'मनुष्‍य के हृदय में जो प्रेम है और जो पीड़ा, वही संगीत है'

Manisha Pandey
Updated: March 25, 2017, 11:43 AM IST
Manisha Pandey
Updated: March 25, 2017, 11:43 AM IST
संगीत हिंदी में बात करें या इतालवी में, बात समझ में पूरी-पूरी आती है. संगीत किसी भाषा का मोहताज नहीं, कोई भाषा संगीत की राह में दीवार नहीं. इसीलिए पिछले दिनों जब इटली के जाने-माने वायलिन वादक कार्लो फैबियानो हिंदुस्तान आए तो भाषा और भूगोल की सब सरहदें टूट गईं और बाकी रह गया सिर्फ संगीत.

कार्लो फैबियानो इटली के प्रसिद्ध ऑर्केस्ट्रा "ऑर्केस्त्रा द कामेरा दि मान्तोवा" के कॉन्सर्ट मास्टर हैं. पिछले दिनों वह अपने ट्रूप के साथ हिंदुस्तान की यात्रा पर थे. दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में अपने ऑर्केस्ट्रा की प्रस्तुति से पहले उन्होंने न्यूज18 हिंदी के साथ खास बातचीत की और ऑडिटोरियम से बाहर आकर तमाम शोर-शराबे और बाहरी हलचल के बीच वायलिन भी बजाया.

सुनिए कार्लो फैबियानो की वायलिन पर ये खास प्रस्तुति:

कार्लो को संगीत का शौक बचपन से था और स्कूल से कोई खास लगाव भी नहीं. कार्लो कहते हैं, "लेकिन स्कूल तो जाना पड़ा. स्कूल न जाने का कोई विकल्प ही नहीं था." लेकिन यूनिवर्सिटी की पढ़ाई कार्लो को ज्यादा दिनों तक नहीं बांध सकी. उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया, वायलिन टीचर की नौकरी कर ली और पूरी तरह संगीत को समर्पित हो गए.

उनके दिन की शुरुआत संगीत से होती है और दिन का अंत भी. अपने वायलिन को ऐसे संभालते हैं धूप, हवा और पानी से, जैसे किसी नवजात बच्चे को मां संभालती है. यूं तो आप उनसे सवाल कुछ भी पूछ सकते हैं, लेकिन उनकी आंखों में चमक तभी आती है, जब वायलिन के बारे में बात की जा रही हो.

उनके लिए संगीत क्या है? पूछने पर एक ही जवाब देते हैं- “मनुष्य के हृदय में जो प्रेम है और जो पीड़ा, वही संगीत है.”
First published: March 25, 2017
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