पहाड़ों में फटा बादल, 26 लोगों की गई जान, हालात बेकाबू

News18India

Updated: August 4, 2012, 2:02 PM IST
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हरिद्वार। बादल फटने के बाद आई तेज बारिश ने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में जमकर तबाही मचाई है। सबसे बुरे हालात उत्तरकाशी और चमोली जिले के है, जहां हजारों लोग बेघर हो गए हैं। कई गांवों में पानी घुस गया है। जानकारी के मुताबिक अब तक 26 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि करीब 100 लोग लापता हैं। बारिश के बाद आई बाढ़ और भूस्खलन ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सेना और आईटीबीपी के जवानों ने राहत की कमान संभाल ली है। वहीं किसी अनहोनी से बचने के लिए सरकार ने सूबे के सभी पावर प्रोजेक्ट बंद कर दिए हैं, जिससे कई इलाकों में बिजली और पानी की भारी किल्लत हो गई है। नैनीताल और हरिद्वार में भी पहाड़ों से आ रहे पानी ने बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है।

दरअसल पहाड़ों पर बरपा है कुदरत का कहर, एक साथ तीन तीन जगहों पर बादलों ने मचाई है तबाही। बादल फटने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में जमकर बारिश हुई है, जिसके चलते कई इलाकों में बाढ़ आ गई है। शुक्रवार देर रात जब उत्तरकाशी के लोग गहरी नींद में थे, तभी तेज आवाज के साथ बादल फटा और इसके बाद तो मानो सैलाब आ गया। उत्तरकाशी के स्वर्णघाट और संगम चट्टी में आई तबाही ने दर्जनों लोगों की जान ले ली। सड़कें, मकान, गाड़ियां और यहां तक कि टनों वजनी लोहे के पुल तक बह गए। तेज रफ्तार से आते हाहाकारी पानी की राह में जो आया, वो पलक झपकते बर्बाद हो गया।

पहाड़ों में फटा बादल, 26 लोगों की गई जान, हालात बेकाबू
बादल फटने के बाद आई तेज बारिश ने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में जमकर तबाही मचाई है। सबसे बुरे हालात उत्तरकाशी और चमोली जिले के है, जहां हजारों लोग बेघर हो गए हैं।

उत्तरकाशी की तबाही अभी थमी भी नहीं थी कि चमोली में भी बादलों की तबाही शुरू हो गई। लगातार होती बारिश और बाढ़ ने चमोली में 5 किलोमीटर के दायरे में सड़क को मिट्टी में मिला दिया। नदियों में पानी खतरे के निशान से ऊपर चला गया है। भागीरथी और दूसरी नदियों का जल स्तर बढ़ने से गंगा और यमुना किनारे बसे गांव में एलर्ट जारी कर दिया गया है। मदद के लिए सेना और आईटीबीपी के जवानों की मदद ली जा रही है।

उत्तरकाशी और चमोली में तबाही का तांडव मचाने के बाद बारिश और बाढ़ का पानी आगे बढ़ रहा है। कई इलाकों में भूस्खलन और चट्टान गिरने के चलते रास्ते बंद हो गए हैं। जिसकी बजह से पीड़ित लोगों तक मदद नहीं पहुंच पा रही है। स्थानीय लोगों के साथ साथ पर्यटक भी अचानक आई आफत के शिकार हुए हैं। कई जगह सड़क धंसने के बाद चार धाम और गंगोत्री यात्रा रोक दी गई है, हालात इतने खराब है कि खुद मुख्यमंत्री लोगों से कह रहे हैं कि वो सरकारी मदद का इंतजार न करे।

नैनीताल में कोशी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने किनारे बसे गांवों में अलर्ट जारी कर दिया है। हरिद्वार में गंगा भी खतरे के निशान के ऊपर बह रही है। जानकारों का कहना है कि पहाड़ों से तेजी से नीचे आता पानी हरिद्वार से आगे यूपी में गंगा किनारे बसे गांवों में तबाही मचा सकता है।

लगातार हो रही बारिश के चलते नदियों और बांधों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इससे उत्तराखंड में हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट पर भी खतरा बढ़ गया है। ये देखते हुए सरकार ने फिलहाल सूबे के सभी 15 पावर प्रोजेक्ट बंद कर दिए हैं। राज्य के बड़े हिस्से में बिजली और पीने के पानी की किल्लत शुरू हो गई है। वहीं मौसम विभाग के मुताबिक खतरा अभी टला नहीं है, क्योंकि अगले 48 घंटे कुमाऊं में भारी बारिश की आशंका जताई है। उत्तरकाशी और चमोली की तबाही के देखते हुए कुमाऊं में अभी से प्रशासन अलर्ट पर है।

बादलों ने हिमाचल प्रदेश के मनाली में भी भारी तबाही मचाई है। शुक्रवार रात मनाली के पाल्चन इलाके में बादल फटने के बाद आई भारी बारिश ने पूरी मनाली को अपनी चपेट में ले लिया है। बाढ़ का पानी कई गांवों में घुस गया है। आलम ये है कि मनाली के ज्यादातर हिस्से राज्य से कट गए हैं। जानकारी के मुताबिक भारी बारिश और बाढ़ के चलते हजारों लोग बेघर हो गए हैं, जबकि रोहतांग दर्रे के पास बन रहा पुल पूरी तरह बह गया है। पुल की साइट पर मौजूद एक शख्स अपनी गाड़ी के साथ ही पानी की धार में बह गया, बाद में उसकी मौत हो गई। पाल्चन में भी कई छोटे पुल पानी की तूफानी रफ्तार में बह गए हैं। मनाली रोहतांग और कुल्लू मनाली रोड को भी भारी नुकसान हुआ है।

बारिश और बाढ़ से मनाली के स्थानीय लोगों के साथ-साथ सैलानी भी मुश्किल में फंस गए हैं। कई सैलानी बीच रास्ते में फंसे हुए हैं जिनतक मदद पहुंचाई जा रही है। फिलहाल रास्तों को हल्की गाड़ियों के लिए खोल दिया गया है और लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने को कहा गया है।

फिलहाल राहत और बचाव का काम जारी है। प्रशासन का कहना है कि काफी हद तक हालात काबू में आ गए हैं और अगर दोबारा बारिश नहीं हुई तो 2-3 दिन में हालात सामान्य हो जाएंगे।

First published: August 4, 2012
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