खतरनाक बुखार: अपने मां-बाप को भी नहीं पहचान पा रहे हैं बच्चे

News18India
Updated: July 18, 2017, 7:17 AM IST
खतरनाक बुखार: अपने मां-बाप को भी नहीं पहचान पा रहे हैं बच्चे
स्वाइन फ्लू से पीड़ित बच्चा (फाइल फोटो- गैटी इमेजेज)
News18India
Updated: July 18, 2017, 7:17 AM IST
बुखार, कफ और गले में खराश. इस मौसम में वायरल फीवर में ऐसा ही होता है. लेकिन हर मामले में ऐसा नहीं होता. वायरल फीवर जैसा लगने वाला एक खतरनाक इन्फेक्शन अब बच्चों के दिमाग को बीमार बनाने लगा है. उन्हें दौरे पड़ने लगे हैं, वो कोमा में चले जाते हैं. हाल ये है कि वो अपने माता पिता को भी नहीं पहचान पा रहे हैं.

बच्चों में दिमाग का इन्फेक्शन

मुंबई में एक महीने में ऐसे 6 मामले सामने आ चुके हैं यानी खतरनाक इन्फेक्शन से हुआ बुखार दिमाग पर चढ़ गया है. इन्फेक्शन की वजह से बच्चे अपने माता पिता को नहीं पहचान सके. वो किसी भी ऐसे चेहरे को नहीं पहचान पा रहे, जिसे वो आमतौर पर पहचानते थे. ऐसे बच्चों का आईसीयू में इलाज करना पड़ा. उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा. जानकारों का कहना है कि इस खतरनाक बुखार को वक्त पर पहचानने की जरूरत है. क्योंकि इस मौसम में जब बुखार, खराश और कफ होता है तो आमतौर पर इसे वायरल फीवर समझ लिया जाता है, जबकि ये खतरनाक किस्म का इन्फेक्शन है. इसे एच1एन1 कहते हैं. बोलचाल की भाषा में स्वाइन फ्लू. स्वाइन फ्लू यानी वो बीमारी, एक वक्त जिसका एक भी मामला मिल जाता था तो खबर बन जाती थी. अब ऐसा नहीं होता.

दरअसल, 8 साल पहले 2009 में ये बीमारी बहुत बड़े पैमाने पर भारत में आई. लिहाजा इसे रोकने की कोशिश हुई. स्वाइन फ्लू के मरीजों को अलग वार्ड में रखा जाने लगा, लेकिन अब इसका इलाज वैसे ही किया जाने लगा है जैसे दूसरे खतरनाक इन्फेक्शन का किया जाता है. यानी स्वाइन फ्लू अब देश में जड़ जमा चुका है. अब हर साल स्वाइन फ्लू के हजारों मामले आ रहे हैं. बहुत से लोग स्वाइन फ्लू के कारण जान से हाथ धो बैठते हैं.

खतरनाक हुआ स्वाइन फ्लू

इसी साल की बात करें तो 9 जुलाई तक देश में एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू के करीब साढ़े 12 हजार मामले सामने आ चुके हैं. और स्वाइन फ्लू के इन्फेक्शन से 9 जुलाई तक 600 मरीजों की मौत भी हो गई. मतलब ये कि स्वाइन फ्लू का खतरा लगातार बढ़ रहा है. पिछले साल की बात करें तो स्वाइन फ्लू के करीब 1750 मामले ही सामने आए थे. इनमें होने वाली मौत भी कम थी. तब सिर्फ 265 मौत हुई थी.

हालांकि, इसके ठीक एक साल पहले यानी 2015 में स्वाइन फ्लू बड़े पैमाने पर फैला था. असल में 2015 में स्वाइन फ्लू से सबसे ज्यादा मौत हुई थी. तब स्वाइन फ्लू के करीब साढ़े बयालिस हजार मामले सामने आए थे और इसकी वजह से करीब 3000 मौत हुई थी. इससे पहले इतने मामले तब देखे गए थे जब देश में पहली बार स्वाइन फ्लू बड़े पैमाने पर फैला यानी 2009 में. जब करीब 50 हजार लोग स्वाइन फ्लू के शिकार हुए थे.

स्वाइन फ्लू से प्रभावित राज्य

लेकिन, इस बार भी हालात बहुत अच्छे नहीं है. अभी ही स्वाइन फ्लू के साढ़े 12 हजार मामले सामने आ चुके हैं. मौतों की संख्या भी 600 तक पहुंच चुकी है तो समझा जा सकता है कि हालात कितने खराब हैं. खास बात ये है कि ये सारे मामले कुछ ही राज्यों से आ रहे हैं. इनमें से सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र से हैं. यहीं मुंबई में बच्चों को स्वाइन फ्लू से दिमागी बीमारी भी हो गई. पूरे महाराष्ट्र की बात करें तो यहां करीब 2300 मामले सामने आए हैं. इनमें से करीब 280 मरीजों की मौत भी हो गई.

इसके बाद तेलंगाना में स्वाइन फ्लू सबसे ज्यादा फैला है. यहां करीब साढ़े 1400 मामले सामने आए हैं, जिनमें 17 मरीजों की मौत हो गई. वैसे मौतों की बात करें तो महाराष्ट्र के बाद सबसे ज्यादा मौत गुजरात में हुई है. हालांकि, यहां स्वाइन फ्लू के मामले कम हैं. यहां पर 9 जुलाई तक करीब 290 मामले ही सामने आए हैं लेकिन मौत ज्यादा हुई है. गुजरात में स्वाइन फ्लू से 75 मरीजों की मौत हो चुकी है. कुछ यही हाल केरल का भी है. केरल में स्वाइन फ्लू के करीब 1100 मामले अस्पताल तक पहुंचे हैं, जिनमें से 63 मरीजों की मौत हो चुकी है. वैसे केरल में मॉनसून के दस्तक देने के बाद से ही हालात खराब हैं. यहां पर वायरल, डेंगू और मलेरिया भी खूब फैला है.

जो 5 राज्य स्वाइन फ़्लू से सबसे ज्यादा परेशान हैं उनमें राजस्थान भी है. यहां 407 मामले सामने आए हैं. 59 मामलों में मरीजों की मौत भी हो गई. तो एक तरफ जहां एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू से होने वाली मौत चिंता की बात है तो इस बार इससे होने वाला दिमागी बुखार भी परेशानी की बात है. आमतौर पर जब स्वाइन फ्लू का इन्फेक्शन बहुत खतरनाक हो जाता है तब दिमागी बुखार होता है. यानी स्वाइन फ्लू से दिमाग पर पड़ने वाला असर नया नहीं है. हालांकि, इस बार ऐसे मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं. पिछले साल के मुकाबले इन्फेक्शन भी ज्यादा हो रहा है.

वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके पीछे स्वाइन फ्लू का एक नए किस्म का वायरस जिम्मेदार है. ये नए किस्म का वायरस पिछले साल के अंत में सामने आया था और इस साल ये अपनी पूरी ताकत के साथ लौटा है, इसलिए जैसे ही बुखार, नाक बहना, गले में खराश और कफ जैसे लक्षण हों तो उन्हें हल्के में न लें. डॉक्टर को दिखाएं और टेस्ट करा कर इत्मिनान कर लें कि मामला वायरल फीवर का है या किसी और किस्म के इन्फेक्शन का.

ये भी पढ़ें-

30 के बाद हो सकती हैं परेशानियां, जानिए पिता बनने की सही उम्र?

क्या आप जानती हैं आपकी आंखों का मेकअप उनकी रोशनी भी छीन सकता है?
First published: July 18, 2017
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर