इन जवानों के नाम से कांपते हैं दुश्मन, अब दिखेंगे कॉमिक्स में

अमित पांडेय
Updated: March 21, 2017, 3:23 PM IST
इन जवानों के नाम से कांपते हैं दुश्मन, अब दिखेंगे कॉमिक्स में
हमारी और आपकी जिंदगी से लगभग गायब हो चुकी कॉमिक्स अब एक नए अंदाज में हमारे और आपके बीच आ गई है. ये कॉमिक्स आधारित होगी सच्ची घटनाओं पर और इसमें होंगे रियल लाइफ हीरोज यानि वीर सिपाही जिन्होंने हमारे देश को बचाया दुश्मनों से.
अमित पांडेय
Updated: March 21, 2017, 3:23 PM IST
आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी के फुर्सत के कुछ पल में हम और आप टीवी, मोबाइल, आईपैड, म्यूजिक या फिर कुछ इसी तरीके के जरिए का सहारा लेते हैं. और इन्हीं मॉर्डन गैजैट्स के बीच अगर कॉमिक्स आ जाए तो लगेगा कि ये आउटडेटेड चीज कहां से आ गई.

हमारी और आपकी जिंदगी से लगभग गायब हो चुकी कॉमिक्स अब एक नए अंदाज में हमारे और आपके बीच आ गई है. ये कॉमिक्स आधारित होगी सच्ची घटनाओं पर और इसमें होंगे रियल लाइफ हीरोज यानि वीर सिपाही जिन्होंने हमारे देश को बचाया दुश्मनों से. इसे बनाया है हमारे देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा फोर्स सीआरपीएफ यानि सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स ने.

जांबाज डीआईजी इलेंगो (पहली कॉमिक्स)
6 अप्रैल 2010 छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में अचानक सैकड़ों नक्सली सीआरपीएफ की एक टुकड़ी पर हमला करते हैं, जिसमें 76 जवानों की मौत हो गई थी. इस घटना ने सीआरपीएफ को बुरी तरह से झकझोर कर रख दिया था. जवानों के हौसले पस्त थे और हर जगह शंका का माहौल था. इस हमले के ठीक बाद सीआरपीएफ ने इस इलाके में डीआईजी एस इलंगो की तैनाती की.

तमिलनाडु के रहनेवाले इस जांबाज अधिकारी ने पहले दो साल में इस इलाके को अच्छी तरीके से समझा, फिर माओवादियों पर कहर बनकर टूटे. 23 फरवरी 2013 को करीब 48 घंटे तक चले माओवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में इलंगो और उनकी टीम ने दो शीर्ष माओवादी कमांडरों को मौत के घाट उतारा.

इतना ही नहीं इलंगो की टीम का ऑपरेशन इतना जबरदस्त था कि पहली बार माओवादी जंगल में अपने साथियों की लाश छोड़कर भागने को मजबूर हुए और यहीं से माओवादी के हौसले पस्त होने शुरू हुआ. इसके लिए उन्हें पुलिस वीरता पदक भी मिला.

जांबाज इलंगो के लिए ये ऐसा पहला ऑपरेशन नहीं था. इससे पहले इन्होंने 1989-1992 के दौरान पंजाब में आतंकवादियों के खिलाफ लोहा लिया था, जिसके लिए उन्हें दो बार पुलिस वीरता पदक मिल चुका है.

हमेशा ऑपरेशन की जगह पर मौजूद रहना, माहौल के हिसाब से अपने आपको ढालना, पुख्ता प्लान तैयार करना, लोकल इंटेलिजेंस पर पकड़ और अपने टीम की हौसलाफजाई डीआईजी इलंगो की खासियत है. वे कहते हैं कि कॉमिक्स से आगे बढ़कर ये तो एक-दो घटना है. अगर सैनिक अपनी घटनाओं का जिक्र करे तो कई वॉल्यूम में किताबों की सिरीज तैयार हो जाएगी.

डिप्टी कमांडेंट अंजनी (दूसरी कॉमिक्स)
जरा जानिए क्यों अंजनी पर फोर्स ने बनाई कॉमिक्स. महज आठ साल की अपनी सर्विस में उन्हें दो बार वीरता के लिए पुलिस मेडल अवॉर्ड मिला. पहला अवॉर्ड 2 अक्टूबर 2012 के ऑपरेशन के लिए जब छत्तीसगढ़ में इनकी टीम ने छह माओवादियों को मार गिराया था. दूसरा अवॉर्ड छत्तीसगढ़ में ही 14 फरवरी 2014 के ऑपरेशन के लिए जब अंजनी और उनके साथी राजदीप, अनन्त की टीम ने पांच माओवादियों को मार गिराया था.

