...तो इसलिए औरंगजेब ने बुनकरों की कटवा दी थी अंगुली

Hemant Nagle | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: July 18, 2017, 12:00 PM IST
...तो इसलिए औरंगजेब ने बुनकरों की कटवा दी थी अंगुली
हर राज्य की साड़ियों की लगाई गई है प्रदर्शनी.
Hemant Nagle | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: July 18, 2017, 12:00 PM IST
मध्य प्रदेश के इंदौर में इन दिनों साड़ियों की एग्ज़ीबिशन लगाई गई है. यहां परंपारिक साड़ियों को फोकस किया गया है.चाहे वो इतिहास की मछली जामदानी साड़ी हो या मसलिन सिल्क.हर साड़ी को इस एग्जिबिशन में सजाया गया है. यहां पाटन पटोला, मुकेश वर्क जैसी हर राज्य की साड़ियों की प्रदर्शनी लगाई गई है.

कुछ देशों ने भारत की इन परंपरागत बनने वाली साड़ियों को इतना पंसद किया है कि इन्हें अपने देशों में मशीनों से बनवाना शुरू किया है. नायाब साड़ियों की एग्ज़ीबिशन देशभर में लगा रहीं श्यामला रामानन फिलहाल इंदौर में हैं. श्यामला ने साड़ियों के इतिहास के बारे में काफी जानकारी दी है.

एग्ज़ीबिटर रामानन ने मसलिन जामदानी साड़ियों का जिक्र करते हुए बताया कि औरंगजेब की बेटी जेबुन्निसा एक दिन जामदानी साड़ी पहनकर महल के ऊपरी हिस्से पर टहल रही थीं.तभी औरंगजेब का वहां से गुजरना हुआ.औरंगजेब ने देखा कि महल के बीचाे-बीच बने तालब में जेबुन्निसा की परछाईं दिखाई दे रही है. परछाईं देख औरंगजेब को लगा कि बेटी ने कोई वस्त्र जैसे पहने ही ना हो. वे तत्काल जेबुन्निसा के पास पहुंचे तो देखा कि उन्होंने एक बहुत ही खूबसूरत साड़ी पहन रखी है.

औरंगजेब को वह साड़ी और कारीगरी इतना लुभा गया कि उन्होंने साड़ी बुनने वाले बुनकरों को बुलाकर उनकी अंगुली काटवा दी, जिससे ,फिर से कहीं ऐसी कारीगरी नहीं हो सके.

एग्जिबिशन के स्टॉफ का कहना है कि अब धीरे-धीरे चाइना और दूसरे देश में भी इन साड़ियों को लाया जा रहा है. हाथ से बनी इन साड़ियों की संस्कृति एक इतिहास बन गई है, जिससे लोगों को बताने के लिए ही इस एग्जिबिशन का मकसद है.
First published: July 18, 2017
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