हजारों करोड़ के फंसे कर्ज से निपटेेंगे ये 'बैड बैंक'

News18.com
Updated: April 21, 2017, 8:41 AM IST
हजारों करोड़ के फंसे कर्ज से निपटेेंगे ये 'बैड बैंक'
सरकार 'बैड लोन' से जूझ रहे बैंकों के लिए नई नीति लाने जा रही है. नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स की समस्या को सुलझाने के लिए लाई जाने वाली नीति का टारगेट वो 40 से 50 एनपीए होंगे जो 4 से 5 सेक्टरों में फैले हुए हैं.
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Updated: April 21, 2017, 8:41 AM IST
भारतीय बैंकों के लिए खुशख़बरी. अब सरकार 'बैड लोन' से जूझ रहे बैंकों के लिए नई नीति लाने जा रही है. नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) की समस्या को सुलझाने के लिए लाई जाने वाली नीति का टारगेट वो 40 से 50 एनपीए होंगे जो 4 से 5 सेक्टरों में फैले हुए हैं.

आरबीआई की ओवरसाइट केमिटी को ख़ास अधिकार दिए जाएंगे जिससे एनपीए समस्या का समाधान हो सके. फिलहाल ओवरसाइट केमिटी के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है.

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जानकारों का मानना है कि एनपीए को सुलझाना सरकार के लिए एकमात्र सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दा है. जबतक इस मुद्दे को ना सुलझाया जाए, निवेश नहीं सुधरेगा.

नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स ऐसे कर्ज़ हैं जिसका इंटरेस्ट या मूल रकम लेनदार बैंक को नहीं लौटा पा रहा है. दिसंबर 2016 तक पब्लिक सेक्टर बैंकों के पास करीब 3.8 लाख करोड़ नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स थे. इनमें से 70 फीसदी बड़े औद्योगिक घरानों के हैं.

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न्यूज 18 को मिली जानकारी के मुताबिक आर्थिक सलाह देने वाली इकाई इस बात के पक्ष में नहीं है कि एनपीए को सुलझाने के लिए 'बैड बैंक' की नीति अपनायी जाए.

'बैड बैंक' एक ऐसा प्रस्ताव था जिसके तहत एक ऐसी संस्था हो जो बैंकों से 'बैड लोन' को खरीद सके जिससे बैंकों को उनसे मुक्ति मिल जाए.

इसके तहत एनपीए को डिस्काउंट रेट में खरीदने का प्रावधान रखा गया था. मिसाल के तौर पर अगर एक बैंक के पास एक हज़ार करोड़ रुपये का एनपीए है, तो वो उसे 'बैड बैंक' को 500 से 600 करोड़ रुपये नकद में बेच देगा.

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इसके बाद 'बैड बैंक' जितना संभव हो सके उतना लोन का रकम वसूलने की कोशिश करता. इस पूरी प्रक्रिया में बैंकों को कुछ पैसों का घाटा सहना पड़ता जिसे बैंकिंग की दुनिया में 'हेयरकट' कहा जाता है, लेकिन वो इस ऋण से मुक्त हो जाता.

नई नीति के तहत अब आरबीआई की ओवरसाइट केमिटी सुझाव देगी कि इस फॉमूला के तहत बैंक कितने हेयरकट के लिए जा सकता है.

इस नई नीति का एक और ख़ास बिंदू होगा कि जो कंपनी कर्ज़ का भुगतान नहीं कर पाएगी उसे अपने ही सेक्टर के किसी लाभदायक कंपनी के साथ विलय कर दिया जाए.

उम्मीद है कि वित्त मंत्रालय और रिज़र्व बैंक जल्द ही इस पॉलिसी को लेकर एक सर्क्युलर जारी कर सकती है.

(तुषार धारा)
First published: April 21, 2017
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