पहले गुदवाया था ब्वॉयफ्रेंड का नाम, अब टैटू में कैसे लिखवाऊं पति का नाम?

Pooja Batra | News18India
Updated: January 23, 2017, 1:45 PM IST
पहले गुदवाया था ब्वॉयफ्रेंड का नाम, अब टैटू में कैसे लिखवाऊं पति का नाम?
Photo- news18
Pooja Batra | News18India
Updated: January 23, 2017, 1:45 PM IST
पिछले कुछ वक्त से युवाओं में टैटू का क्रेज तेजी से बढ़ा है. इसी बढ़ते क्रेज और ट्रेंडी टैटू के बारे में विस्तार से जानने के लिए न्यूज18 इंडिया ने टैटू एक्सपर्ट प्रशांत कुमार से बात की.

प्रशांत ने बताया कि यूं तो बहुत सारे अलग-अलग टैटू लोग अपने शरीर पर गुदवाते हैं. लेकिन आजकल जो सबसे लेटेस्ट टैटू ट्रेंड में है वो है मां-पा का टैटू. इस टैटू में मां और पा लिखा होता है, फिर उसके आगे लाइफलाइन जुड़ी होती है. उसके बाद हम हार्टबीट यानि दिल की धड़कनें जोड़ देते हैं. इसका क्रेज आजकल काफी देखने को मिला है, वो चाहे लड़कियां हों या लड़के, या फिर हो शादीशुदा कपल इस टैटू को लोग काफी पसंद कर रहे हैं.

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इसके अलावा लड़कों में भगवान भोले शंकर का टैटू काफी पसंद किया जाता है. ओम....परिंदे.. बुद्ध का टैटू भी लोग बनवाते हैं, या फिर कुछ लोग अपने शरीर पर मंत्र भी गुदवाते हैं. लेकिन अभी मां-पा वाला टैटू सबसे ज्यादा ट्रेंड में है.

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आजकल ब्लैकआउट टैटू भी काफी चलन में है. Tattooholic नाम से स्टूडियो चलाने वाले प्रशांत ने बताया कि इन दिनों युवा अपने शरीर के बड़े हिस्से पर काला पेंट यानी ब्लैकआउट कर बॉडी ऑर्ट बनवा रहे हैं.

(तस्वीर साभार : मिरर)
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इस तरह के टैटू सबसे पहले सिंगापुर में चलन में आए हैं. यहां पैर, हाथ, बाजू, छाती, कमर आदि के बड़े हिस्से को काले पेंट से रंगकर टैटू बनवाया जा रहा है. इस तरह के टैटू बनवाने वाले युवा इनसे बेहद खुश हैं और इन्हें सोशल मीडिया पर भी शेयर कर रहे हैं.

ब्लैकआउट का मतलब होता है ब्लैक आउटलाइन से बना टैटू. इसका सबसे ज्यादा फायदा होता है जब आपने एक बार अपने ब्वॉयफ्रेंड का टैटू बनवा लिया लेकिन कुछ दिन के बाद कपल का ब्रेकअप हो जाता है और शादी किसी और के साथ तय हो जाती है तब सवाल उठता है कि इस टैटू का क्या करें. तब हम इस ब्लैकआउट टैटू को एक फिलर के तौर पर यूज करते हैं.

(तस्वीर साभार : मिरर)
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आजकल कुछ लोग ब्लैकआउट टैटू को किसी रंग से भरवाते हैं, आपने देखा होगा कुछ लोगों के शरीर पर अलग-अलग रंगों से भरा टैटू होता है. प्रशांत ने कहा, हालांकि  हमें इसमें रंग नहीं भरवाना चाहिए क्योंकि एक तो रंग ज्यादा दिन तक टिकता नहीं है, दूसरा ये सबके शरीर पर अच्छा लगता भी नहीं है. गोरी चमड़ी के लोगों पर ही इस तरह का टैटू ज्यादा फबता है.

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टैटू बनवाने से पहले और बाद की सावधानियां
- टैटू बनवाने से पहले जब आपका दिल और दिमाग दोनों राजी हो जाएं तो स्किन की मंजूरी लेना भी बहुत जरूरी हो जाता है. यानि अगर आपको ब्यूटी प्रोडक्ट्स से एलर्जी है, तो हो सकता है कि आपको इंक यानि की टैटू से भी एलर्जी हो सकती है. अगर आपकी त्वचा बहुत सेंसिटिव है कोई चोट या खरोंच सहन नहीं कर सकती तो आपको टैटू बनवाने से पहले थोड़ा इंतजार करना चाहिए. अभी स्किन टैटू के लिए तैयार नही है.

