पढ़ें: होम लोन का बैलेंस ट्रांसफर कब करें, कैसे करें?

News18India.com

Updated: July 13, 2016, 4:07 PM IST
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नई दिल्ली। अगर आप अपने सिर से लोन का बोझ कम करना चाहते हैं, बढ़ती ईएमआई से परेशान हैं या आपको कैश की जरूरत है और आपका बैंक आपको होम लोन का टॉपअप देने से इनकार कर रहा है तो समझिए कि आपके लिए अपना होम लोन शिफ्ट कराने का समय आ गया है। होम लोन के प्रीपेमेंट पर पैनल्टी खत्म होने के बाद होम लोन के बैलेंस ट्रांसफर में काफी तेजी आई है। बैलेंस ट्रांसफर के तहत आपके लोन की बची हुई राशि (आउटस्टैंडिंग अमाउंट) दूसरे बैंक के पास चली जाती है। हालांकि होम लोन को रिफाइनेंस कराते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है वर्ना आपकी मुश्किलें कम होने की बजाय बढ़ सकती हैं।

कब कराएं होम लोन का बैलेंस ट्रांसफर:

पढ़ें: होम लोन का बैलेंस ट्रांसफर कब करें, कैसे करें?
अगर आप अपने सिर से लोन का बोझ कम करना चाहते हैं, बढ़ती ईएमआई से परेशान हैं या आपको कैश की जरूरत है और आपका बैंक आपको होम लोन का टॉपअप देने से इनकार कर रहा है तो समझिए कि आपके लिए अपना होम लोन शिफ्ट कराने का समय आ गया है।

अगर आप दो साल तक होम लोन की ईएमआई दे चुके हैं तो आप होम लोन की राशि पर टॉप अप लोन लेने के हकदार बन जाते हैं। मसलन अगर आपको अपनी किसी जरूरत के लिए और पैसे की जरूरत है तो आप पर्सनल लोन लेने की बजाय टॉपअप का ही विकल्प चुनें क्योंकि इसकी ब्याज दर सस्ती और अवधि लंबी होती है जिससे आप पर भारी भरकम ईएमआई का बोझ नहीं पड़ता। कई लोग तो घर खरीदने के बाद कार आदि खरीदने के लिए भी ऑटो लोन की बजाय होम लोन टॉप अप का विकल्प ही आजमाते हैं।

इसके अलावा यदि आपका बैंक ब्याज दरें नहीं घटा रहा है जबकि दूसरे बैंकों से आपको सस्ते ब्याज दर पर लोन ऑफर हो रहा है तो भी आप ईएमआई का बोझ घटाने के लिए होम लोन स्विच का विकल्प आजमा सकते हैं। कई बार आपने अगर लोन 10 साल के लिए लिया हुआ है और आप उसका टैन्योर बढ़ाकर 15 या 20 साल करना चाहते हैं लेकिन बैंक इसके लिए राजी नहीं है तो भी आप लोन स्विच करवा सकते हैं।

कैसे होता है होम लोन ट्रांसफर:

लोन ट्रांसफर में आपका पुराना देनदार नए देनदार को लोन का सारा बचा हुआ अमाउंट स्थानांतरित कर देता है। नया देनदार बैंक आपके कर्ज की बची हुई राशि का भुगतान पुराने देनदार को कर देता है और उसके पास जमा आपकी प्रॉपर्टी के कागज उससे लेकर अपने पास रख लेता है। इसके बाद आपकी देनदारियां नए बैंक के प्रति हो जाती हैं न कि पुराने के प्रति। इसके लिए आप सबसे पहले अलग-अलग बैंकों की होम लोन पर ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और लोन की शर्तों के बारे में पता करें। आप एकसाथ कई बैंकों से इस बारे में बात कर सकते हैं कि यदि आप अपना लोन उनके पास ट्रांसफर कराते हैं तो वो आपको आपके पुराने देनदार के मुकाबले क्या सुविधाएं दे सकते हैं। मसलन क्या आपको कोई अतिरिक्त रकम मिल सकती है जिससे आप अपने दूसरे खर्च निपटा सकें और नकदी की समस्या खत्म कर सकें। लोन ट्रांसफर के लिए पूरी जानकारी लेकर और फायदे-नुकसान का पूरा गणित लगाकर ही आगे कदम बढ़ाएं। एक बार आप किसी बैंक के बारे में निश्चिंत होकर उसे अपना नया देनदाता चुनने का फैसला करते हैं तो आपको उसे सभी जरूरी दस्तावेज देकर आवेदन करना होगा।

कौन-कौन से दस्तावेज लगते हैं लोन ट्रांसफर में:

लोन ट्रांसफर के लिए आपको अपने नए बैंक को पहचान पत्र, निवास का प्रमाण, तीन महीने की सैलरी स्लिप, छह माह का बैंक स्टेटमेंट, पिछले दो साल का फॉर्म-16 और आयकर रिटर्न देना होगा। इसके अलावा पुराने देनदाता बैंक से लोन के बैलेंस का सर्टिफिकेट और उसके पास प्रॉपर्टी के जमा मूल दस्तावेजों की प्रमाणित सूची लेकर नए देनदाता बैंक के पास जमा करानी होती है। अगर आपके सभी दस्तावेज सही हैं तो 15 दिन में लोन ट्रांसफर हो जाता है।

First published: July 13, 2016
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