मुझे चमकीली हरी जॉर्जेट साड़ी वाली मां याद है

News18Hindi
Updated: May 13, 2017, 8:48 PM IST
मुझे चमकीली हरी जॉर्जेट साड़ी वाली मां याद है
अपनी मां की गोद में नताशा बधवार
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Updated: May 13, 2017, 8:48 PM IST
नताशा बधवार

प्यारी मां,

कई बार तुम मुझसे पूछा करती थीं कि तुम्हें क्या पहनना चाहिए?
मुझे वो तोतई रंग की जॉर्जेट वाली साड़ी याद है, जो कलकत्ता में तुमने मेरे स्‍कूल के स्पोर्ट्स डे पर पहनी थी. उस रोज़ जब तुम न्‍यू अलीपुर में हमारे घर से शहर के बीचोंबीच बने स्टेडियम तक आ रही थी, तुम्हारे लिए वो बहुत ही हिम्मत का काम था. उस दिन पापा दफ्तर से छुट्टी नहीं ले सके थे और इसलिए तुम्हें अकेले ही आना पड़ा था. मां, उस दिन तुम किसी प्रभावी महिला की तरह तैयार हुई थी. अपनी अमेरिकी साड़ी को शानदार पर्स और सैंडिल के साथ तुमने बड़ी खूबसूरती से संभाला था. तुम कितनी ही बसें और ट्राम बदलकर आईं, सिर्फ मुझे उस 200 मीटर की रेस में दौड़ते हुए देखने के लिए.

और आखिरकार तुम वहां थीं, दर्शकों में बैठी हुई. अपने बड़े-से काले चश्मे के पार मुझे देखती हुई. मैं उस रेस में जीत नहीं पाई थी. मगर जब मैंने तुम्हें वहां बैठे देखा तो लगा कि हम दोनों वह रेस जीत चुके हैं.

मैं तुम्हें हमेशा से ऐसे ही देखना चाहती थी. इतनी ही आज़ाद और खूबसूरत. आत्मविश्वास से भरपूर. मेरी मां.

अगली बार जब तुमने मुझसे ये पूछा था कि तुम्हें क्या पहनना चाहिए, तब मैं 12 साल की थी. उस वक़्त मैं अस्पताल के बिस्तर पर थी. मुझे बहुत सारे फ्रैक्चर हो गए थे. मुझे अंदरूनी चोटें आई थीं. मैं परेशान थी. उन दिनों हमारे परिवार पर एक साथ कई मुसीबतें आ पड़ी थीं.

उन दिनों तुम पूरा समय मेरे साथ अस्पताल की चारदीवारी में घिरी रहती थी. मेरे साथ समय बिताती थी. फिर शाम को भाइयों के पास घर लौट जाया करती क्योंकि उनको अगली सुबह स्कूल जाना होता था. तुम्‍हें उन्हें तैयार करना होता था.

एक दिन तुमने पूछा, "कल मैं क्या पहनकर आऊं?"

फिर मैंने तुम्हारी सबसे चमकीली साड़ी का नाम बताया, जो लाल, नीले और सुनहरे रंग की थी. वो साड़ी मुझे बहुत खूबसूरत लगती थी. और इत्तेफ़ाक़न ये भी जॉर्जेट की ही थी. ये साड़ी तुमने दिल्ली के करोल बाग से खरीदी थी, जब हम गर्मी की छुट्टियों में वहां घूमने गए थे. तुम्हें भी ये साड़ी बहुत पसंद थी, लेकिन तुम "फिर कभी किसी अच्छे मौके पर पहनूंगी" कहकर हमेशा उसे पहनना टाल देती थी.

तुम्हें हमेशा इस तरह के चटक और चमकीले रंग पसंद थे. मगर तुम बहुत कम ही ऐसे रंगों के कपड़े पहनती थी. तुम बस लोग क्या कहेंगे कि सोचकर रह जाती. तुम्हें हमेशा डर लगा रहता था कि गाढ़े रंग के कपड़े पहने तो लोग क्या कहेंगे?

लेकिन अगली सुबह तुम मेरी बताई हुई वो खूबसूरत साड़ी ही पहनकर आई.

उस दिन मैं शायद अस्पताल के बिस्तर से तुम्हें दुआएं दे रही थी. हमेशा ऐसी ही खूबसूरत बने रहने की दुआएं. मैं कहना चाहती थी कि मां तुम अपने लिए समय निकालो, मैं तुम्हें प्यार करती हूं. ये दुनिया तुम्हें प्यार करती है.

कहते हैं कि हर आत्मीय रिश्ते की अपनी एक अनोखी भाषा होती है. लेकिन कई बार हम उसे पहचानने में बहुत समय लगा देते हैं. हमारे घर में जहां दादाजी, पापा और मेरे दो भाई थे, तुम और मैं ही दो महिलाएं थीं.

हम दोनों के रिश्ते में ऐसे मौके कम ही आए, जब हम दोनों साथ बैठकर बहुत देर खिलखिलाते रहे हों. लेकिन इसी दूर और पास के खेल ने इस रिश्ते को और खूबसूरत बना दिया. ये रिश्ता मेरे लिए अनमोल हो गया.

मेरी पास तुम्हारी जितनी भी यादें हैं, वो एक बहुत ही व्यस्त मां की हैं. मगर यादों की काली-सफ़ेद पट्टी के बीच ये सब बातें मेरे लिए किसी सुनहरी रौशनी की तरह हैं.

हैप्पी मदर्स डे मां.
तुम्‍हारी बेटी
नताशा
First published: May 13, 2017
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