मां के शाश्‍वत ताने : पहले नानी से खुद सुने, अब हमें सुनाती हैं

Jyoti Yadav
Updated: May 13, 2017, 6:45 PM IST
मां के शाश्‍वत ताने : पहले नानी से खुद सुने, अब हमें सुनाती हैं
न मां की मुहब्‍बत कम होती है और न उनके ताने.
Jyoti Yadav
Updated: May 13, 2017, 6:45 PM IST
मां की शिकायतें कभी खत्म नहीं होतीं. उनके लिए बच्चे हमेशा नालायक ही रहते हैं, जो कभी समय से नहाते नहीं तो कभी समय से बिस्तर से नहीं उठते. चाहे बच्चा पांच साल का हो या फिर तीस साल का, मां को लगता है कि वो हमेशा ही गलतियां करेगा. इन गलतियों को मां को ही सुधारना है. छुटपन में शुरू होते हैं मां के ये ताने और हमारी जवानी तक नहीं जाते. वैसे ही जैसे बचपन में हम होते हैं अपनी मां के लिए नन्‍हा बच्‍चा और जवानी क्‍या, बुढ़ापे तक भी बच्‍चे ही रहते हैं. न मां की मुहब्‍बत कम होती है और न उनके ताने.

और ये ताने भी, अंटार्कटिका से लेकर हिंद महासागर तक सारी मांओं के एक जैसे ही हैं.

तुम बच्चों की जुबान कैंची की तरह चलती है



दुनिया की हर मां अपना फ़ोन पर्स में रखकर भूल जाती हैं. फिर पूरे घर में सबसे ढूंढ़वाती हैं. बाद में मिलता उनके पर्स में ही है. इस बात पर टोक दो तो डांट पड़ेगी. "मुझसे जुबान मत लड़ा, चुपचाप किताब उठाकर पढ़ ले."

ओहो! ये मोबाइल



हमारी मां के हिसाब से हर विघ्‍न की जड़ ये मोबाइल ही होता है. हमें रात को एक बजे पेट दर्द हो गया तो वो भी इस फ़ोन की वजह से. हम साइकिल से गिर गए तो फ़ोन से वजह से. हमें लौकी की सब्जी पसंद नहीं तो वो भी इस फ़ोन की वजह से. माओं का सबसे बड़ा दुश्मन यह मोबाइल फ़ोन ही है.

फैशनेबल बच्‍चों की परेशान अम्‍मा



इसमें बताओ हमारी क्या गलती? जब भी शीशे के सामने खड़े होओ, तभी मां की नज़र पड़ती है. तो उनको लगता है कि हम सारा दिन बाल सवांरने में ही लगे रहते हैं.

अभी नहीं, शादी के बाद



मम्मी मेरी फ्रेंड की बर्थडे पार्टी में जाऊं? मम्मी हेयरकट ले लूं? मम्मी सांस ले लूं?
मम्मी का एक ही जवाब, " शादी के बाद करना."

रोज नहाना जरूरी है



अगर नहाओ नहीं तो हम मम्मी के राजा बेटा से सीधे गधा बेटा हो जाते हैं. तो ऐसा है, अगर मम्मी का फेवरेट रहना है तो रोज़ नहाना जरूरी है.

मम्‍मी जब बच्‍ची थीं



जब मैं तुम्हरी उम्र की थी तो ये करती थी, वो करती थी, सबका कहना मानती थी, चुप रहती थी और उल्टा नहीं बोलती थी. आपकी मम्मी भी ऐसे बोलती हैं?

आलसी बच्‍चे



अच्छा ! आपको बेड पर लेटे-लेटे आलू के परांठे भी चाहिए, फिर पानी का गिलास भी चाहिए. अरे ! कुछ तो शर्म करो.

बंटी! लाइट बंद कर



बैठे हैं इस कमरे में और लाइट जल रही है पूरे घर की. अरे, बाथरूम की लाइट तो बंद कर दे. लगता है बिजली डिपार्टमेंट में इनके समधी बैठे हैं. फ्री में आ रही है बिजली.

जब देखो तब पैसे चाहिए



पैसे के लेन- देन का डिपार्टमेंट मां का होता है. इस मामले में उनसे कोई बहसबाज़ी नहीं. क्योंकि उनको दस साल पहले दिए गए पैसे भी याद होते हैं.

जब तेरे बच्‍चे होंगे तब पता चलेगा तुझे



ये हमारी माओं को हमें सुधारने का सबसे बड़ा तीर होता है. ताकि हम चुपचाप लाइन पर आ जाएं.
First published: May 13, 2017
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