मौत से पांच साल पहले ही अनिल दवे ने जाहिर की थी अपनी 4 अंतिम इच्छाएं

News18Hindi
Updated: May 18, 2017, 6:34 PM IST
मौत से पांच साल पहले ही अनिल दवे ने जाहिर की थी अपनी 4 अंतिम इच्छाएं
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Updated: May 18, 2017, 6:34 PM IST
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे का गुरुवार सुबह निधन हो गया. दवे की पहचान एक राजनेता से अधिक नदियों और पर्यावरण के संरक्षक के रूप में रही है. दवे के देहांत के बाद उनकी एक वसीयत सामने आई है, जिसे उन्होंने पांच साल पहले, यानी साल 2012 में ही तैयार कर लिया था. खास बात ये है कि इस वसीयत में दवे कि किसी संपत्ति का उल्लेख नहीं है. इसमें दवे ने अपनी चार अंतिम इच्छाएं लिखी हैं.

अनिल दवे की अंतिम इच्छाएं :

  • संभव हो तो मेरा दाह संस्कार बांद्राभान में नदी महोत्सव वाले स्थान पर किया जाए


  • उत्तर क्रिया के रूप में केवल वैदिक कर्म ही हों, किसी भी प्रकार का दिखावा न किया जाए

  • मेरी स्मृति में कोई भी स्मारक, प्रतियोगिता, पुरस्कार, प्रशिक्षण इत्यादि का आयोजन न किया जाए

  • जो मेरी स्मृति में कुछ करना चाहते हैं, वे कृपया वृक्ष लगाने और उनकी रक्षा करने का कार्य करेंगे तो मुझे आनंद होगा. वैसे भी नदी-जलाशयों के संरक्षण में अपनी सामर्थ्य अनुसार अधिकतम सहयोग भी प्रदान किए जा सकते हैं, ऐसा करते हुए भी मेरे नाम के प्रयोग से बचेंगे.


अनिल दवे की ये अंतिम इच्छाएं पर्यावरण के प्रति उनके प्रेम और उनकी सादगी को दर्शाती हैं. आज के जमाने में जब नेता जीते-जी अपनी प्रतिमाओं का उद्धाटन करते हैं, ऐसे में दवे की अंतिम इच्छाएं लोगों का दिल जीत रही हैं. 23 जुलाई 2012 को लिखी गई अपनी इस वसीयत के अंत में अनिल दवे ने लिखा है, 'कृपया मेरी भाषा और लेखन दोष के लिए क्षमा करें.'

मूल रूप से उज्जैन जिले के बड़नगर के रहने वाले अनिल दवे का जन्म 6 जुलाई 1956 को हुआ था. दवे और उनके परिवार का आरएसएस से करीबी नाता रहा. वो कॉलेज के दिनों से ही राजनीति में सक्रिय हो गए थे. दवे एक कुशल संगठक और रणनीतिकार भी माने गए. मध्यप्रदेश में भाजपा ने पिछले तीन विधानसभा चुनावों के प्रबंधन की कमान दवे के हाथ में दी. तीनों ही चुनावों में भाजपा को जीत मिली.
First published: May 18, 2017
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