इस 'महान युवा' ने अमेरिका जाकर दुनिया को बताया था, ज्ञान के मामले में भारत संसार का पितामह है..!

News18India.com

Updated: July 4, 2016, 3:53 PM IST
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भारतीय सभ्‍यता और संस्‍कृति के विराट दर्शन को समझना आज भी उतना ही दुरूह है, जितना की 100 साल पहले था। आज ऐसे समय में जबकि हमारे पास सूचनाओं के संचार के लिए तमाम साधन हैं, ऐसे में भारतीय दर्शन का विशाल और विराट ज्ञान प्रकाश का कई हिस्‍सा आज भी हमारे लिए कौतुक जगाता है और हमें अचरज में डालता है।

यकीनन ऐसे में यह तथ्‍य बेहद आश्‍चर्य में डालता है कि आज से तकरीबन 100 से 150 साल पहले आखिर भारत के आध्‍यात्‍मिक ज्ञान वैभव को आखिर दुनिया ने कैसे जाना होगा? कैसे समझा होगा?

इस 'महान युवा' ने अमेरिका जाकर दुनिया को बताया था, ज्ञान के मामले में भारत संसार का पितामह है..!
पिछले 2 हजार साल के इतिहास में भारत में यह एक ऐसा युवा हुआ है, जिसकी वजह से भारतीय आध्‍यात्‍मिक ज्ञान के विराट वैभव को पूरी दुनिया में पहचाना गया..!

एक समय था जब भारत को बर्बर जंगली सभ्‍यता का देश कहा जाता था और भारतीयों को कबीले में रहने वाला असभ्‍य और जंगली कहा जाता था, वहीं उसी दौर में भारत के एक नौजवान ने दुनिया के सबसे शक्‍तिशाली देश अमेरिका में जाकर भारत के इसी आध्‍यात्‍मिक ज्ञान प्रकाश को पूरी दुनिया से परिचित कराया।

इस युवा ने यह बताया कि भारत का आध्‍यात्‍मिक ज्ञान, वेद वेदांग, उपनिषद, पुराण और पूरा हिंदू धर्म अथाह आत्‍मिक ज्ञान, धन संपदा से भरा है और अतीत में भारत विश्‍व गुरु कहा जाता था।

दरअसल, इस युवा का नाम था स्‍वामी विवेकानंद। विवेकानंद का जन्‍म 12 जनवरी 1869 को पश्‍चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ था, जबकि उनकी मृत्‍यु 4 जुलाई 1902 को हुई थी। आज ही विवेकानंद की पुण्‍यतिथि है।

विवेकानंद भारत की वैचारिक ज्ञान संपदा के एकमात्र प्रतिनिधि रहे। ये विवेकानंद ही थे, जो वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदान्त दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुंचा।

महज 39 साल की उम्र में स्वामी विवेकानन्द भारत के लिए जो काम कर गए वह पूरी दुनिया के लिए संपूर्ण भारत का परिचय था। यही वजह है कि भारतीय सनातन परंपरा, हिंदू संस्‍कृति और सभ्‍यता को जिस रूप में आज पूरी दुनिया जानती है, वह विवेकानंद की ही देन है।

विवेकांनद देश के ऐसे युवा थे, जिन्‍होंने महज 30 साल की उम्र में दुनिया के सबसे शक्‍तिशाली देश शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन में हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया और उसे सार्वभौमिक पहचान दिलवाई।

गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने एक बार कहा था-"यदि आप भारत को जानना चाहते हैं तो विवेकानन्द को पढ़िये। उनमें आप सब कुछ सकारात्मक ही पायेंगे, नकारात्मक कुछ भी नहीं।"

First published: July 4, 2016
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