कहीं आपको भी तो नहीं लुभा रहे फ्लैट के पजेशन तक No EMI के ऑफर!

News18India.com
Updated: June 17, 2016, 7:54 AM IST
कहीं आपको भी तो नहीं लुभा रहे फ्लैट के पजेशन तक No EMI के ऑफर!
अगर आप किराए के घर में रहते हैं। अपने लिए फ्लैट बुक कराना चाहते हैं लेकिन आपकी सैलरी इतनी नहीं है कि आप किराया और बैंक की ईएमआई दोनों साथ-साथ चुका सकें तो...
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Updated: June 17, 2016, 7:54 AM IST
नई दिल्ली। अगर आप किराए के घर में रहते हैं। अपने लिए फ्लैट बुक कराना चाहते हैं लेकिन आपकी सैलरी इतनी नहीं है कि आप किराया और बैंक की ईएमआई दोनों साथ-साथ चुका सकें तो सबवेंशन स्कीम आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है, बशर्ते कि आप फ्लैट बुक कराने से पहले बिल्डर और उसके प्रोजेक्ट के बारे में अच्छे से तफ्तीश कर लें और पूरी तरह तसल्ली होने के बाद ही इस मामले में आगे बढ़ें।

क्या है सबवेंशन स्कीमः आपने अक्सर अखबारों में और सड़क पर लगे होर्डिंगों में ऐसे विज्ञापन देखे होंगे जिसमें मामूली राशि देकर फ्लैट बुक कराने और उसके पजेशन तक कोई ईएमआई न चुकाने जैसे लुभावने ऑफर दिए जाते हैं। कोई बिल्डर 10 या 15, 20 फीसदी रकम अभी देकर फ्लैट की बाकी कीमत पजेशन के समय चुकाने का ऑफर देता है तो कोई पजेशन तक ईएमआई का भुगतान खुद करने का वादा करता है। ऐसी स्कीमों को ही सबवेंशन स्कीम कहते हैं।

कैसे काम करती है सबवेंशन स्कीमः सबवेंशन स्कीम में बिल्डर, बॉयर और बैंक के बीच त्रिपक्षीय समझौता होता है। इसके तहत बैंक आपके द्वारा बुक कराए गए फ्लैट की 80-90 फीसदी रकम बिल्डर को देता है और उस कर्ज पर बॉयर को फ्लैट का पजेशन मिलने तक ब्याज बिल्डर द्वारा चुकाया जाता है। यानी बॉयर को सिर्फ 10 या 20 फीसदी रकम घर बुक कराते समय बिल्डर को देनी होती है और वो बैंक से लिए गए कर्ज पर ईएमआई का भुगतान पजेशन मिलने के बाद शुरू करता है। यानी अगर आप किराये के घर में रह रहे हैं तो आपको सिर्फ घर का किराया चुकाना है, फ्लैट की ईएमआई की चिंता नहीं करनी है। फ्लैट की ईएमआई तब शुरू होगी जब आपको अपना फ्लैट मिल जाएगा यानी जब आपका किराया देना बंद हो जाएगा।

क्या हैं इस स्कीम के फायदेः इस स्कीम का सबसे बड़ा फायदा तो यही है कि आपको किराया और ईएमआई साथ-साथ नहीं चुकानी होतीं। यानी कम सैलरी में भी आप अपने लिए फ्लैट बुक करा सकते हैं। दूसरा आपकी ईएमआई बिल्डर चुका रहा है। जाहिर सी बात है कि वो जल्द से जल्द इससे छुटकारा पाना चाहेगा। ऐसे में उसे भी प्रोजेक्ट पूरा करने की जल्दी होगी और वो आपको समय पर फ्लैट का पजेशन दे देगा ताकि उसके सिर से ईएमआई का बोझ खत्म हो।

कितनी रकम में बुक हो सकता है घरः सबवेंशन स्कीम के तहत अगर आप फ्लैट बुक कराते हैं और फ्लैट की कीमत 25 लाख रुपये है तो आपको बैंक 90 फीसदी तक होमलोन दे देगा। यानी आपको घर बुक कराते समय महज ढाई लाख रुपये देने होंगे। इसमें सर्विस टैक्स की राशि भी मिला ली जाए तो आपको अपनी जेब से तकरीबन तीन लाख रुपये देने होंगे। अगर घर 25 लाख से अधिक की कीमत का है तो बैंक सिर्फ 80 फीसदी लोन करेगा। यानी 20 फीसदी रकम और सर्विस टैक्स की राशि आपको जेब से चुकानी होगी।

नुकसान भी कम नहीं हैं सबवेंशन केः पहली नजर में तो सबवेंशन स्कीम सोने पर सुहागा जैसी लगती है लेकिन इसके कई नुकसान भी हैं। सबवेंशन स्कीम में चूंकि बिल्डर को ईएमआई देनी होती है इसलिए इस स्कीम में वो फ्लैट महंगे दाम पर बेचता है। यानी आपने अगर 1000 वर्गफुट का फ्लैट बुक कराया है तो सबवेंशन में फ्लैट की कीमत 200-300 रुपये प्रतिवर्गफुट ज्यादा वसूली गई है तो आपको ये फ्लैट दो से तीन लाख रुपये महंगा पड़ेगा।

सिबिल रेटिंग पर संकटः इस स्कीम में ये बात ध्यान रखने योग्य है कि ईएमआई भले ही बिल्डर चुका रहा है लेकिन बैंक ने कर्ज आपको दिया है। ये आपके कागजात पर आपकी गारंटी पर ही कर्ज है। ऐसे में यदि बिल्डर बीच में ईएमआई चुकाना बंद कर देता है या ईएमआई लेट करता है तो उससे आपकी ही सिबिल रेटिंग खराब होगी। बिल्डर अगर बीच में ईएमआई देना बंद कर देता है तो आपको वो ईएमआई चुकानी होगी। कई बार बिल्डर वादा भले ही पजेशन देने तक ईएमआई चुकाने का करे लेकिन कागजों पर अनुबंध दो या तीन साल का ही होता है। यानी ये अवधि बीत जाने के बाद आपको ही बैंक की ईएमआई चुकानी होगी भले ही आपको पजेशन मिले या न मिले। यानी जिस किराया और ईएमआई साथ चुकाने की मुश्किल से आप बच रहे थे, वही आपके गले पड़ जाएगी।

क्या ऐहतियात बरतें: सबसे पहले तो कोशिश करें कि सबवेंशन स्कीम की बजाय सीएलपी यानी कंस्ट्रक्शन लिंक्ड प्लान के तहत फ्लैट बुक कराएं लेकिन अगर सबवेंशन स्कीम लेना मजबूरी है तो सबसे पहले तो बिल्डर का रिकॉर्ड देखें। यानी बिल्डर इतना सक्षम हो कि वो अगले कुछ सालों तक आपकी और बाकी बॉयर्स की ईएमआई चुका सके। इसके बाद उसके प्रोजेक्ट से जुड़ी सारी तफ्तीश करें कि उसे संबंधित विभागों, अथॉरिटी से आवश्यक मंजूरी मिली हुई हैं अथवा नहीं। इसके बाद जब बिल्डर के साथ एग्रीमेंट हो तो उसमें साफ-साफ लिखवाएं कि कितने साल तक वो ईएमआई चुकाएगा क्योंकि आमतौर पर एक मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट का प्रोजेक्ट तकरीबन चार साल में पूरा होता है।
First published: June 17, 2016
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