- डिज़ाइन के बारे में पहले ही तय कर लें कि आपको क्या बनवाना है. अगर आप इसे लेकर कन्फ्यूज़ हैं तो ये आपके टैटू में नज़र आएगा. टैटू बनवाने से पहले अपने टैटू आर्टिस्ट से एक बार पहले जाकर मिल लें और उसे बताएं कि आपको क्या चाहिए.

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- टैटू बनवान से पहले टैटू पार्लर की साफ- सफाई भी ठीक से देख लें. ताकि इंफेक्शन होने का खतरा नहीं रहे. एकबार जब आप सबकुछ तय कर लें तो डिज़ाइन किसी को एक बार दिखा ज़रूर लें.

- टैटू बनवाने का सबसे महत्पूर्ण हिस्सा है दर्द. अगर आपको सुई से डर लगता है औऱ एक टैटू आर्टिस्ट आपको इंजेक्शन लगाने वाले डॉक्टर की तरह नजर आता है तो फिर आपके लिए मुश्किल हो सकती है. हालांकि आपको शुरुआत में थोड़ा दर्द होगा लेकिन कुछ देर के बाद ये दर्द कम हो जाएगा.

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-टैटू बनवाने के बाद किसी भी सूरत में आपके टैटू पर दो हफ्तों तक पानी नहीं लगना चाहिए. एक और ज़रूरी बात आपके टैटू को धूप भी नहीं लगनी चाहिए. सूरज  किरणें आपकी त्वचा को जला देती हैं. टैटू वाली जगह को कम से कम दो हफ्तों तक के लिए ढक कर रखें. टैटू से एक परत जैसी निकलेगी और इसमें हल्की खुजली भी होगी. लेकिन इसे खुजलाने से बचें. हर रोज़ इस पर थोड़ा-थोड़ा मॉइश्चराइज़र या फिर ऑलिव ऑयल लगाएं और ये खुजली को धीरे-धीरे कम कर देगा.

-टैटू को शुरुआत में नार्मल पानी की बजाय मिनरल वॉटर से धोएं.

- अपने टैटूज़ का चुनाव सिर्फ गूगल पर सर्च करके नहीं बल्कि ऐसा डिजाइन चुने जिसका आपकी जिंदगी में कोई मतलब हो. आप एक ऐसा डिज़ाइन भी चुन सकते हैं जिसमें बाद में बदलाव किया जा सके. क्योंकि टैटू हटवाने से बेहतर है कि उसमें कुछ बदलाव कर दिए जाएं. इसे हटाना ना सिर्फ बहुत महंगा है बल्कि बहुत कष्टकारी भी है.

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आपको बता दें कि खूबसूरत रंग-बिरंगी डिजाइनें जब टैटू के माध्यम से शरीर के अलग-अलग हिस्सों में उकेरी जाती हैं तो इन अंगों की खूबसूरती और भी अधिक बढ़ जाती है.टैटू के फैशन का जो नशा इन दिनों युवा पीढ़ी पर छाया हुआ है. दरअसल, सदियों पहले वह एक प्रथा हुआ करता था. प्राचीन चीन में टैटू असभ्य जनजातियों की निशानी माने जाते थे. चीनी साहित्य में ऐतिहासिक नायकों और डाकुओं से भी टैटू को जोड़ा गया है. चीन में कैदियों के चेहरे पर ‘囚’ निशान बनाया जाता था जो उनके अपराधी होने का प्रमाण था.

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भारत में भी स्थायी टैटू जिन्हें गोदना कहा जाता था, का इतिहास बहुत पुराना है. दक्षिण भारत में स्थायी टैटू को पचकुतरथु कहा जाता था. इस तरह के टैटू 1980 के दशक से पहले तमिलनाडु में बहुत कॉमन थे. भारत में टैटू विभिन्न जनजातियों से संबंधित लोगों की निशानी हुआ करते थे. अलग-अलग जाति और जनजाति के लोग अपनी पहचान के लिए टैटू बनवाते थे.
First published: January 23, 2017
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