सुप्रीम कोर्ट ने बीएस-3 वाहनों पर लगाई रोक, शोरूम से बाहर नहीं जाएंगी 8.24 लाख गाड़ियां


Updated: March 29, 2017, 3:22 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने बीएस-3 वाहनों पर लगाई रोक, शोरूम से बाहर नहीं जाएंगी 8.24 लाख गाड़ियां
सुप्रीम कोर्ट से ऑटोमोबाइल कंपनियों को बड़ा झटका लगा है. दिन ब दिन बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए कोर्ट ने 1 अप्रैल 2017 से ऑटो निर्माता कंपनियों के बीएस-3 गाड़ियां बेचने पर रोक लगा दी है.

Updated: March 29, 2017, 3:22 PM IST
सुप्रीम कोर्ट से ऑटोमोबाइल कंपनियों को बड़ा झटका लगा है. दिन ब दिन बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए कोर्ट ने 1 अप्रैल 2017 से ऑटो निर्माता कंपनियों के बीएस-3 गाड़ियां बेचने पर रोक लगा दी है.

ऑटो कंपनियों के पास कुल 8.24 लाख बीएस वाहन स्टॉक में पड़े हैं.इसमें साढ़े छह लाख से ज़्यादा दोपहिया वाहन, करीब 40 हजार तिपहिया, 96 हजार के करीब व्यावसायिक वाहन और करीब 16 हजार कारें हैं.

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इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वाहन कंपनियों को 2014 में ही बीएस-चार अधिसूचना के बारे में पता था और जब लोगों को 2010 से ही इसके बारे में जानकारी हो गई थी, इसके बावजूद कंपनियों ने स्टाक खत्म नहीं किया. कोर्ट ने  कहा कि सड़क पर चलने वाली गाड़ियों के अनुपात में संख्या कम हो, लेकिन लोगों के स्वास्थ्य को ताक पर नहीं रखा जा सकता.

कोर्ट ने कहा कि यह मामला सीधे-सीधे स्वास्थ्य से जुड़ा है और ऐसे मामले में हम कंपनियों के फायदे के लिए लोगों के स्वास्थ्य को खतरे में नहीं डाल सकते.

वाहन निर्माताओं के संगठन सियाम ने दी थी ये दलीलें

वाहन निर्माताओं के संगठन सियाम की ओर से कहा गिया कि कंपनियों को यह स्टॉक निकालने के लिए करीब एक साल का समय चाहिए. उनका कहना है कि इन्हें हटाने का काम धीरे-धीरे होना चाहिए क्योंकि 2010 से मार्च 2017 तक 41 वाहन कंपनियों ने 13 करोड़ बीएस-तीन वाहन बनाए हैं.

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सियाम का कहना है, ‘हम प्रतिष्ठित कंपनियां हैं. हमें खलनायक के रूप में नहीं दिखाया जाना चाहिए. हम भाग नहीं रहे हैं. हम भी चाहते हैं कि हमारा वातावरण प्रदूषणमुक्त हो.'

संगठन के मुताबिक एक अप्रैल, 2017 से ऐसे वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगाना इस उद्योग पर अचानक धावा बोलने जैसा होगा. उनका तर्क है कि वाहन उद्योग देश का दूसरा सबसे अधिक रोजगार देने वाला और सबसे उंची दर से कर देने वाला उद्योग है.
First published: March 29, 2017
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