सुपरटेक से बोली सुप्रीम कोर्ट, आप डूबें या मरें, ग्राहकों का पैसा फौरन लौटाएं

एहतेशाम खान | News18India

Updated: September 6, 2016, 6:34 PM IST
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के सुपरटेक बिल्डर्स को खरीददारों का पैसा न लौटाने पर कड़ी फटकार लगाते हुए चार हफ्तों में सारा ब्योरा कोर्ट में जमा करने का आदेश दिया है। ये मामला नोएडा के एमाराल्ड कोर्ट अपार्टमेंट का है। यहां पहले से ही दो टावरों पर कोर्ट की तलवार लटक रही है।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें नहीं पता कि ये (बिल्डर) डूब रहे हैं या मर रहे हैं। ग्राहकों का पैसा तो लौटाना ही होगा।

सुपरटेक से बोली सुप्रीम कोर्ट, आप डूबें या मरें, ग्राहकों का पैसा फौरन लौटाएं
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के सुपरटेक बिल्डर्स को खरीदारों का पैसा न लौटाने पर कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि हमें नहीं पता कि कि आप डूब रहे या मर रहे हैं, ग्राहकों का पैसा तो लौटाना ही होगा।

एमाराल्ड कोर्ट के 17 फलैट खरीददारों का कहना है कि सुपरटेक ने वादा किया था कि उन्हें फ्लैट का आवंटन रद्द किए जाने पर मूल धन का दस फीसदी पैसा हर महीने लौटाया जाएगा। ये रकम ग्राहकों को 15 जनवरी 2015 से मिलना था। अब खरीददारों का आरोप है कि वो पैसा उन्हें वक्त पर नहीं दिया जा रहा है जबकि सुपरटेक का कहना है कि वो ग्राहकों को हर महीने पैसा वापस कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुपरटेक को आदेश दिया है कि अगर उन्होंने पैसा नहीं दिया है तो चार हफ्तों में वापस करें, और अब तक वापस किए गए पैसे का पूरा ब्यौरा कोर्ट में जमा करें।

गौरतलब है कि 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एमाराल्ड कोर्ट अपार्टमेंट के दो टावरों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। ये टावर तयशुदा नक्शे के खिलाफ गैरकानूनी ढंग से बनाए गए थे। इन दो टावरों के 17 खरीददार अपना पैसा वापस चाहते हैं। जबकि कुछ खरीददार उसके बदले में अलग फलैट की मांग कर रहे हैं।

ये मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अधीन है जहां कोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सरकारी संस्था एन.बी.सी.सी से रिपोर्ट मांगी है कि एमाराल्ड कोर्ट में टावर कानून का पालन कर बने हैं या नहीं। एन.बी.सी.सी को मंगलवार को ये रिपोर्ट कोर्ट को सौंपनी थी। लेकिन उसने इस काम के लिए चार हफ्तों का समय और मांग लिया है।

First published: September 6, 2016
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