बूढ़े दादा-दादी को चाहिए आपका प्‍यार और वे गाने, जो कॉलेज के दिनों में सुनते थे


Updated: May 20, 2017, 8:01 AM IST
बूढ़े दादा-दादी को चाहिए आपका प्‍यार और वे गाने, जो कॉलेज के दिनों में सुनते थे

Updated: May 20, 2017, 8:01 AM IST
मन और संगीत का बहुत गहरा संबध है. संगीत के तार सीधे हमारे मन के सबसे गहरे कोनों को छूते हैं. इस तरह कि इसमें उम्र की कोई सीमा, कोई बंधन नहीं होता. नवजात शिशु से लेकर 80 वर्ष के बुजुर्ग तक, सबके मन और तंत्रिकाओं पर संगीत का जादुई असर होता है. कह सकते हैं कि संगीत उस थेरेपी की तरह है, जो मन की हर बीमारी को दूर भले न कर पाए तो भी राहत तो पहुंचाता ही है.

वृद्धावस्‍था के एकांत में संगीत एक थैरेपी की तरह काम करता है. बूढ़ी और कमजोर हो रही कोशिकाओं को संगीत नया जीवन दे सकता है. यह मन को सुकून पहुंचाता है और खुशी का एहसास दिलाता है. ऐसे में संगीत आपकी समस्याओं को कम करता है, संगीत तनाव कम करता है, सकारात्मक ऊर्जा पैदा करता है, जिससे आपका मन और दिमाग शांत रहते हैं.

आइए आज हम आपको बताते हैं कि बुजुर्गों के लिए संगीत कैसे एक जादुई थैरेपी हो सकती है.

बढ़ती उम्र और संगीत का साथ.
बढ़ती उम्र और संगीत का साथ.


बढ़ती उम्र में तनाव दूर करता है संगीत
बढ़ती उम्र की सबसे बड़ी समस्या होती है तनाव. अगर आपका ये तनाव कम हो जाए तो आधी से ज्यादा बीमारियों से भी मुक्ति मिल जाती है. संगीत सुनने से सांस सामान्य होती है और बेचैनी जैसी समस्या भी दूर होती है. सांस ठीक चलेगी तो आप अंदर से स्वस्थ रहेंगे और नींद अच्छी आएगी, जिससे तनाव दूर होगा.

बुढ़ापे में अकेलापन दूर करता हैं संगीत.
बुढ़ापे में अकेलापन दूर करता हैं संगीत.


मांसपेशियों के दर्द की दवा है संगीत
जो संगीत आपको पसंद हो और अकेले में बैठकर आप उसे सुनें तो इसका असर आपके नर्वस सिस्टम पर भी पड़ता है. इससे ब्लड प्रेशर, हृदय गति और दिमाग की प्रक्रिया नियंत्रित होती है. संगीत का सीधा असर मस्तिष्क के उस हिस्से पर होता है, जो भाव को नियंत्रित करता है और आपको खुश रखता है. मांसपेशियों के दर्द से पीडि़त लोग अगर रोज संगीत सुनते हैं तो इससे उनका दर्द भी कम हो जाता है.

मांसपेशियों का ख्याल रखता है संगीत.
मांसपेशियों का ख्याल रखता है संगीत.


बढ़ती उम्र में भी नहीं होगी भूलने की बीमारी
बढ़ती उम्र की सबसे बड़ी समस्या होती है- भूलने की बीमारी. अकसर लोग जरूरी चीजें कहीं रख कर भूल जाते हैं, जैसे अपना चश्मा. इससे छुटकारा पाने के लिए लोग भर-भर के बादाम खाना शुरू कर देते हैं और भी न जाने कितने जतन करते हैं. लेकिन हम आपको सिर्फ संगीत सुनने की सलाह देते हैं. उम्र बढ़ने के साथ दिमाग भी कमजोर होने लगता है, जिसकी वजह से याद्दाश्त कमजोर होने लगती है. नियमित संगीत सुनने से याद्दाश्त तेज होती है. संगीत आपके शरीर में डोपामाइन हॉर्मोन का स्राव करता है, जिसका असर सोचने-समझने की क्षमता पर होता है.

संगीत देता है खुशी.
संगीत देता है खुशी.


पुरानी यादों को ताजा करता है संगीत
यादें बुढ़ापे का सहारा होती हैं, जिन्हें हर कोई संभलकर रखना चाहता है. अक्सर लोग अपनी अच्छी यादों को याद करके खुश हो जाते हैं. अपने पुराने समय में खो जाते हैं. लेकिन कुछ लोग बढ़ते तनाव की वजह से शायद ऐसा नहीं कर पाते. लेकिन अगर आप संगीत का सहारा लेते हैं तो कई बार ये आपकी यादों का बंद पिटारा खोल देता है. अपने जमाने का संगीत उन्हें उनके ही जमाने में वापस ले जाता है. जिस गाने से उनकी कई यादें जुड़ी होती हैं, उसे सुनते ही उनकी यादें ताजा हो जाती हैं और लोग अपनी सारी समस्या, दु:ख-दर्द सब भूल जाते हैं.
First published: May 20, 2017
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