झारखंड में हो चुका हरित क्रान्ति का उलगुलान-सीएम

First published: January 13, 2017, 2:48 PM IST | Updated: January 13, 2017, 2:48 PM IST
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झारखंड में हो चुका हरित क्रान्ति का उलगुलान-सीएम
किसानों की आय दोगनी करने के उद्देश्य से शुक्रवार को स्टेट क्रेडिट सेमिनार का आयोजन किया गया. मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि झारखंड में हरित क्रांति का उलगुलान हो चुका है जिसके लिए नाबार्ड समेत सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी.

किसानों की आय दोगनी करने के उद्देश्य से शुक्रवार को स्टेट क्रेडिट सेमिनार का आयोजन किया गया. मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि झारखंड में हरित क्रांति का उलगुलान हो चुका है जिसके लिए नाबार्ड समेत सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी.

एक मंच पर जुटे कई संगठन

झारखंड की संस्कृति गांवों में बसती है और गांव के विकास से ही विकसित राज्य की कल्पना की जा सकती है. स्टेट क्रेडिट सेमिनार का आयोजन इसी बात को ध्यान में रख कर किया गया था. नाबार्ड, विभिन्न एनजीओ, एसएलबीसी समेत कई संगठन एक मंच पर जुटे और मंथन किया कि राज्य के किसानों की हालात कैसे सुधारे. 2022 तक किसानों की आय दोहरीकरण को लेकर सभी हितधारकों की जिम्मेदारियों पर सीएम ने खुलकर बोला. 2017 -18 के लिए प्रथमिकता क्षेत्र के तहत 20 हजार  सौ 48 करोड़  ऋण का अनुमान लगाया गया है जो 2016-17 के कुल योजना से दस प्रतिशत अधिक है. दूसरे राज्कृयों से अनाज मंगाने की नौबत नहीं लाने से नीली नीली क्रांति तक पर सीएम ने चर्चा की. कृषि सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने हर जिले में लक्ष्य को पूरा करने के लिए नाबार्ड को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया. साथ ही कहा कि सेमिनार के बाद से टास्क शुरू होता है. हर किसी को जिम्मेदारी समझने की जरूररत है.

खेती के साथ करें पशु/मछली पालन

गांव की तस्वीर बदलने में नाबार्ड के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता. नाबार्ड ने पशुपालन ,मत्सस्य पालन से जुड़े लोगों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है क्योंकि सिर्फ कृषि पर निर्भर रहकर किसान आर्थिक रूप से मजबूत नहीं हो सकते. नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक एस मंडलने कहा कि माइक्रो एटीएम के जरिए हर प्रखंड में कैशलेस को बढ़ावा देने के लिए जोर दे रहे हैं. किसान क्रेडिट कार्ड को कैंप लगाकर वितरित करने का काम सभी बैंक के सहयोग से चलाया जाएगा. वहीं सेमिनार में बेहतर करने वाली संस्थाओं क मुख्यमंत्री ने पुरस्कृत भी किया.

बहरहाल, राज्य सरकार का पूरा फोकस गांव के विकास पर है जिसके लिए सीएम ने आगामी बजट को भी गांव को समर्पित बताया है. उम्मीद की जाती है आने वाले समय में इस प्रयास से झारखंड के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को लाभ मिलेगा.

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