मंदी से उबर रही है इकॉनमी, घटेगी महंगाई- बढ़ेगी जीडीपी

News18India
Updated: February 27, 2013, 7:22 AM IST
मंदी से उबर रही है इकॉनमी, घटेगी महंगाई- बढ़ेगी जीडीपी
देश के वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने आम बजट से ठीक एक दिन पहले आज देश का इकोनॉमिक सर्वे लोकसभा में पेश किया। सर्वे में वर्तमान वित्तीय साल में आम बजट कैसा होगा, इसकी झलक देखने को मिली।
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Updated: February 27, 2013, 7:22 AM IST
नई दिल्ली। देश के वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने आम बजट से ठीक एक दिन पहले आज देश का इकोनॉमिक सर्वे लोकसभा में पेश किया। सर्वे में वर्तमान वित्तीय साल में आम बजट कैसा होगा, इसकी झलक देखने को मिली। मुख्य आर्थिक सलाहकार रघुराम राजन की अगुवाई में अर्थशास्त्रियों की एक टीम की तैयार सर्वे रिपोर्ट में घरेलू और वैश्विक कारकों के प्रभाव को दूर करने और आर्थिक सुधारों में तेजी लाने की वकालत की गई है।

आर्थिक सर्वे के मुताबिक अगले साल सरकार को अर्थव्यवस्था में मजबूती लौटने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2014 में जीडीपी दर 6.1-6.7 फीसदी रहने का अनुमान है। वहीं वित्त वर्ष 2013 में जीडीपी ग्रोथ 5 फीसदी रह सकती है।
मार्च महीने में महंगाई दर घटकर 6.2-6.6 फीसदी रहने का अनुमान है। महंगाई दर में गिरावट के चलते ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश होगी। वैश्विक कीमतों में गिरावट और आरबीआई के कदमों के चलते महंगाई दर में गिरावट देखने को मिली है। हालांकि आने वाले दिनों में अमीर देशों में ब्याज दरों में कटौती से महंगाई बढ़ सकती है।
देश में आर्थिक मंदी खत्म होने के करीब है और अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत हैं। मंदी से मुकाबले के लिए आर्थिक सुधार तेज करने की जरूरत है। हालांकि वित्तीय और व्यापार घाटे का बढ़ना चिंता का विषय है। लिहाजा वैश्विक स्थिति को देखते हुए डीजल और एलपीजी के दाम बढ़ाना जरूरी होगा।

डीजल के दाम बढ़ने से महंगाई में बढ़ोतरी होने की आशंका है। लेकिन निर्यात में जल्द सुधार आने की संभावना कम है। व्यापार घाटा कम करने के लिए सोने का आयात घटाने की जरूरत है। वहीं फूड सिक्योरिटी बिल से सब्सिडी बढ़ने का खतरा है। सब्सिडी खर्च को काबू में लाने पर जोर दिया जाएगा।
वित्त वर्ष 2013 में टैक्स वसूली बजटीय लक्ष्य से काफी कम रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2014 में आईआईपी ग्रोथ में सुधार की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2013 में सर्विस सेक्टर की ग्रोथ 6.6 फीसदी रह सकती है। वित्त वर्ष 2014 में वित्तीय घाटा 4.8 फीसदी और व्यापार घाटा 4.6 फीसदी रह सकता है। वित्त वर्ष 2013 में वित्तीय घाटे में 0.2 फीसदी की कमी आने की उम्मीद है।
उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश बढ़ाना बड़ी चुनौती बन गया है। निवेश की कमी के कारण औद्योगिक रफ्तार कमजोर हो गई है। वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था में दबाव देखने को मिल रहा है।
फाइनेंशियल सेक्टर पर छोटी अवधि और लंबी अवधि के कारकों के चलते दबाव देखने को मिल रहा है। जोखिम से बचने के लिए निवेशक शेयर बाजार में पैसे लगाने से बच रहे हैं। जीडीपी ग्रोथ बढ़ने से बैंकों के एनपीए कम होंगे।

आर्थिक समीक्षा देश की अर्थव्यवस्था का आधिकारिक आंकलन है। इसे वित्तमंत्री द्वारा आम बजट से पहले संसद के पटल पर रखा जाता है। इसमें सरकार को विभिन्न आर्थिक समस्याओं से निपटने के उपाय सुझाए गए होते हैं और इन उपायों पर सख्त फैसला सरकार पर छोड़ दिया जाता है।
First published: February 27, 2013
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