पढ़ें: वैज्ञानिकों ने कैसे सुलझाई गॉड पार्टिकल की पहेली!

News18India
Updated: July 4, 2012, 5:02 PM IST
पढ़ें: वैज्ञानिकों ने कैसे सुलझाई गॉड पार्टिकल की पहेली!
गॉड पार्टिकल यानि ईश्वरीय कण की तलाश आसान नहीं थी। आखिर पचास साल पुरानी पहेली सुलझी कैसे? क्या आप जानते हैं 27 किलोमीटर लंबी मशीनी सुरंग में प्रयोग से कितनी ऊर्जा पैदा हुई-एक लाख सूरज जितनी ऊर्जा।
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Updated: July 4, 2012, 5:02 PM IST
नई दिल्ली। गॉड पार्टिकल यानि ईश्वरीय कण की तलाश आसान नहीं थी। आखिर पचास साल पुरानी पहेली सुलझी कैसे? क्या आप जानते हैं 27 किलोमीटर लंबी मशीनी सुरंग में प्रयोग से कितनी ऊर्जा पैदा हुई-एक लाख सूरज जितनी ऊर्जा। इंसानी दिमाग ने न केवल ये अपार ऊर्जा संभाली बल्कि उसे सही दिशा देकर इस ईश्वरीय कण को प्रकट होने पर मजबूर कर दिया।

क्या ईश्वर को तलाशा जा सकता है? क्या इंसान किसी दिन ईश्वर बनने की फिराक में है। अगर इंसान ने खुद को रचने वाले को ही खोज लिया तब तो वो खुद ही सर्वशक्तिमान बन जाएगा।ऐसे लाखों सवाल लाखों लोगों के जेहन को मथ रहे हैं। गॉड पार्टिकल मिलने की खबर जंगल की आग की तरह फैली।

वैज्ञानिक इसे बरसों से जानते हैं-आम इंसान शायद हाल-फिलहाल ही जान पाया।1993 में नोबल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक लीडरमैन ने मजाकिया लहजे में उस कण को गॉड पार्टिकल कह दिया जिसकी मौजूदगी फिजिक्स की किताबों में 1964 से ही थी। एक सेकेंड के खरबवें हिस्से के लिए ये कण सामने आया- और इंसान को मिल गया सृष्टि का ब्लिडिंग ब्लॉक यानि वो ईंट जिससे ब्रह्मांड रूपी घर बना है। वैज्ञानिक इस कण की मौजूदगी को लेकर अब 99.99995 फीसदी आश्वस्त हैं।

एक के बाद एक अरबों प्रोटोन्स को एक दूसरे से टकराया गया। उससे ऊर्जा पैदा हुई। ये टक्कर ऐसी थी जैसे 10 किलोमीटर दूर से दो सुईयों को एक दूसरे से सीधे टकराने के लिए छोड़ा गया हो। 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से जब ये प्रोटोन टकराए तो टूट कर बिखर गए और उनके मलबे को सुरंग में लगी मशीनों ने पकड़ा और परखा। इसी में प्रभु कण के दर्शन हुए, लेकिन एक सेकंड के खरबवें हिस्से के लिए ही ये कण नजर आए। इनका मास यानि द्रव्यमान यानि भार एक प्रोटोन के भार से सौ गुना ज्यादा पाया गया। यही भार ये कण उन अणुओं को दे देता है जो भी उसके संपर्क में आते हैं। और यहीं से निर्माण-सृजन-जीवन का जन्म होता है। अणु आपस में जुड़ते हैं इसी ठौर इसी भार इसी मास की वजह से, वर्ना वो बिखर जाते और सृष्टि में कुछ भी न रह पाता, कोई शेफ-कोई आकार न बन पाता।

इस महाप्रयोग के लिए दो ग्रुप बनाए गए थे एलिस और एटलस। दोनों गुप्त तौर पर प्रयोग करते रहे। बताया गया है कि प्रोटोन्स और आयंस की टक्कर के दौरान बेइंतहा ऊर्जा पैदा हुई। अविश्वसनीय ऊर्जा से भरे और घने सब-एटॉमिक फायरबॉल यानी आग के गोले पैदा हुए। कंप्यूटर की गणना में इनका तापमान 10 खरब सेल्सियस था, जो कि सूरज के केंद्र में मौजूद तापमान से एक लाख गुना ज्यादा है। यानि एक लाख सूरज की गर्मी के बराबर गर्मी इन टक्करों ने पैदा की। हालांकि, ये एक सेकंड के खरबवें हिस्से में ही उड़नछू हो गई। लेकिन गॉड पार्टिकल या ईश्वरीय कण के दर्शन दे गई।

जो गॉर्ड पार्टिकल मिला है-वो कैसा है, क्या उसे सृष्टि का बुनियादी इंजीनियर कहा जा सकता है। क्या इंसान ने ये इंजीनियर अब कुदरत के हाथों से छीन लिया है, क्या इसके गलत इस्तेमाल का भी डर है।

First published: July 4, 2012
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