कुलभूषण के बाद 54 परिवारों को भी बंधी पाक से अपनों की रिहाई की उम्मीद

नासिर हुसैन | News18India.com
Updated: May 19, 2017, 7:37 AM IST
कुलभूषण के बाद 54 परिवारों को भी बंधी पाक से अपनों की रिहाई की उम्मीद
उन 54 परिवारों में भी एक बार फिर से उम्मीद जाग गई है जिनके अपने सरहद के उस पार पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं.
नासिर हुसैन | News18India.com
Updated: May 19, 2017, 7:37 AM IST
कुलभूषण जाधव पर इंटरनेशनल कोर्ट का फैसला आते ही देश में खुशी है. इसी के साथ देश के उन 54 परिवारों में भी एक बार फिर से उम्मीद जग गई है जिनके अपने सरहद पार पाकिस्तान की जेलों में हैं.

ये वो लोग हैं जिन्हें पाक ने 1971 में युद्ध के दौरान बंदी बनाया था. तब से उनकी रिहाई की कोशिशें चल रही हैं. दूसरी बात ये है कि पाक अब ये मानने से भी इंकार करता है कि उसके यहां भारत का कोई युद्धबंदी भी है.

हालांकि युद्धबंदियों के परिजन समय-समय पर अपनों के वहां होने के सबूत देते रहते हैं. ऐसे ही एक युद्धबंदी फ्लाइट लेफ्टीनेंट मनोहर पुरोहित के बेटे विपुल पुरोहित बताते हैं कि पाक जेल में 17 आर्मी अफसर, 12 सिपाही,  24 एयर फोर्स अफसर और एक नेवी अफसर बंद हैं.



एक युद्धबंदी के परिवार में पाकिस्तान से आए एक खत को भी सबूत के तौर पर रखा जा चुका है. लेकिन पाक किसी भी सबूत को मानने से इंकार करता रहा है. लेकिन अब कुलभूषण जाधव पर आए फैसले के बाद हमे उम्मीद जागी है.

2007 में पाक की जेल देखने गए युद्धबंदियों के परिजन.


हम केन्द्र सरकार से मांग करते है कि वो कुलभूषण जाधव की तरह से हमारे परिजनों को रिहा कराने का मामला भी इंटरनेशनल कोर्ट में उठाए. विपुल बताते हैं कि सभी युद्धबंदियों को वापस लाने के लिए हम सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ रहे हैं.

एक युद्धबंदी का पाकिस्तान से आया खत जो उसके परिजनों को मिला.


वहीं पाक की जेल में बंद 15 पंजाब रेजीमेंट के मेजर एसपीएस बराइच की बेटी डा. सिम्मी कहती हैं कि अब ये ही वो वक्त है जब एक बार फिर जोरदार तरीके से 1971 के 54 युद्धबंदियों की रिहाई का मामला उठाया जा सकता है.
First published: May 19, 2017
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