बीएस-3 और बीएस-4 क्‍या है? जानिए आपकी जेब और सेहत पर क्‍या डालेगा असर...

News18Hindi
Updated: March 31, 2017, 1:13 PM IST
बीएस-3 और बीएस-4 क्‍या है? जानिए आपकी जेब और सेहत पर क्‍या डालेगा असर...
सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए बीएस 4 मानकों का पालन नहीं करने वाली गाड़ियों की बिक्री पर रोक लगा दी है. तो आइए जानते हैं कोर्ट का ये फैसला क्यों जरूरी था और इसका आप पर क्या प्रभाव पड़ेगा.
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Updated: March 31, 2017, 1:13 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए बीएस 4 मानकों का पालन नहीं करने वाली गाड़ियों की बिक्री पर रोक लगा दी है. तेजी से बढ़ते प्रदूषण  और लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य पर होने वाले बुरे असर को देखते हुए कोर्ट ने ये फैसला लिया है.

बीएस 4 मानक 1 अप्रैल 2017 से सभी ऑटो निर्माता कंपनियों पर लागू होंगे.
पर कोर्ट का ये फैसला क्यों जरूरी है इसका आप पर क्या प्रभाव पड़ेगा. तो आइए जानते हैं क्या था बीएस 3 क्या है. जिसके तहत आज तक कंपनियां वाहन बनाती आई हैं.  बता दें कि ऑटो कंपनियों के पास कुल 8.24 लाख बीएस 3 वाहन स्टॉक में पड़े हैं. इसमें साढ़े छह लाख से ज़्यादा दोपहिया वाहन, करीब 40 हजार तिपहिया, 96 हजार के करीब व्यावसायिक वाहन और करीब 16 हजार कारें हैं.

क्या होता है बीएस

बात करते हैं बीएस की तो बता दें कि इसमें बीएस का मतलब होता है 'भारत स्टेज' और आई वी का मतलब होता है 4. ये एमिशन स्टैंडर्ड केंद्र सरकार द्वारा तय किया जाता है जो गाड़ी में लगे इंजन की प्रदूषण क्षमता को बताता है. इन नियमों को तेजी से लागू करते हुए केद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नियम बनाए हैं.

आम आदमी पर कितना होगा असर
आपको बता दें कि तमाम बड़ी आॅटो कंपनियों ने बीएस 4 मानकों के अनुरूप इंजन को डेवलप कर या तो पुराने मॉडल की गाड़ियों को रीलॉन्च कर दिया है या फिर पुराने मॉडल को खत्म कर दिया है. इसका आम आदमी पर सीधा असर ये होगा कि अब उन्हें किसी भी कंपनी का एंट्री मॉडल पहले की तुलना में महंगा मिलेगा. वहीं स्वास्थ्य के तौर पर ये गाड़ियां पहले की अपेक्षा बेहतर साबित होंगी. हालांकि सरकार का लक्ष्य बीएस 6 मॉडल को देश में लागू करवाना है जिसमें अभी वक्त लगेगा.

यूरोपियन तर्ज पर आधारित है भारत के इंजन मानक
वहीं भारत स्टेज के मानक यूरोपियन मानक यूरो 4 और यूरो 6 पर आधारित है, और अमल में लाए जाते हैं. ये मानक दुनिया भर में ऑटोमोबाइल कंपनियों द्वारा इस्तेमाल में लाए जाते हैं और इनसे ये पता चलता है कि कोई वाहन वातावरण को कितना प्रदूषित करता है.

प्रदूषण कम करना है पहली प्राथमिकता
भले ही लागू किए गए उत्सर्जन नियम सुनने में अच्छे लगते हों पर अभी भी देश में तेजी से बढ़़ रहे प्रदूषण स्तर को कम करने के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है. बता दें कि दुनिया की सबसे ज्यादा प्रदूषित देशों की सूची में भारत का नाम शामिल है. इसके लिए वाहनों को सबसे बड़ी वजह माना जाता है. इस वक्त समय की मांग है कि प्रदूषण के स्तर को हर संभव तरीके से वैश्विक स्तर पर कम किया जाए.

वाहन कंपनियों को घाटा
वैसे तो वाहन निर्माता कंपनियों को बीएस 4 मानक के वाहन को 1 अप्रैल 2017 तक बना लेना चाहिए था. जहां कुछ वाहन निर्माताओं ने अपने टार्गेट को पूरा करते हुए अपने मॉडल्स को अपग्रेड कर लिया है वहीं बहुत से निर्माताओं का बीएस 3 मानक वाला स्टॉक अब भी शोरूम में है. जिस पर आज तक सेल चल रही है.

 

भविष्य की संभावनाएं
1 अप्रैल 2017 से बीएस 4 मानक वाले वाहनों को खरीदने के लिए आम आदमी को पहले से ज्यादा खर्च करना होगा. इसके साथ ऑटोमोटिव सेक्टर का लक्ष्य 2020 तक बीएस 6 तक पहुंचना भी है. पर इसके लिए काफी पैसों की जरूरत पड़ेगी.

वहीं ऑयल रिफाइनरीज को भी इस लायक बनाना होगा ताकि वो उच्च गुणवत्ता वाले तेल का निर्माण कर सकें. साथ ये भी सुनिश्तित करना होगा कि ये देश में आसानी से उपलब्ध हों.इसके साथ वाहन निर्माता कंपनियों को भी अपनी तरह से बड़ा निवेश करना होगा ताकि वो जल्दी से जल्दी इस दिशा में आगे बढ़ सकें.

 
First published: March 31, 2017
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