पतंजलि योगपीठ का चैरिटेबल ट्रस्ट का दर्जा खत्म होगा!

News18India

Updated: August 28, 2012, 1:58 AM IST
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नई दिल्ली। बाबा रामदेव दान के नाम पर कारोबार कर रहे हैं, ये कहना है देश के आयकर विभाग का। आयकर विभाग का कहना है कि योग गुरु का पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट कारोबार कर रहा है। एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक आयकर विभाग योग गुरु बाबा रामदेव के ट्रस्ट का चैरिटेबल संगठन के तौर पर रजिस्ट्रेशन रद्द करने की तैयारी में है। इसके अलावा विभाग ट्रस्ट को दिए जाने वाली सभी छूट भी वापस लेने की तैयारी में है।

काला धन वापस लाने की मुहिम की अगुवाई करने वाले योग गुरु रामदेव पर अब आयकर विभाग का शिकंजा कसने लगा है। आयकर विभाग के मुताबिक बाबा रामदेव का ट्रस्ट पतंजलि योगपीठ कमर्शियल गतिविधियों में शामिल है। साथ ही ट्रस्ट कमाई करने में जुटा है। इनकम टैक्स विभाग ने पतंजलि योग पीठ का रजिस्ट्रेशन रद्द करने से पहले सौ सवालों की लिस्ट भेजी है।

इनकम टैक्स विभाग की एक ईकाई को जांच करने पर पता चला है कि बाबा रामदेव का ट्रस्ट पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट 2009-10 के दौरान कई व्यवसायिक गतिविधियों में शामिल था। पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट चैरिटी के नाम छूट लेने के साथ ही कमाई का जरिया बना हुआ था। आयकर एक्ट के सेक्शन 12 (ए) के तहत पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट को अब तक छूट मिलती रही है।

बाबा रामदेव के सहयोगी वेद प्रताप वैदिक ने इस जांच पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। वैदिक ने सवाल किया है कि पिछले 20 सालों में ट्रस्ट से टैक्स क्यों नहीं वसूला गया? आयकर विभाग की जांच में जो अहम बातें सामने आई हैं।उसके मुताबिक बाबा के ट्रस्ट ने आयकर नियमों का उल्लंघन किया है, ये उल्लंघन कई मामलों में हुआ है।

सूत्रों के मुताबिक वनप्रस्थ आश्रम योजना के तहत पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट ने साढ़े पांच लाख रुपये से लेकर 21 लाख रुपये के बीच कॉटेज बेचे, जिसके तहत उसे 88.73 लाख की आय हुई। दान के रूप में ट्रस्ट को गुड़गांव में बेशकीमती जमीन मिली, जिसकी कीमत का पता लगाया जा रहा है। अपनी सहयोगी संस्था दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट से दान के रूप में पंतजलि योगपीठ को 38.35 करोड़ रुपये मिले हैं। साल 2009-10 के दौरान मेंबरशिप फीस के रूप में ट्रस्ट को 17.75 करोड़ मिले, जिसकी छानबीन जारी है।

योगा कैंप में शामिल होने वाले लोगों से ट्रस्ट ने करीब 15.41 करोड़ रुपये कमाए, हैसियत के हिसाब से योगा कैंप में शामिल होने वाले लोगों ने कूपन खरीदा, जिसकी कीमत 1100 से लेकर 2100 थी। गुमनाम दान के रूप में बाबा के ट्रस्ट को करीब 13.69 करोड़ रुपये मिले, जबकि ट्रस्ट का कहना है कि उसे सिर्फ एक करोड़ सात लाख रुपये ही गुमनाम दान में मिले। बिहार बाढ़ के दौरान भी फंड के इस्तेमाल में कई गड़बड़ियां सामने आईं हैं।

बाबा का ट्रस्ट आयकर विभाग को दी गई जानकारी में यह कहता आया है कि उसकी कमाई शून्य है। आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट के खातों और ब्योरे की जांच करने पर पता चला है कि करीब 72 करोड़ की कमाई की जानकारी सामने आई है, जिस पर आयकर बनता है। आयकर छूट उसी ट्रस्ट को मिलती है जो अपनी आय का 85 फीसदी हिस्सा चैरिटेबल कामों पर खर्च करता है।

वहीं, बाबा रामदेव के सहयोगी वेद प्रताप वैदिक का कहना है कि सरकार बाबा रामदेव के खिलाफ बदले की कार्रवाई कर रही है। उनका दावा है कि टैक्स की लड़ाई में बाबा सरकार को कोर्ट में चित कर देंगे।

दूसरी तरफ बाबा के हाल के आंदोलन को समर्थन देने वाली बीजेपी रामदेव के समर्थन में खुलकर सामने आ गई है। बीजेपी का कहना है कि सरकार घोटालेबाजों पर कार्रवाई करने के बजाए भ्रष्टाचार को मिटाने में जुटे लोगों पर शिकंजा कस रही है।

First published: August 28, 2012
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