है, तो कोई 12 साल से एक हाथ ऊपर किए हुए हैं। ऐसे ही एक बाबा इन दिनों संगम तट पर कांटों की सेज पर नंगे बदन लेटकर सबके कौतूहल का विषय बने हैं।

कांटों की सेज पर लेटने का ये हठयोग करने के लिए संगम पहुंचे इन बाबाओं में से एक का नाम ज्ञान दास है, जो राजस्थान के रहने वाले हैं। संगम तट पर जाने के रास्ते में श्रद्धालुओं को बाबा ज्ञान दास के दर्शन हो जाते हैं।

महाकुंभ 2013: जहां हठयोगी लेटे हैं कांटों की सेज पर
तीर्थराज प्रयाग में चल रहे महाकुंभ मेले में तरह-तरह के बाबा अपने हठयोग से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं।

ज्ञान बाबा का कहना है कि वह एक महीने से महाकुंभ मेले में मौजूद रहकर साधना कर रहे हैं। बाबा से इस हठयोग का कारण पूछने पर उन्होंने कहा कि इस हठयोग को करने के पीछे की मंशा विश्व का कल्याण है। उन्होंने इसी भावना से 12 साल तक पूरे माघ महीने में इस हठयोग को करने का प्रण लिया है।

बाबा वस्त्र त्याग कर त्रिवेणी किनारे ठंड में कांटों की सेज पर बड़ी सहजता से सोते हैं और तो और, अगर इन्हें ठंड भी लगती है तो वह कांटों को ही अपना ओढ़ना बना लेते हैं।

बाबा बताते हैं कि इस हठयोग को करने के लिए विशेष वर्जिश और योग की जरूरत होती है। कई साल की तपस्या के बाद यह ताकत इंसान के शरीर में आ जाती है और तब कांटे भी फूल बन जाते हैं।

बाबा ने बताया कि योग की शक्ति से उनका शरीर एकदम लोहे जैसा बन गया है, जिस कारण उन्हें कांटे पर सोने, बैठने और ओढ़ने में कोई दिक्कत नहीं होती। बाबा ज्ञान दास को देखने के लिए यहां भीड़ उमड़ पड़ती है। संगम आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु बाबा के इस अद्भुत रूप को बड़ी आश्चर्य भरी नजरों से देखता है।

उल्लेखनीय है कि मकर संक्रांति (14 जनवरी) से शुरू हुआ महाकुंभ मेला महाशिवरात्रि के दिन यानी 10 मार्च को संपन्न होगा।

First published: February 25, 2013
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