CAG ऑडिटिंग बताएगी अजित पवार का प्रोजेक्ट कनेक्शन!

News18India
Updated: September 25, 2012, 5:05 AM IST
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मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। 25 हजार करोड़ की बांध परियोजनाओं को मंजूर देने की खबर IBN7 पर चलाए जाने के बाद अब सीएजी ने मामले में ऑडिट करना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र का सिंचाई मंत्रालय लंबे समय से सीएजी की नजर में था। ऑडिट के पीछे मुख्य मकसद उपमुख्यमंत्री अजित पवार की तरफ से महज 3 महीने में 32 परियोजनाओं को दी गई मंजूरी है। इस मामले में सीएजी की टीम कल दिन भर मंत्रालय में थी।

विदर्भ इलाके में प्रस्तावित 25 हजार 834 करोड़ की बांध परियोजनाओं की 32 फाइलें महज 3 महीने में पास कर दीं गई। एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और देश के कृषि मंत्री शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने 2009 में जून से अगस्त के बीच ये तेजी दिखाई थी। अजित पवार तब महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री थे। सवाल उठा कि आमतौर पर सुस्ती के लिए पहचानी जाने वाली सरकारी मशीनरी ने ये स्पीड कैसे पकड़ी? सवाल में छिपा संदेह अदालत के दरवाजे तक घोटाले की शक्ल में पहुंच गया। बाम्बे हाईकोर्ट के नागपुर पीठ में इस बाबत याचिका दाखिल हो चुकी है।

अजित पवार पर उंगली इसलिए भी उठी क्योंकि परियोजनाओं को मंजूरी देने में नियमों को ताक पर रख दिया गया। नियम के अनुसार परियोजनाओं की स्वीकृति मंत्री से नहीं, विदर्भ सिंचाई विकास महामंडल से मंजूरी मिलनी चाहिए थी। महाराष्ट्र में सिंचाई परियोजनाओं पर खर्च राज्यपाल की मंजूरी से किया जाता है। लेकिन अजीत पवार ने इन परियोजनाओं को अपने स्तर पर मंजूरी दे दी।

2009 में विधानसभा चुनाव की आचारसंहिता लागू होने से पहले परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। मंजूरी के लिए केवल अजीत पवार और विदर्भ सिंचाई विकास महामंडल के कार्यकारी निदेशक देवेंद्र शिर्के के दस्तखत हैं। परियोजनाओं का प्रस्ताव गवर्निंग काउंसिल के सामने भी नहीं पेश किया गया और परियोजनाओं के लिए जो ठेके दिए गए, उस पर सिंचाई विभाग के सचिव के भी हस्ताक्षर नहीं हैं।

वैसे, सिर्फ विपक्ष ने सरकार की मुसीबत नहीं बढ़ा रखी है। सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर विजय पांढरे ने भी इस मामले में भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगाए हैं।

जाहिर है, अजित पवार की मुसीबत बढ़ गई है। ऐसे में एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार खुद भतीजे अजीत पवार का बचाव करने सामने आ गए। शरद पवार ने कहा है कि परियोजनाओं को मंजूरी विधानपरिषद में विपक्ष के तत्कालीन नेता नितिन गडकरी की मांग पर दी गई।

महाराष्ट्र के सिंचाई विभाग का जिम्मा कई सालों तक अजीत पवार के पास रहा। सिंचाई विंभाग के काम करने के तरीके पर मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण पहले ही नाराजगी जता चुके हैं। यहां तक कि उन्होंने सिंचाई विभाग पर श्वेतपत्र लाने की बात भी कही है।
First published: September 25, 2012
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