सब्जियों की गिरी कीमतों ने बढ़ायी किसानों की मुश्किलें, लागत वसूली पर भी आफत

Upendra Kumar | ETV Bihar/Jharkhand

First published: January 14, 2017, 4:22 PM IST | Updated: January 14, 2017, 5:25 PM IST
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सब्जियों की गिरी कीमतों ने बढ़ायी किसानों की मुश्किलें, लागत वसूली पर भी आफत
राज्य में अच्छी पैदावार के चलते इन दिनों सब्जियां कौड़ी के भाव बिक रही हैं. सब्जियां सस्ती होने के चलते भले ही खरीददार के चेहरे पर खुशी है, पर किसानों के लिए यह एक दुखद दौर से कम नहीं है. टमाटर, गोभी से लेकर मटर तक की सस्ती कीमत ने किसानों के चेहरे को उदास कर दिया है.

राज्य में अच्छी पैदावार के चलते इन दिनों सब्जियां कौड़ी के भाव बिक रही हैं. सब्जियां सस्ती होने के चलते भले ही खरीददार के चेहरे पर खुशी है, पर किसानों के लिए यह एक दुखद दौर से कम नहीं है. टमाटर, गोभी से लेकर मटर तक की सस्ती कीमत ने किसानों के चेहरे को उदास कर दिया है.

लागत वसूली भी मुश्किल

वैसे तो जाड़े के सीजन में सब्जियों के दाम धाराशायी होते रहे हैं पर इस वर्ष सब्जियों के दाम कुछ इस कदर गिरे हैं कि किसानों की कमर टूट गई है. महीनों की हाड़तोड़ मेहनत, पटवन, खेत का पट्टा देकर सब्जी उगानेवाले किसानों को अपना लागत मूल्य भी निकालना मुश्किल हो रहा है.  हेथू बस्ती की महिला किसान गीता देवी कहती हैं कि तीन हजार रुपए लगात से मूली की खेती की. पांच-छह रुपए प्रति किलो के दाम मिल रहे हैं. ऐसे में तो लागत भी वसूल नहीं हो पाएगा.

ये हैं थोक दाम

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सब्जियों के थोक रेट ,जिसपर किसान सब्जी बेचते हैं, जानकर कर आप भी हालात से रु-ब-रु हो जाएंगे. गोभी- 3 रुपए किलो, मटर-10 रुपए किलो, टमाटर-02 रुपए किलो, बैंगन-4 रुपए किलो, मूली-5 रुपए किलो, शिमला मिर्च-10 रुपए किलो, गाजर-10 रुपए किलो बिक रहे हैं.

मंत्री जी कहते तस्वीर बदलने की बात

सब्जियों के थोक में गिरे भाव यह दर्शाने के लिए काफी है कि किस कदर सब्जियां सस्ती हो गई हैं. सरकार अगर सजग रहती और फूड प्रोसेसिंग उद्योग को बढ़ावा दिया जाता तो किसानों को इस दौर में बर्बादी के कागार पर पहुंचने से रोका जा सकता था. पर झारखंड में अभी तक किसान की हितों की तो बात हुई पर योजनाएं धरातल पर नहीं उतरी हैं. राज्य के कृषिमंत्री रणधीर सिंह किसानों को हतोत्साहित नहीं होने का भरोसा दिलाते हुए कहा कि मोमेंटम झारखंड और ग्लोबल समिट के बाद परिस्थितियां बदल जाएगी. फूड प्रोसेसिंग यूनिट शुरू होने से मटर, टमाटर जैसी फसलों से किसानों को व्यवसायिक लाभ होगा.

बहरहाल, कर्ज लेकर किराए की जमीन में सब्जियां उगानेवाले किसानों का दर्द समझना मुश्किल नहीं . कोशिश यह होनी चाहिए कि फूड प्रोसेसिंग उद्योग की जिला स्तर पर स्थापना की जाए ताकि किसान तंगहाली से बच सके.

 

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