एटीएम पर मंडराता खतरा, खतरे में आपका बैंक अकाउंट!

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Updated: December 14, 2016, 11:56 AM IST
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नई दिल्ली। मौजूदा वक्त को छोड़ दें तो हम लगभग हर दूसरे दिन एटीएम से पैसे निकालते हैं। लेकिन अगर आपको ये पता चले कि यही एटीएम आपके बैंक अकाउंट के लिए खतरा है तो शायद आप उससे बचने लगेंगे, लेकिन यह बात सच भी है। क्योंकि देश के 70 फीसदी एटीएम इस वक्त सुरक्षित नहीं हैं।

हैकर्स की नजर सिर्फ ईमेल या सोशल मीडिया अकाउंट पर ही नहीं बल्कि आपके डेबिट कार्ड पर भी है, और यह करना बहुत आसान है क्योंकि भारत में लाखों एटीएम मशीनों का सॉफ्टवेयर अपग्रेड नहीं किया गया है। इस बात की पूरी संभावना है कि एटीएम को हैक कर आपके डेबिट कार्ड की पूरी जानकारी ली जा सके। जिस माइक्रोसॉफ्ट सॉफ्टवेयर पर एटीएम काम करते हैं वो दो साल पहले ही आउटडेटेड हो चुका है और अधिकतर बैंकों ने इसे अपग्रेड नहीं किया है। देश भर के 70 फीसदी एटीएम माइक्रोसॉफ्ट एक्सपी पर काम करते हैं जिसके सिक्योरिटी अपडेट देना कंपनी ने 2014 में ही बंद कर दिया था। इसका मतलब ये है कि हैकर्स के लिए इन एटीएम से जानकारी चुराना बहुत आसान है।

एटीएम पर मंडराता खतरा, खतरे में आपका बैंक अकाउंट!
मौजूदा वक्त को छोड़ दें तो हम लगभग हर दूसरे दिन एटीएम से पैसे निकालते हैं। लेकिन अगर आपको ये पता चले कि यही एटीएम आपके बैंक अकाउंट के लिए खतरा है तो शायद आप उससे बचने लगेंगे, लेकिन यह बात सच भी है।

इसी साल देश में सुरक्षा में चूक की खबरों के बाद 32 लाख डेबिट कार्ड खतरे में पड़ गए थे, तब कुछ बैंकों ने कार्ड बदले तो कुछ ने पिन बदलवाए। हालांकि एटीएम हैकिंग दुनियाभर के साइबर एक्सपर्ट्स के लिए एक बड़ा मुद्दा है लेकिन भारत में चिंता और ज्यादा है क्योंकि यहां के लाखों एटीएम अब भी अपग्रेड होने बाकी हैं।

हैकरों के एक ग्रुप ने चेतावनी दी है कि भारत का बैंकिंग सिस्टम आसानी से हैक किया जा सकता है। यही नहीं ग्रुप ने दावा किया है कि वो जल्दी ही भारत सरकार की वेबसाइट हैक करके दिखाएगा। इस चेतावनी को गंभीरता से लेने की जरूरत है क्योंकि ये वही ग्रुप है जिसने विजय माल्या, राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के ट्विटर हैंडल हैक किए थे। लीजन क्रू कहलाने वाले इस ग्रुप के एक मेंबर ने वॉशिंगटन पोस्ट को इंटरव्यू दिया जिसमें उसने ये चेतावनी दी है। ग्रुप का दावा है कि उन्होंने दुनिया भर में करीब पचास हजार सर्वर हैक किए हैं जिनमें कई कंपनियों की जानकारी भी शामिल हो सकती है।

इस तरह के फ्रॉड से कैसे बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान-

बैंकों के ज्यादातर ट्रांजैक्शन ऑनलाइन होते हैं, ऐसे में हैकर्स के लिए बैंकिंग सिस्टम आसान टार्गेट होता है। डेबिट कार्ड का पिन नंबर मिलने के बाद इसे तुरंत बदलें और समय-समय पर पिन बदलते रहें। किसी के साथ पिन नबंर शेयर न करें और किसी भी तरह के संदेहास्पद स्थिति में शक होने पर बैंक या पुलिस से संपर्क करें। एटीएम छोड़ते वक्त कैंसिल बटन जरूर दबाएं। अपने मोबाइल फोन में पिन सेव करके न रखें। एक से ज्यादा अकाउंट्स के लिए एक ही पिन न रखें।

बैंक खाते के ट्रांजैक्शन को चेक करते रहें। ट्रांजैक्शन के मैसेज चेक करें और ई-मेल भी देखें। हो सकता है कि आपके कार्ड की क्लोनिंग भी हो सकती है। अगर आपको लगता है कि आप फंस गए हैं, तो तुरंत बैंक से संपर्क करें और अपना डेबिट कार्ड बदलें। नए डेबिट कार्ड का पिन तुरंत बदलें। बैंकिंग लोकपाल और पुलिस को शिकायत दें।

दरअसल भारत में फाइनेंशियल डाटा चोरी का सबसे बड़ा मामला सामने आ चुका है। 32 लाख बैंक खातों पर साइबर अटैक हो चुका है। एटीएम से डेबिट कार्ड की जानकारी चोरी की गई थी और 19 बैंक इस साइबर फ्रॉड का शिकार हुए थे। इस घटना के सामने आने के बाद एसबीआई ने 6.25 लाख एटीएम कार्ड ब्लॉक किए थे। यही नहीं 26 लाख वीजा कार्ड, मास्टरकार्ड और 6 लाख कार्ड सायबर फ्रॉड का शिकार हुए। वायरस वाले एटीएम पर ट्रांजैक्शन के चलते ये कार्ड शिकार हुए।

First published: December 14, 2016
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