...आपके लिए कहीं घाटे का सौदा न बन जाए होम लोन का बीमा!

News18India.com
Updated: July 11, 2016, 4:29 PM IST
...आपके लिए कहीं घाटे का सौदा न बन जाए होम लोन का बीमा!
होम लोन के इंश्योरेंस में तो कर्जधारक की मौत होने पर सिर्फ लोन से मुक्ति मिलती है लेकिन अगर 50 लाख का टर्मप्लान ले लिया जाए तो उससे न सिर्फ होम लोन की बची हुई रकम चुकाई जा सकती है बल्कि उसके अलावा भी मोटी रकम कर्जधारक के परिवार के हाथ आ जाती है।
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Updated: July 11, 2016, 4:29 PM IST
नई दिल्ली। अगर आप घर खरीदने की तैयारी कर रहे हैं और उसके लिए आपको होम लोन भी लेना है तो आपको एक बड़ा फैसला करना पड़ सकता है। फैसला इस बात का कि क्या होम लोन के साथ उसका इंश्योरेंस लेना भी सही होगा या नहीं। इस सवाल का जवाब अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग हो सकता है क्योंकि ये सब इंश्योरेंस के प्रीमियम की रकम, होम लोन की रकम और मार्केट में उपलब्ध टर्म प्लान के प्रीमियम की रकम पर निर्भर करता है।

इंश्योरेंस की जरूरत क्यों: होम लोन के रूप में बैंक आपको एक बड़ी रकम देता है। वो ये राशि देते समय ये सुनिश्चित कर लेना चाहता है कि किसी भी सूरत में उसका ये पैसा डूबे नहीं। अब अगर होम लोन लेने के बाद कर्जधारक के साथ किसी तरह की अनहोनी हो जाती है और उसकी जान चली जाती है तो बैंक की वो भारी-भरकम राशि कौन चुकाएगा। ऐसे मौके पर इंश्योरेंस कंपनी बैंक को ये भुगतान करती है। इसीलिए बैंक जो भी होम लोन देते हैं उसका इंश्योरेंस जरूर करवाते हैं, जिसका प्रीमियम लोन लेने वाले से वसूला जाता है। कर्जधारक के लिए भी ये इंश्योरेंस सहूलियत का सौदा है क्योंकि उसके मरने के बाद उसके परिवार को इतनी बड़ी रकम जुटाने और कर्ज चुकाने की जरूरत नहीं रहती। खासकर अगर परिवार में वो अकेला कमाने वाला है तब तो ये कर्ज उसके परिवार पर उसके जाने के बाद एक मुसीबत की तरह टूटेगा।

यही वजह है कि आमतौर पर घर के खरीदार होम लोन लेते वक्त उसका इंश्योरेंस लेने से हिचकते नहीं हैं। हालांकि कुछ एक्सपर्ट ये भी मानते हैं कि यदि होम लोन के इंश्योरेंस का प्रीमियम ज्यादा है तो उसकी जगह टर्म प्लान लेना ज्यादा फायदेमंद रहता है। इसे इस उदाहरण से समझा जा सकता है कि मान लीजिए आप 25 लाख रुपये का होम लोन ले रहे हैं। ऐसे में उसके इंश्योरेंस के लिए एकमुश्त मोटी रकम चुकाना होता है। ये राशि तकरीबन 80-90 हजार रुपये होती है। ये राशि लोन ली गई राशि में ही जुड़ी रहती है जिसपर होमलोन के बराबर ही ब्याज वसूला जाता है। यानी अगर आप ये इंश्योरेंस लेते हैं तो आपके होनलोन की ईएमआई तकरीबन 900 रुपये प्रतिमाह तक बढ़ जाती है।

कुछ एक्सपर्ट मानते हैं कि अगर ये इंश्योरेंस लेने की बजाय 50 लाख रुपये का टर्मप्लान ले लिया जाए तो वो ज्यादा फायदेमंद है। ऐसा इसलिए क्योंकि जितने रुपये महीने के खर्च में 25 लाख के होम लोन का इंश्योरेंस हुआ है, उतने में 50 लाख रुपये का टर्म प्लान मिल जाएगा। होम लोन के इंश्योरेंस में तो कर्जधारक की मौत होने पर सिर्फ लोन से मुक्ति मिलती है लेकिन अगर 50 लाख का टर्मप्लान ले लिया जाए तो उससे न सिर्फ होम लोन की बची हुई रकम चुकाई जा सकती है बल्कि उसके अलावा भी मोटी रकम कर्जधारक के परिवार के हाथ आ जाती है जो उसके लिए संकट की इस स्थिति में बड़ी मदद साबित होती है। इसके अलावा कई कंपनियां आज टर्म प्लान के साथ होम लोन को कवर करने की सुविधा भी देती हैं। ऐसे में होम लोन का इंश्योरेंस कराने की जरूरत ही खत्म हो जाती है। इसलिए अगर आप भी होम लोन ले रहे हैं तो पहले टर्मप्लान सहित उसके दूसरे विकल्पों के बारे में  भी जानकारी जुटा लें और फिर कोई फैसला करें।

 
First published: July 11, 2016
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