पीएम ने कहा परिजनों के लिए टिकट न मांगे, भाजपाई बोले- 'भाई-भतीजा होना गुनाह नहीं'

Agencies

First published: January 11, 2017, 9:10 AM IST | Updated: January 11, 2017, 9:50 AM IST
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पीएम ने कहा परिजनों के लिए टिकट न मांगे, भाजपाई बोले- 'भाई-भतीजा होना गुनाह नहीं'
Photo : PTI

भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही अपने नेताओं से चुनाव में भाई-भतीजों के लिए टिकट न मांगने की हिदायत दी हो, मगर भाजपा की मध्यप्रदेश की इकाई को लगता है कि भाई-भतीजा होना गुनाह नहीं है.

भाजपा की मध्यप्रदेश इकाई की कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक मंगलवार को बुंदेलखंड के सागर में शुरू हुई. कार्यसमिति के उद्घाटन सत्र और राजनीतिक प्रस्ताव का ब्यौरा देते हुए प्रदेश महामंत्री अजयप्रताप सिंह ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि बैठक में बताया गया कि सर्जिकल स्ट्राइक और विमुद्रीकरण के फलस्वरूप देश की जनता ने प्रसन्नता व्यक्त की है, इसको लेकर प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों ने केंद्र सरकार के प्रति आभार प्रदर्शन किया.

सिंह ने बताया कि बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता पूर्ण सोच के लिए उन्हें बधाई दी. आजादी के बाद विमुद्रीकरण के रूप में ऐतिहासिक आर्थिक सुधार हुआ है।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कार्यसमिति की गत दिनों हुई बैठक में लिए गए निर्णयों के अमल पर बल दिया गया और प्रदेश में आंचलिक क्षेत्रों के विकास की रूपरेखा पर विचार किया गया.

सिंह ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक शुचिता और वित्तीय पारदर्शिता के संबंध में जो सुझाव दिए हैं, उन पर प्रदेश में अक्षरश: अमल पर चर्चा हुई और सर्व सहमति बनी.

पार्टी संगठन में भाई भतीजावाद पर पूछे गए एक सवाल के उत्तर में उन्होंने कहा, "पार्टी में टिकट देने का निर्णय कार्यकर्ता की क्षमता, सक्रियता, लोकप्रियता और कर्मठता के आधार पर किया जाता है. भाई-भतीजा होना गुनाह नहीं है. जहां तक सांसद ज्ञान सिंह के पुत्र का सवाल है, वे जिला संगठन में महामंत्री हैं, वे सामान्य कार्यकर्ता होते हुए उनकी अलग पहचान है."

ज्ञात हो कि शहडोल से निर्वाचित सांसद ज्ञान सिंह के स्थान पर रिक्त हुए विधानसभा क्षेत्र से उनके बेटे को टिकट देने की चर्चा है.

कटनी के पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी के तबादले को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रशासन में कहीं कोई हस्तक्षेप नहीं है. वह एक प्रशासकीय एवं नियमित प्रक्रिया है. उन्हें कटनी जैसे छोटे जिले के बजाय चुनौतीपूर्ण बड़े जिला छिंदवाड़ा का प्रभार दिया गया है. इसमें कहीं राजनीति नहीं देखी जाना चाहिए.

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