सदा से थे और सदा रहेंगे- मां के ये अनमोल वचन

Jyoti Yadav
Updated: May 13, 2017, 10:37 PM IST
सदा से थे और सदा रहेंगे- मां के ये अनमोल वचन
मां की बात पत्थर की लकीर की तरह होती है.
Jyoti Yadav
Updated: May 13, 2017, 10:37 PM IST
मां की बात पत्थर की लकीर की तरह होती है. उसके आगे दुनिया का कोई तर्क, कोई बहस नहीं चलती. अगर मां को ठंड लग रही है तो चार-पांच ठंड के कपड़े बच्चों को पहनने पड़ेंगे. अगर मां को सर्दी-जुखाम हुआ है तो खिचड़ी बच्चे खाएंगे क्योंकि एक बार जब मां ने कुछ कह दिया तो उसके बाद वो खुद की भी नहीं सुनतीं. मां के अनमोल वचन में सुनिए मां का ज्ञान, जो आप अपने बच्चों को सुनाएंगे :



मां से ज्यादा बच्चों के भले के बारे में इस दुनिया में कोई नहीं सोच सकता. इसलिए मां के कहे पर थोड़ा ध्यान दिया करो. उस दिन मां की बात मानकर मफलर ओढ़ लिया होता तो ठंड नहीं लगती.



टिंडे के बारे में मां कोई तर्क-कुतर्क नहीं सुन सकती. हफ्ते का एक दिन टिंडे की सब्जी के लिए ही है. आप घर छोड़कर जा सकते हैं, लेकिन टिंडे या तोरई की सब्जी पर कोई सवाल नहीं उठेगा.



मांओं को लगता है कि वह बड़ी उदार हैं और हमें आटे-दाल का भाव ससुराल जाकर पता चलेगा क्‍योंकि वहां हमारे कोई नखरे नहीं चलेंगे. इसलिए ये डायलॉग उन्‍हें हरदम रटा रहता है.



सिर-दर्द, खांसी-जुखाम, बुखार सबका एक ही इलाज. मोबाइल फ़ोन से दूर रहना.



भई! मां भी तो समझाते-समझाते परेशान हो जाती हैं. इसलिए आखिर में आकर वो "तू जाने तेरा काम जाने" पर आ जाती हैं.



बेटी- लाज-शर्म? त्याग तपस्या? कुर्बानी?
ये सब क्या होता है मम्मी?
मां - अरे जरा मेरी चप्पल देना तो? कहां है?



अब तुम्हें अपने बॉयफ्रेंड से साथ ट्रिप पर भी भेजें? इतने मॉडर्न नहीं हुए हैं हम. बॉयफ्रेंड बनाने दिया, यही क्या कम है? शर्मा जी की बेटी को देख लो, बॉयफ्रेंड तो छोड़ो लड़के क्या होते हैं, ये तक नहीं मालूम उसे.



देखा? मैं पहले ही कह रही थी, मुझे वो लड़का सही नहीं लगा रहा. पर नहीं. देखा अब लाइन मारने लगा न? मैं तेरी उम्र से निकल चुकी हूं. मैं सब जानती हूं. मेरी बात माना कर.



मेहमान आते ही सीधे चरण स्पर्श करने हैं. दोबारा समझाना न पड़ें. ठीक है राहुल? नमकीन की तरफ आंख उठाकर मत देखियो, वरना मेहमानों के सामने पीटने में मुझे कोई शर्म नहीं है.
First published: May 13, 2017
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