कुत्तों के आतंक के साये में जी रहा शिमला

Krishna Singh | ETV Haryana/HP
Updated: April 21, 2017, 5:24 PM IST
कुत्तों के आतंक के साये में जी रहा शिमला
फोटो-ईटीवी
Krishna Singh | ETV Haryana/HP
Updated: April 21, 2017, 5:24 PM IST
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में आवारा और पालतू कुत्ते लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं. कुत्तों के आतंक से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का घर से निकलना मुश्किल हो रहा है. नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े खुद इसकी गवाही दे रहे हैं.

शहर की हर गली और सड़क पर आवारा कुतों के झुंड दिखते हैं. डीडीयू जोनल अस्पताल स्थित स्टेट इंट्रा डर्मल एंटी रैबीज क्लीनिक एंड रिसर्च सेंटर में दर्ज आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष जानवरों के काटने के 3112 मामले सामने आए. इसमें पालतू कुत्तों के काटने के सबसे ज्यादा 1068 मामले हैं, जबकि आवारा कुत्तों ने 766 लोगों को काटा .

यही नहीं, 186 ऐसे मामले हैं, जहां रेबीज से ग्रस्त कुत्तों ने पहले गाय को काटा जिससे गाय को रेबीज हो गया और लोगों तक भी रेबीजग्रस्त दूध ही पहुंचा. इस माह अब तक कुत्तों द्वारा काटने के 110 मामले सामने आ चुके हैं.

नगर निगम वर्ष 2006 से अब तक 9 हजार आवारा कुत्तों की नसबंदी कर चुका है.

बीते वर्ष ही 461 आवारा कुत्तों की नसबंदी हुई है, लेकिन समस्या ज्यों कि त्यों है.
पागल या रैबीज से ग्रस्त कुत्तों को पकड़ कर 10 दिन तक सेंटर में रखा जाता है. 10 दिन तक यदि कुत्ता जिंदा रहता है तो उसे छोड़ दिया जाता है.

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, जानवर के काटने पर सबसे पहले जख्म को 10 से 15 मिनट तक साबुन और पानी से लगातार धोएं, ताकि वायरस न फैल सके. इसके बाद किसी नजदीकी अस्पताल में जाएं. सभी अस्पतालों में एंटी रैबीज वेक्सीन निशुल्क उपलब्ध है.
First published: April 21, 2017
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