एजुकेशन लोन देने से मना किया तो खैर नहीं: चिदंबरम

आईएएनएस
Updated: August 18, 2012, 3:31 PM IST
एजुकेशन लोन देने से मना किया तो खैर नहीं: चिदंबरम
एक अगस्त को वित्त मंत्री बनाए जाने के बाद चिदम्बरम की सरकारी बैंक प्रमुखों से यह पहली मुलाकात थी।
आईएएनएस
Updated: August 18, 2012, 3:31 PM IST
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने शनिवार को कहा कि शिक्षा ऋण हासिल करना हर विद्यार्थी का अधिकार है और ऐसे ऋण आवेदनों को अधिक संख्या में खारिज करने वाले सरकारी बैंकों के अधिकारियों को दंडित किया जा सकता है।
सरकारी बैंकों के प्रमुखों से मुलाकात के बाद चिदम्बरम ने संवाददाताओं से कहा कि बैंक खाता हर व्यक्ति का अधिकार है और यह बैंकों से मिला उपहार नहीं है। साथ ही बैंक से ऋण हासिल करना हर विद्यार्थी का अधिकार है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ऋण उनका पसंदीदा मुद्दा है।

उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी का आवेदन सभी जरूरी शर्तों को पूरी करता है, तो इसे स्वीकार करने वाले अधिकारी द्वारा एक भी ऐसा आवेदन खारिज नहीं किया जाना चाहिए। एक अगस्त को वित्त मंत्री बनाए जाने के बाद चिदम्बरम की सरकारी बैंक प्रमुखों से यह पहली मुलाकात थी।

चिदम्बरम के मुताबिक नई नीति के तहत यदि किसी शाखा में शिक्षा ऋण खारिज करने की अधिक तादाद का पता चलेगा, तो ऐसे शाखा प्रबंधकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। चिदम्बरम ने कहा कि आवेदन खारिज किए जाने के एक दो मामलों को नजरंदाज किया जा सकता है, लेकिन यदि इसकी संख्या एक स्तर जैसे पांच या 10 से अधिक होगी तो प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

सरकारी बैंक शिक्षा ऋण से सम्बंधित बजटीय घोषणा से जुड़े नियम तय करने में लगे हुए हैं। वे शिक्षा संस्थानों, पाठ्यक्रमों और ऋण चाहने वाले विद्यार्थियों की रेटिंग के मानक भी तय कर रहे हैं।

First published: August 18, 2012
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