‘मुश्किल या आसान कुछ नहीं होता. बात ये है कि क्या आपको अपने काम से प्यार है’

Manisha Pandey
Updated: March 25, 2017, 1:17 PM IST
Manisha Pandey
Updated: March 25, 2017, 1:17 PM IST
 

पिछले दिनों भारत आया इतालवी ऑर्केस्ट्रा ‘ऑर्केस्त्रा द कामेरा दि मान्तोवा’ दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में अपनी प्रस्तुति दे रहा था. बीच में एक ऐसा मौका आया, जब लोग अपनी कुर्सियां छोड़ खड़े हो गए. तकरीबन पांच-सात मिनट तक पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा.

यूं तो पूरा ऑर्केस्त्रा द कामेरा दि मान्तोलवा ही शानदार था, लेकिन इस बार जिसके जादू में सब अपनी कुर्सियां छोड़ उठ खड़े हुए थे, वह मंच के बीचोंबीच खड़े घुंघराले बेतरतीब बालों वाले शख्स अलियास बेगुश थे, जिनका चेहरा दस मिनट तक लगातार क्लैरिनेट बजाने से बिलकुल लाल हो गया था.

बॉलीवुड गाना गाने की कोशिश करते और क्लैरिनेट बजाते अलियास बेगुश

कॉन्सर्ट के ठीक पहले अलियास बगीचे के एक एकांत कोने में बैठकर प्रसिद्ध ऑस्ट्रियन कंडक्टर निकोलस हार्नोकार्ट की किताब ‘द म्यूजिकल डायलॉग’ पढ़ रहे थे, जब हमारे इसरार पर किताब छोड़कर क्लैरिनेट बजाने के लिए राजी हो गए. उन्होंने न्यूज18 हिंदी के लिए अपने देश का एक फिल्मीे गाना भी क्लैरिनेट पर बजाया, लेकिन बॉलीवुड म्यूजिक नहीं बजा पाए. हालांकि कोशिश जरूर की, गाने की और बजाने की भी.

अलियास सोलो क्लैरिनेट वादक हैं. कार्लो फैबियानो के ट्रूप के साथ पहली बार हिंदुस्ता्न आए हैं. यूं तो स्लोवे‍निया के हैं, लेकिन इतालवी भाषा के साथ अंग्रेजी भी फर्राटेदार बोलते हैं. उन्हेें  हिंदुस्तान के लोग और यहां का मसालेदार खाना खासतौर पर बहुत पसंद है.

अलियास की संगीत की शिक्षा सात साल की उम्र में स्लोवेनिया की राजधानी जुबजाना के म्यूजिक स्कूल से शुरू हुई. वे पांच बार रिपब्लिक ऑफ स्लोवेनिया के यंग म्यू‍जिशियन कॉम्पटीशन के विजेता रह चुके हैं और कहते हैं, ‘इतनी कम उम्र में ऑर्केस्त्रा द कामेरा दि मान्तोवा के साथ जुड़ना गर्व की बात है.’

क्लैरिनेट ही क्यों ? ये बजाना ज्यादा मुश्किल नहीं है? यह पूछने पर अलियास कहते हैं,  'मुश्किल या आसान कुछ नहीं होता. बात ये है कि क्या आपको अपने काम से प्यार है.' वे अपने क्लैैरिनेट को सीने से चिपकाकर कहते हैं, ‘मुझे इससे प्यार है.’
कार्लो फैबियानो ने कहा कि प्यार ही संगीत है. अलियास को अपने क्लैरिनेट से प्‍यार है.

संगीत की गलियों में आप कहीं से शुरू करके कहीं भी चले जाएं, पहुंचते प्यार पर ही हैं.
First published: March 25, 2017
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर