अंतिम सांसें गिन रही नूरपुर सिल्क मिल

ETV Haryana/HP
Updated: May 20, 2017, 11:11 AM IST
अंतिम सांसें गिन रही नूरपुर सिल्क मिल
नूरपुर को रेशम का शहर का नाम देने वाली नूरपुर सिल्क मिल आज अंतिम सांसें गिन रही है. आलम यह है कि यह हिमाचल प्रदेश सरकार की यह मिल कभी भी हमेशा के लिए बंद हो सकती है. सरकार की लगातार अनदेखी ही इसके पतन का कारण है.
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Updated: May 20, 2017, 11:11 AM IST
नूरपुर को रेशम का शहर का नाम देने वाली नूरपुर सिल्क मिल आज अंतिम सांसें गिन रही है. आलम यह है कि हिमाचल प्रदेश सरकार की यह मिल कभी भी हमेशा के लिए बंद हो सकती है. सरकार की लगातार अनदेखी ही इसके पतन का कारण बनती जा रही है.

1965 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इस सिल्क मिल का शिलान्यास किया था. एक समय सिल्क मिल की पूरे क्षेत्र में तूती बोलती थी. काफी दूर दूर तक यहां तैयार होने वाले कपड़ों की डिमांड थी.

चाहे वे रेशम की साड़ियां हों, टोपी हो या फिर जैकेट हो, धागे से लेकर हर तरह के कपड़े का यहां उत्पादन होता था. बड़ी संख्या में लोग इस मिल में काम करते थे. लेकिन इसकी लगातार अनदेखी करने के कारण इसकी स्थिति खराब होती जा रही है और आज मरणासन्न स्थिति में पहुंच गई है. मात्र कुछ ही कर्मचारी इसमें कार्यरत हैं.

सरकार द्वारा इसका न तो प्रचार -प्रसार किया गया और न ही इसके काम में कोई मूलभूत परिवर्तन किया गया. लोग शोरूम की चकाचौंध के कारण उनकी ओर आकर्षित हो जाते हैं. इस मिल के शो-रूम 25 साल पुराने फैशन को दर्शाते हैं जो बाजार में कहीं नही टिक पाते.

पूर्व विधायक राकेश पठानिया का कहना है कि इस मिल में बहुत बड़े पैमाने पर परिवर्तन करने की जरूरत है. जिसके लिए इस सरकार ने साढ़े चार वर्षों में कुछ नहीं किया. उन्होंने कहा कि अब भाजपा सरकार आने के बाद इस मिल को जीवंत करने के हर संभव प्रयास किए जाएंगे.
First published: May 20, 2017
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