नए गृहमंत्री को सीधी चुनौती तो नहीं पुणे धमाके?

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First published: August 2, 2012, 2:27 AM IST | Updated: August 2, 2012, 2:27 AM IST
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नए गृहमंत्री को सीधी चुनौती तो नहीं पुणे धमाके?
पहला धमाका- शाम 7.05 बजे, बालगंधर्व ऑडिटोरियम। दूसरा धमाका- शाम 7.09, मैकडॉनल्ड के सामने डस्टबिन में। तीसरा धमाका- शाम 7.13, देना बैंक। चौथा धमाका- शाम 7.22 बजे, फूड कलेक्शन ज्वाइंट के पास।

नई दिल्ली। देश के नए गृह मंत्री को पदभार संभाले अभी 12 घंटे भी नहीं बीते थे कि उन्हीं के गृह राज्य में एक के बाद एक चार धमाके होने की खबर आ गई। पुणे में हुए सिलसिलेवार धमाकों को केंद्र सरकार ने अभी तक आतंकी हमला या धमाका नहीं कहा है। हालांकि इंटेलिजेंस ब्यूरो ने इसे आतंकी वारदात बताया है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर किस मकसद से इस हमले को अंजाम दिया गया? बड़ी बात यह है कि एक के बाद एक चार धमाके में घायल सिर्फ एक ही शख्स हुआ।

पहला धमाका- शाम 7.05 बजे, बालगंधर्व ऑडिटोरियम। दूसरा धमाका- शाम 7.09, मैकडॉनल्ड के सामने डस्टबिन में। तीसरा धमाका- शाम 7.13, देना बैंक। चौथा धमाका- शाम 7.22 बजे, फूड कलेक्शन ज्वाइंट के पास। गृहमंत्री का राज्य महाराष्ट्र बुधवार शाम अचानक सीरियल धमाकों से दहल गया। मालूम हो कि गृहमंत्री को पुणे एक कार्यक्रम में शिरकत करने भी जाना था लेकिन एन मौके पर उन्हें इसे स्थगित करना पड़ा। इसे देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं यह धमाके नए गृहमंत्री को एक सीधी चुनौती तो नहीं?

आखिर क्या वजह रही जो गृहमंत्री के पदभार संभालने के दिन उनके ही गृहराज्य में एक के बाद एक धमाके हुए? और तो और इसे इस तरह से अंजाम दिया गया जिससे बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान न होने पाए। जानकार मानते हैं कि हल्की तीव्रता के यह धमाके अपनी मौजूदगी का एहसास कराने के लिए किए गए। क्या यह आतंक के खिलाफ हमारी लडा़ई को करारा तमाचा नहीं? रणनीति बचाव की नहीं प्रहार की होनी चाहिए, यदि यह एक आंतकी हमला है तो देश को इसका जवाब देना होगा।

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