बाबा रामदेव का नाम तक नहीं सुनना चाहते उनके गुरु

वार्ता

Updated: August 16, 2012, 9:24 AM IST
facebook Twitter google skype whatsapp

बिजनौर। विदेशी बैंको में जमा काले धन की वापसी को लेकर आन्दोलन चला रहे योग गुरु रामदेव को नेत्र ज्योति प्रदान करने और आयुर्वेदिक और योग की शिक्षा देने वाले गुरु चैतन्य आनंद उर्फ बंगाली अब अपने शिष्य से इस हद तक खिन्न हैं कि वह उनकी सूरत देखना तो दूर नाम तक सुनना पसंद नहीं करते।

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिला मुख्यालय से तेरह किलोमीटर दूर ऐतिहासिक विदुर कुटी के पास एक छोटे से आश्रम में अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर जी रहे बंगाली बाबा को दुख के साथ गुस्सा भी है कि रामदेव ने उनकी दी गई शिक्षा का दुरुपयोग किया है और उसे धन कमाने का धंधा बना लिया है।

बाबा रामदेव का नाम तक नहीं सुनना चाहते उनके गुरु
आज बंगाली बाबा रामदेव से इतना खिन्न हैं कि उन्होंने यहां तक कह दिया कि रामदेव का नाम उनके आश्रम से न जोड़ा जाए।

उम्र के अंतिम पडाव में चारपाई से लग चुके बंगाली बाबा आज भी अपने सीमित साधनों के तहत लोगों की निस्वार्थ सेवा और इलाज करते हैं। वह रामदेव से किसी प्रकार का सहयोग भी लेना नहीं चाहते।

लगभग दो दशक पूर्व रामदेव नाम का एक सामान्य आदमी नेत्रों की ज्योति खो जाने पर बंगाली बाबा की शरण में आया था। बाबा के आश्रम और आर्शीवाद से रामदेव को न केवल नेत्र ज्योति मिली थी बल्कि योग शिक्षा और एक हजार पृष्ठों का एक आयुर्वेदिक ग्रन्थ भी मिला था जिससे रामदेव आज पतंजलि औषधालय चला रहे हैं।

बंगाली बाबा की शिक्षा और कृपा से आज रामदेव विश्व प्रसिद्ध हैं। अपने गुरु को याद नहीं करने पर बंगाली बाबा ने सिर्फ इतना कहा कि कई साल पहले आया था। आज बंगाली बाबा रामदेव से इतना खिन्न हैं कि उन्होंने यहां तक कह दिया कि रामदेव का नाम उनके आश्रम से न जोड़ा जाए।

उल्लेखनीय है कि लगभग तीन साल पूर्व जब बाबा रामदेव बिजनौर आए थे तब वह बंगाली बाबा के आश्रम गए थे और पैर छूकर आर्शीवाद भी लिया था। बाबा के आश्रम प्रबंधक भोजराज ने बताया कि बंगाली बाबा रामदेव के राजनैतिक स्टंट से खफा रहते हैं भले ही वह कालेधन के खिलाफ लड़ रहे हों।

First published: August 16, 2012
facebook Twitter google skype whatsapp