रिपोर्टः दिल्ली-एनसीआर में करीब ढाई लाख अनबिके मकान

Updated: May 10, 2016, 8:43 PM IST
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नई दिल्ली। देश के विभिन्न शहरों में बिना बिके आवासीय परिसरों और वाणिज्यिक एस्टेट की संख्या बढ़ती जा रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक बिना बिके मकान और दुकानों की संख्या हाल में 18-40 प्रतिशत बढ़ी है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से है।

रिपोर्ट के अनुसार बिना बिके मकानों का सबसे ज्यादा असर इससे जुड़े वित्तीय सेवा तथा इस्पात क्षेत्र पर पड़ा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंडल एसोचैम द्वारा किए गए इस अध्ययन के मुताबिक मकान एवं दुकानों के दाम तथा ब्याज दर घटने के बावजूद फ्लैट की मांग में 25-30 प्रतिशत की गिरावट आई है जबकि पिछले साल दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वाणिज्यिक क्षेत्र की मांग 35-40 प्रतिशत घटी।

रिपोर्टः दिल्ली-एनसीआर में करीब ढाई लाख अनबिके मकान
आवासीय परिसरों में सबसे ज्यादा बिना बिके मकान दिल्ली-एनसीआर में हैं। उसके बाद मुंबई महानगर का नंबर आता है जहां करीब एक लाख मकान बिना बिके खड़े हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक हालांकि, मुंबई में नवी मुंबई, ठाणे और अन्य उपनगरीय इलाकों में गतिविधियां कुछ बढ़ी हैं। मुंबई में बिना बिके मकानों और दुकानों की दूसरी सबसे अधिक संख्या है इसके बाद बेंगलुरू और चेन्नई में ऐसे बिना बिके आवासीय परिसर हैं।  मुंबई में जहां बिना बिके मकानों की संख्या 27.5 प्रतिशत है, बैंगलुरू में यह 25 प्रतिशत, चेन्नई में 22.5 प्रतिशत, अहमदाबाद में 20 प्रतिशत, पुणे में 19.5 प्रतिशत और हैदराबाद में 18 प्रतिशत रही है।

एसोचैम की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में करीब ढाई लाख मकान बिना बिके हैं। यह संख्या निर्माणाधीन मकानों की कुल संख्या का करीब 35 प्रतिशत है। इन मकानों में नियामकीय मंजूरी और विवाद की वजह से देरी हो रही है। इसमें कहा गया है कि थ्री बीएचके, दो बीएचके और एक बीएचके वाले मकानों के दाम में नोएडा में 35 प्रतिशत तक गिरावट आई है जबकि गुरुग्राम में इसमें 30 प्रतिशत और दिल्ली के कुछ प्रमुख इलाकों में 25 प्रतिशत तक दाम कम हुए हैं। इसके बावजूद अभी भी मांग कमजोर बनी हुई है।

आवासीय परिसरों में सबसे ज्यादा बिना बिके मकान दिल्ली-एनसीआर में हैं। उसके बाद मुंबई महानगर का नंबर आता है जहां करीब एक लाख मकान बिना बिके खड़े हैं। बैंगलुरू में 66 हजार, चेन्नई में 60 हजार और पुणे में 55 हजार इकाइयां हैं। रीयल एस्टेट क्षेत्र में गतिविधियां कमजोर पड़ने से श्रम बाजार पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। निर्माण क्षेत्र में एक करोड़ से लेकर 1.20 करोड़ श्रमिक लगे हैं। बिक्री में गिरावट और नई परियोजनाओं की शुरुआत में धीमापन आने से यह स्पष्ट पता चलता है कि आवासीय क्षेत्र में मूल्य को लेकर प्रतिरोध है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल के मुकाबले इस साल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में नई आवासीय परियोजनाओं की शुरुआत में 30 से 35 प्रतिशत कमी आई है।

First published: May 5, 2016
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