पढ़ें: किस तरह हुआ घोटाला, कैसे जेल पहुंच गए चौटाला

News18India
Updated: January 16, 2013, 12:08 PM IST
News18India
Updated: January 16, 2013, 12:08 PM IST
नई दिल्ली। सत्ता में रहते हुए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने शायद इस दिन की कभी कल्पना नहीं की होगी। बुधवार को एक एक शब्द उनपर और उनके बेटे पर गंभीर चोट कर रहे थे। इन शब्दों ने ऐसा जाल बुना की उन्हें जेल की हवा खानी पड़ रही है। 13 साल तक चला ये केस। 1999-2000 में हरियाणा में चौटाला का राज था। उनकी मर्जी के खिलाफ पत्ता भी नहीं हिलता था। लेकिन उन्होंने जो किया वो तीन हजार लोगों के भविष्य के साथ खिलवाड़ था।

इस घोटाले के खुलासा तब हुआ जब हरियाणा में उस वक्त के प्राइमरी शिक्षा निदेशक आईएएस संजीव कुमार एक अपील लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। उन्होंने अपील की कि चौटाला उनपर शिक्षकों की भर्ती में लिस्ट बदलने का दबाव डाल रहे हैं। राज्य के 18 जिलों में तीन हजार 32 शिक्षकों की भर्ती में फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। हांलाकि शुरु में खुद को व्हिसल ब्लोअर बताने वाले संजीव भी अब इस मामले में दोषी हैं।

बहरहाल सुप्रीम कोर्ट में फर्जी लिस्ट की कहानी खुल गई। और मई 2004 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। हरियाणा में कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि ये एक सबक है चौटाला जैसे लोगों के लिए के किसी के भविष्य से खिलवाड़ का मतलब क्या होता है मैं भी उनमे से एक था जिसने जब्त में अप्लाई किया था आज भी ऐसे हजारों लोग है जो इस घोटाले का अंजाम भुगत रहे हैं।

सीबीआई ने मई 2004 में इस मामले में एफआईआर दर्ज की। 24 जगहों पर छापे मारे गए। दस्तावेज बरामद किए गए। और चार सालों के गहन पड़ताल के बाद सीपीआई ने दिल्ली की पटिय़ाला हाउस कोर्ट की स्पेशल सीबीआई अदालत में जून 2008 में चार्जशीट दाखिल की। इसमें कुल 62 लोगों को आरोपी बनाया गया। ट्रायल के दौरान इसमें से छह लोगों की मौत हो गई। अपनी चार्जशीट में सीबीआई ने ये साफ किया कि उनकी जांच में इसकी पुष्टि हुई है कि राज्य में कुल 3032 टीचरों को नियुक्ति फर्जी तरीके से की गई है। उनकी नियुक्ति के लिए फर्जी लिस्ट तैयार की गई। सीबीआई ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार निरोधक एक्ट और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला दर्ज किया। आखिरकार सीबीआई की मेहनत रंग लाई और इस मामले में सभी 55 लोग दोषी पाए गए।

बहरहाल, खादी पर एक और दाग लगा है। नेताओं के भ्रष्टाचार के सैकड़ों मामले अदालत में पड़े धूल खा रहे हैं। लेकिन जिस तरह से कानून के फंदे में देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल के बेटे और खुद हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके ओमप्रकाश चौटाला और उनके बेटे फंसे हैं उससे नई उम्मीद बंधी है। कानून और व्यवस्था को अपनी जेब में समझने वाले बाकी नेताओं का भी ऐसा हश्र हो सकता है। कुर्सी पर बैठकर भ्रष्टाचार की मलाई खाने वाले बाकी नेता भी ऐसे ही जेल की हवा खा सकते हैं।


First published: January 16, 2013
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर