SC का मीडिया के लिए गाइडलाइंस से इनकार लेकिन...!

News18India

Updated: September 11, 2012, 4:14 PM IST
facebook Twitter google skype whatsapp

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट रिपोर्टिंग के लिए दिशानिर्देश बनाने से इंकार कर दिया है। सर्वेच्च न्यायालय ने कहा है कि अगर किसी को लगता है कि मीडिया में दिखाई जाने वाली खबर से उसके केस पर कोई असर पड़ सकता है, तो वो हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। कुछ कानूनी जानकार इसे फैसले को मीडिया की आज़ादी का हनन बता रहे हैं।

चाहे नोएडा का आरुषि-हेमराज हत्याकांड हो या फिर दिल्ली का गीतिका मर्डर केस। दोनों ही मामले में आरोपियों की दलील है कि मीडिया ने खबर दिखाकर उनके खिलाफ माहौल बनाया। ऐसे कई मामलों के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट रिपोर्टिंग पर दिशानिर्देश बनाने पर सभी पक्षों से राय मांगी। पांच जजों की पीठ ने 17 दिनों तक चली सुनवाई के बाद मंगलवार को अपना फैसला सुनाया।

SC का मीडिया के लिए गाइडलाइंस से इनकार लेकिन...!
अगर किसी को लगता है कि मीडिया में दिखाई जाने वाली खबर से उसके केस पर कोई असर पड़ सकता है, तो वो हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक सभी खबरों के लिए कोई एक गाइडलाइन नहीं बनाई जा सकती। अगर किसी पक्ष को किसी खबर से आपत्ति हो तो वो हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सकता है। याचिका के आधार पर कोर्ट चाहे तो खबरों को कुछ दिनों तक ना दिखाने का आदेश दे सकता है। लेकिन ये आदेश सिर्फ कुछ दिनों के लिए होगा और खबर में क्या लिखा जाए, इस पर कोर्ट की कोई राय नहीं होगी।

कोर्ट ने कहा कि इससे आरोपियों के आधिकार और मीडिया की आजादी को संतुलित किया जा सकेगा। कोर्ट ने हिदायत देते हुए कहा कि पत्रकारों को अपनी लक्ष्मण रेखा समझनी चाहिए। अगर वो अपनी लक्ष्मण रेखा को पार करेंगे तो इससे कोर्ट की अवमानना हो सकती है। अभिव्यक्ति की आज़ादी, परम आधिकार नहीं है।

पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जेएस वर्मा का मानना है कि इस फैसले से मीडिया को सबक लेने की ज़रुरत है। वहीं, कुछ कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मीडिया में दिखाई जाने वाली खबरों पर असर पड़ सकता है।

अगर किसी आरोपी को लगता है कि मीडिया की वजह से उसके केस पर असर पड़ रहा है तो वो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करेगा। जब तक हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट उसकी याचिका पर फैसला नहीं करता तब तक निचली अदालत में मुकदमे की कार्यवाही रुक सकती है। इस तरह हर बड़े मामले को लंबा खींचा जा सकता है। कोर्ट किसी भी मामले में मीडिया को आदेश जारी कर सकता है।

First published: September 11, 2012
facebook Twitter google skype whatsapp