न कैश, न कार्ड का झंझट, अब खाली जेब आईए और सामान घर ले जाइए

News18India
Updated: December 9, 2016, 8:28 AM IST
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Updated: December 9, 2016, 8:28 AM IST
नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद देश कतार बांधे खड़ा है। कातर चेहरे सरकार की ओर देख रहे हैं और सरकार का तर्क है कि देश को कैशलेस इकोनॉमी बनाना है। जब गुजरात के बनासकांठा का छोटा सा गांव अकोदरा कैशलेस हो सकता है तो गांवों में बसा भारत क्यों नहीं? भारत की शहरी आबादी तो कैशलेस दुनिया की ओर कदम बढ़ा चुकी है। नोटबंदी के बाद छोटी-छोटी दुकानों पर भी ई वॉलेट से पेमेंट के ऑप्शंस उलब्ध हैं। लेकिन अब खरीददारी की दुनिया का कायापलट होने वाला है। अब लोगों का ना कैश की ज़रूरत होगी ना कार्ड की। ना बिलिंग के लिए कतारों में बंधकर खड़ा होना होगा। दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी अमेज़ॉन ये सपना सच करने जा रही है।

कंपनी का दावा है कि उसका एप अमेज़ॉन गो एक क्यू आर कोड से काम करेगा। अमेज़ॉन स्टोर में जाकर कोई ग्राहक अपना फोन के जरिए इसे यूज़ कर सकता है। इसके बाद जो भी खरीदना हो उसे खरीद सकता है। सब अमेज़ॉन गो एप में दर्ज होता जाएगा। अगर कोई सामान वापिस रखते हैं तो अमेज़ॉन गो का कार्ट उसे लिस्ट से निकाल भी देगा। सामान वापिस रखते और उसके बाद कार्ट से निकलते हुए शो करना है। इसके बाद ना बिलिंग का झंझट, ना कतार में लगना है। सीधे स्टोर से बाहर और उसके बाद बिल आपके फोन पर। अमेज़ॉन ने इसे जस्ट वॉक आउट टेक्नोलॉजी नाम दिया है।

ऑनलाइन शॉपिंग भी पिछले 5-6 साल में ही ट्रेंड में आई है। लेकिन, उसमें कार्ड चाहिए या फिर ई वॉलेट। अमेज़ॉन गो ग्रोसरी शॉपिंग की दुनिया ही बदलने का दावा करता है। कंपनी का दावा है कि 2017 के शुरुआत में अमेरिका के सिएटल में कंपनी अपना स्टोर शुरू करने जा रही है। अगर सच में ऐसा हो गया तो खरीदारी का अनुभव और दुनिया ही बदल जाएगी। अमेज़ॉन ने अभी तक ये नहीं बताया कि आखिर ऐसा कैसा संभव होगा या फिर इसके पीछे कौनसी तकनीक काम करेगी।

लेकिन इसे समझा जा सकता है। सबसे पहले स्टोर की एंट्री पर मेट्रो स्टेशन जैसे एंट्री सेंसर लगे होंगे। यहां आपको अपनी AMAZON GO ऐप का QR कोड स्कैन करन होगा। स्टोर में घुसते ही एंट्री पर लगा सीसीटीवी आपकी तस्वीर ले लेगा। अब फ़ोन जेब में रखिए और शॉपिंग शुरू कीजिए। अब जैसे-जैसे आप स्टोर में रखी चीज़ों को उठाएंगे वैसे-वैसे शेल्व्स के ऊपर लगा दूसरा सीसीटीवी कैमरा आपकी एक-एक हरक़त कैद करेगा। आपने क्या सामान उठाया, क्या वापिस रखा, सब दर्ज हो जाएगा। कैमरे की नज़र से कुछ छूट भी गया तो शेल्व्स पर लगे इंफ़्रारेड, प्रैशर और लोड सेंसर इसका सटीक अनुमान लगा लेंगे कि वो चीज़ वापस अपनी जगह पर रखी गई या नहीं। आपके AMAZON APP में हिसाब दर्ज होता रहेगा।

जब आपकी शॉपिंग हो जाए तो दुकान से बिना कोई बिल चुकाए निकल जाइए। आपका बिल आपके AMAZON अकाउंट से पे हो जाएगा। जिसका बिल और रसीद आप फोन पर रिसीव करेंगे। ये तकनीक ख़ुद ड्राइव होने वाली कारों से मिलती-जुलती है। ख़बर तो ये भी है कि इस तकनीक में सेंसर आपके हाथ की त्वचा की रंगत तक पहचानता होगा। इसके लिए आपके पास बस तीन चीज़े होनी चाहिए। पहली अमेज़ॉन अकाउंट, दूसरी एक स्मार्टफ़ोन और तीसरी अमेज़ॉन गो ऐप।

अमेज़ॉन को ये आइडिया चार साल पहले आया था। इस ऐप के ज़रिए अमेज़ॉन का मक़सद है आपको बिना लाइन में खड़ा कराए शॉपिंग कराना। यानी खरीदारी के आपके अनुभव को लाजवाब बनाना। इसकी टैगलाइन भी यही है, नो लाइन, सिरियसली। अगर ऐसा हुआ तो ये वॉलमार्ट जैसे सुपरमार्केट की बड़ी कंपनी को कड़ी टक्कर देगा। लेकिन कुछ सवाल भी हैं।

जानकारों के दिमाग़ में इसकी क़ामयाबी को लेकर कुछ संशय भी हैं। क्या फ़िंगरप्रिंट सेंसर और कम्प्यूट्राइज़्ड सिस्टम इतने पैने होंगे कि वो हर शख़्स की पहचान कर पाएं? तकनीकी ख़राबी के वक़्त चोरी की घटनाओं पर कैसे लगाम लगेगी? सिस्टम फ़ेल होने पर बिल में हुई गलतियों को कैसे ठीक किया जाएगा? और क्या ये स्टोर हर जगह लोगों के लिए उपलब्ध होंगे? इन सवालों के जवाब 2017 में अमेज़ॉन का स्टोर देगा। फिलहाल तो अमेज़ॉन गो एप रिटेल शॉपिंग की दुनिया में नई क्रांति जैसा है।
First published: December 9, 2016
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