फ्लैट बुक कराकर फंस न जाएं आप, इन बातों का रखें ध्यान

News18India.com

Updated: July 21, 2016, 4:27 PM IST
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नई दिल्ली। हर किसी का सपना होता है कि उसका अपना एक घर हो। होम लोन की सुविधा का लाभ उठाकर बड़ी संख्या में लोग निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में अपना फ्लैट बुक करा रहे हैं लेकिन कई बार लुभावने विज्ञापनों में फंसकर, जल्दबाजी या बिल्डर पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेने के चलते घर की चाहत एक बुरे सपने में तब्दील हो जाती है और बॉयर्स के हिस्से में आता है भारी भरकम होम लोन, भागदौड़, परेशानी और बेबसी। इसलिए अच्छा यही है कि घर बुक कराने और बिल्डर को पैसा थमाने से पहले अपने प्रोजेक्ट और फ्लैट के बारे में अच्छे से तफ्तीश कर लें ताकि बाद में आपको पछताना न पड़े।

-जब भी घर बुक कराएं तो सबसे पहले ये पता कर लें कि जिस जमीन पर आपका प्रोजेक्ट तैयार हो रहा है या तैयार होने वाला है वो किसके नाम है। अगर जमीन का मालिकाना हक किसी और का है और उसपर प्रोजेक्ट कोई दूसरा बिल्डर बना रहा है तो कई बैंक ऐसे प्रोजेक्ट में फ्लैट को फाइनेंस नहीं करते।

फ्लैट बुक कराकर फंस न जाएं आप, इन बातों का रखें ध्यान
अच्छा यही है कि घर बुक कराने और बिल्डर को पैसा थमाने से पहले अपने प्रोजेक्ट और फ्लैट के बारे में अच्छे से तफ्तीश कर लें ताकि बाद में आपको पछताना न पड़े।

-जिस प्रोजेक्ट में आपने फ्लैट बुक कराया है वो संबंधित अथॉरिटी से अप्रूव है या नहीं। कई बार प्रोजेक्ट में केवल कुछ टॉवर अप्रूव होते हैं जबकि बाकी टॉवरों के लिए बिल्डर बाद में अप्रूवल मांगता है। ऐसे टॉवरों में अगर आपका फ्लैट है तो आपके लिए ये जोखिमभरा हो सकता है। इसलिए पता कर लें कि सिर्फ प्रोजेक्ट ही नहीं बल्कि आपका फ्लैट जिस टॉवर या फ्लोर पर है वो भी अप्रूव है अथवा नहीं।

-अगर आप बैंक से होमलोन लेकर फ्लैट बुक करा रहे हैं तो आपके लिए रिस्क थोड़ा कम होता है क्योंकि बैंक प्रोजेक्ट के बारे में अच्छी तरह से जांच-पड़ताल करने के बाद ही उसपर लोन देता है। कई बार बिल्डर फाइनेंस कंपनियों से सांठगांठ कर खुद ही फाइनेंस करवाने का ऑफर देता है। ऐसे ऑफर स्वीकार करने में सावधानी बरतें। अगर किसी प्रोजेक्ट में महज कुछ ही बैंक या फाइनेंस कंपनियां फाइनेंस कर रही है तो समझ जाएं को प्रोजेक्ट के साथ कुछ समस्या है।

-कई बार लोग बिल्डर द्वारा दिए गए विज्ञापन या ब्रॉशर देखकर ही प्रोजेक्ट पर लट्टू हो जाते हैं। ऐसा करना परेशानी में डाल सकता है। इसलिए फ्लैट बुक कराने से पहले अपने प्रोजेक्ट का अप्रूव्ड लेआउट देखें ताकि आपको सही-सही अंदाजा हो सके कि आपके प्रोजेक्ट में आपको क्या-क्या और कितनी सुविधाएं मिलने वाली हैं। कहीं ऐसा न हो कि ब्रॉशर में आपकी बिल्डिंग के सामने बड़ा मैदान हो और जब आपको फ्लैट मिले तो उस मैदान में बिल्डर ने कोई टॉवर खड़ा कर दिया हो।

-कारपेट एरिया, बिल्डअप एरिया और सुपर एरिया को लेकर अक्सर लोग भ्रम में आ जाते हैं और बाद में खुद को ठगा महसूस करते हैं। इस अंतर को अच्छी तरह समझकर ही फ्लैट के बारे में कोई फैसला करें। कारपेट एरिया घर के अंदर इस्तेमाल लायक जगह होता है जबकि बिल्डअप एरिया में कारपेट एरिया और घर की दीवारें, पिलर व बालकनी की जगह भी शामिल होती हैं। सुपर एरिया में बिल्डअप एरिया के साथ-साथ वो एरिया में शामिल होता है जिसमें प्रोजेक्ट के अंदर कॉमन इस्तेमाल की जगह भी शामिल रहती हैं जैसे पार्क, पूल, क्लब, जिम आदि।

First published: July 21, 2016
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