अंजनी कहते हैं कि 2010 का सीआरपीएफ के साथियों का बलिदान हमेशा उनकी आखों के सामने घूमता रहेगा और ये तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक इस इलाके से नक्सलियों का सफाया नहीं हो जाएगा. जोश, उत्साह और टीम वर्क अंजनी की सबसे बड़ी ताकत.

रियल लाइफ कॉमिक्स हीरो हैं उदय दिव्यांशु
2009 में नक्सलियों से लोहा लेने के लिए जब सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन बन रही थी जब उन्होंने खुद इस एलीट फोर्स में शामिल होने के लिए अपना नाम दिया और महज पांच साल में अपने कारनामों के लिए उन्हें दो पुलिस मेडल मिले.

पहला मेडल 2010 में बंगाल में लालगढ़ के एंटी नक्सल ऑपरेशन में जहां आठ माओवादी मारे गए थे और दूसरा 2013 में बंगाल में ही ऑपरेशन के लिए जब छह नक्सली मारे गए थे.

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ऑपरेशन के दौरान हाई टेक तकनीक का इस्तेमाल, तुरंत रिएक्शन और लगातार नई रणनीति के तहत हमला करना दिव्यांशु की खासियत है. दिव्यांशु कहते हैं कि हम खुशकिस्मत हैं कि हमें देश की सेवा करने का मौका मिला और जरूरी से युवा पीढ़ी प्रभावित होगी.

अदम्य साहस का जिक्र
इसी तरीके की नौ कॉमिक्स सीआरपीएफ ने बनाई है. कुछ कॉमिक्स में एक जांबाज का जिक्र है तो कुछ में एतिहासिक टीम वर्क का जिक्र है. जब सीआरपीएफ के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया था.

आखिरकार ऐसी कॉमिक्स को बनाने के पीछे सीआरपीएफ की मंशा क्या है? कैसे ये आइडिया आया? सीआरपीएफ के पास और क्या खास बात है ऐसी कॉमिक्सों में? सीआरपीएफ ने कुल नौ कॉमिक्स इस तरीके की बनाई है. योगज्ञान सिंह (डीआईजी, सीआरपीएफ) जो कि इस प्रोजेक्ट से जुड़े हैं वो कहते हैं कि हर कॉमिक्स में अपना एक संदेश है.

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सीआरपीएफ की ये नौ कॉमिक्स की पहली सिरीज है. पिछले करीब डेढ़ साल से इस कंसेप्ट पर काम चल रहा था और अब ये कॉमिक्स फोर्स ने प्रकाशित करवाई हैं. पहले चरण में फोर्स के जवानों को ये कॉमिक्स मुहैया करवाई जाएंगी और फिर निजी भागेदारियों की मदद से इसे बाजार में उतारा जाएगा. इतना ही नहीं सीआरपीएफ अब समय समय पर अपने वीरों के कारनामों को बताते हुए ऐसी कॉमिक्स जारी करेगी.

रोचक अंदाज
फिलहाल इन कॉमिक्स का कलर, साइज और पिक्चर आम कॉमिक्स की तरह की होगी, लेकिन आनेवाले दिनों में अगर लोग उन्हें पसंद करेंगे और फोर्स इन शूरवीरों की गाथाओं को और रोचक अंदाज में पेश करेगी.

अब सवाल ये उठता है कि बच्चे जिनके लिए ज्यादातर कॉमिक्स बनाई जाती हैं, वो आईपैड, गेम्स या मोबाइल के इस दौर में इन अलग तरीके की कॉमिक्स जो कि रियल लाइफ हीरो के बारे में हैं उनके बारे में क्या सोचते हैं.

न्यूज18 इंडिया ने इन कॉमिक्सों को आज के बच्चों को​ दिखाया न केवल बच्चों के लिए ये नई चीज थी, बल्कि देश के शूरवीरों की गाथा का अनूठा खजाना भी था.

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चौथी क्लास में पढ़नेवाले छात्र वेदान्त का कहना है कि हमें बहुत सीखने को मिल रहा है. दरसल कॉमिक्स में हमेशा एक ऐसा पात्र होता है जो हमेशा ऐसे करतब दिखाता है जिसकी सिर्फ कल्पना ही कोई कर सकता है. लेकिन देश के शूरवीरों के करतब को जब इस नायाब अंदाज में पेश किए गया है तो बच्चों के अभिभावकों का भी रोमांचित होना लाज़मी है.

अभिभावक मानसी मानती हैं कम से कम हमारे बच्चों का ध्यान तो टीवी से हटेगा जबकि एक और अभिभावक राजेश का मानना है कि ये सच के करीब लाने की कोशिश है और जरूर ये सफल होगी.

ये हाल है उन चुनिन्दा बच्चों और अभिभावकों का जिन्होंने इन अनोखी कॉमिक्स को पढ़ा है. जरा सोचिए जब आम बच्चों के हाथों ऐसी कॉमिक्स आएंगी तो उन्हें कितना फायदा मिलेगा.
First published: March 21, 2017
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