करोड़ों ट्विटर खातों का कोई मालिक नहीं, अपने आप चलते हैं बॉ्टस एकाउंट्स

आईएएनएस

Updated: March 12, 2017, 12:52 PM IST
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एक नई रिसर्च के मुताबिक सोशल मीडिया साइट ट्विटर के करीब 9 से 15 फीसदी एक्‍टिव एकाउंट सेल्‍फ एग्‍जिस्टेंस हैं. इसे बॉट्स यानी की सेल्‍फऑटोमेटेड कंप्यूटर प्रोग्राम भी कहा जाता है. एक तरह से यह एकाउंट्स मनुष्‍यों द्वारा संचालित नहीं किए जाते और इनके कोई मालिक नहीं है. रिसर्च के मुताबिक, इस माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर 30 करोड़ से ज्यादा मंथली एक्‍टिव यूजर्स हैं और इनमें से करीब 2.7 करोड़ से लेकर 4.5 करोड़ खाते मनुष्यों द्वारा संचालित नहीं किए जाते हैं.

अमेरिका में हुआ रिसर्च

करोड़ों ट्विटर खातों का कोई मालिक नहीं,  अपने आप चलते हैं बॉ्टस एकाउंट्स
एक नई रिसर्च के मुताबिक सोशल मीडिया साइट ट्विटर के करीब 9 से 15 फीसदी एक्‍टिव एकाउंट सेल्‍फ एग्‍जिजटेंस हैं. इनमें से करीब 2.7 करोड़ से लेकर 4.5 करोड़ खाते मनुष्यों द्वारा संचालित नहीं किए जाते हैं.

यह रिसर्च अमेरिका की इंडियाना यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ साउर्थन केलिफोर्निया में किया गया. रिसर्चर ने यह जानने की कोशिश की कि ट्विटर की कितनी सामग्री बॉट्स द्वारा पैदा की जाती है.

रिसर्चर ने बताया, "हमारा अनुमान है कि करीब 9 से 15 फीसदी तक ट्विटर खाते बॉट्स हैं." ट्विटर पर बॉट्स खातों की पहचान के लिए रिसर्चर ने यूजर्स के फ्रेंड्स, ट्वीट किया गया कंटेंट और सेंसेटिविटी, नेटवर्क पैटर्न और एक्‍टिविटी के समय की सीरीज के पब्‍लिक किए गए डेटा की स्‍टडी की.

ऐसे करते हैं काम ये एकाउंट्स

रिसर्च के मुताबिक इस तरह के एकाउंट्स का आपस में अच्‍छा रिलेशन होता है और ये कॉमन बॉट्स दूसरे बॉट्स के साथ बातचीत करते हैं, जो अधिक ह्यूमन बिहेवियर का इंडिकेशन है." सीबीएस डॉट कॉम की रिपोर्ट में बताया गया कि रिसर्चर के मुताबिक, कई बॉट्स "जरूरी सोशल वर्क भी करते हैं, जैसे न्‍यूज पब्‍लिशिंग और पब्‍लिकेशन का प्रसार.

गलत एक्‍टिविटी को भी करते हैं सपोर्ट

रिसर्चर के मुताबिक बॉट्स एकाउंट गलत एक्‍टिविटी का भी प्रयोग करते हैं 'और उनका समर्थन कर सकते हैं,  जैसे आतंकवादी गतिविधियों का प्रचार और भर्ती आदि. रिसर्च के मुताबिक, इस माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर महीने में 30 करोड़ से ज्यादा एक्‍टिव यूजर्स हैं और इनमें से करीब 2.7 करोड़ से लेकर 4.5 करोड़ खाते मनुष्यों द्वारा संचालित नहीं किए जाते हैं.

First published: March 12, 2017
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