गोरखा मोर्चा अब 5 हजार स्वयंसेवकों की अपनी सेना खड़ी करेगी

News18Hindi
Updated: June 20, 2017, 3:41 PM IST
गोरखा मोर्चा अब 5 हजार स्वयंसेवकों की अपनी सेना खड़ी करेगी
गोरखा मोर्चा पुलिस से मुकाबले के लिए खड़ी करेगा अपने वालिटिंयरों की सेना
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Updated: June 20, 2017, 3:41 PM IST
दार्जिलिंग में बेमियादी बंद का आंदोलन चला रहा गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) जल्द गोरखालैंड पर्सनल (जीएलपी) के नाम से अपने स्वयंसेवकों की सेना खड़ी करेगा.
बहुत पहले गोरखा मोर्चा की ये सेना प्रभाव में थी. इसमें 13 हजार स्वयंसेवक थे, लेकिन बाद के बरसों में ये खत्म हो गई. अब जीजेएम को फिर इसकी जरूरत महसूस हो रही है. इसलिए उसने जीएलपी को खड़ा करने की कोशिश शुरू कर दी है.

5000 स्वयंसेवकों की होगी नियुक्ति
मोर्चा इस सेना के लिए नियुक्तियां शुरू करने वाला है. फिलहाल लक्ष्य 5000 नए स्वयंसेवकों को अपने साथ जोड़ना होगा. हालिया प्रदर्शनों और मोर्चा समर्थकों पर पुलिस कार्रवाई के बाद जीजेएम नेताओं ने इसे बहाल करने का फैसला किया. मोर्चा नेताओं का कहना है कि जीएलपी गठन के बाद हम राज्य सरकार को दिखा देंगे कि हम अपने लोगों की रक्षा करना भी जानते हैं.



पुलिस से लड़ने में मददगार होगी सेना
हालांकि ये भी कहा जा रहा है कि जीजेएम को जीएलपी के गठन की जरूरत इसलिए महसूस हो रही है, क्योंकि उसे लग रहा है कि दार्जिलिंग हिल्स एरिया में सरकार के खिलाफ आंदोलन लंबा चल सकता है. ऐसे में उसके पास मजबूत स्वयंसेवकों की एक सेना होनी ही चाहिए, जो पुलिस या सैन्य बलों के खिलाफ संघर्ष में मददगार हो.

रिटायर्ड सैनिकों को मिलेगी जगह
इस सेना में भारतीय आर्मी के रिटायर्ड सैनिकों को जगह दी जाएगी. पहाड़ों पर आंदोलन को तेज करने के लिए गोरखा मोर्चा कमर कस रहा है. नई रणनीति बना रहा है. ये सेना केवल सैन्य अभियान ही चलाने में सक्षम नहीं होगी बल्कि मोर्चा के प्रमुख बिमल गुरुंग और अन्य शीर्ष गोऱखा मोर्चा नेताओं की रक्षा भी करेगी.



क्या है जीएलपी
- जीएलपी को गोरखालैंड पर्सनल के नाम से जाना जाता है, ये पहले भी प्रभाव में थी
- इसे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के स्वयंसेवकों की सेना भी कहा जाता है
- जब जीजेएम का वर्ष 2007 में गठन हुआ था तो जीएलपी को मोर्चा की एक शाखा के रूप में खड़ा किया गया था
- मोर्चा की ही एक शाखा के रूप में इसे खड़ा किया गया
- तब जीएलपी की सदस्यता 13 हजार के आसपास थी
- फिलहाल जीएलपी में 500 रिटायर्ड गोरखा सैनिकों को नियुक्त करने की योजना बनाई है.

जीएलपी पर क्यों है भरोसा
- इसके सदस्य आमतौर पर पूर्व सैनिक और पुलिस में काम कर चुके रिटायर्ड लोग हैं, जो आक्रमण और बचाव दोनों के लिए ट्रेंड रहते हैं
- आमतौर पर इन्हें संगठित सैन्य बलों के खिलाफ लड़ने के लिए ही तैयार किया जाता है
- गोरखालैंड के पूर्व सैनिकों का ये संगठन जीजेएम नेताओं द्वारा संचालित होता है
- जीएलपी सदस्य बगैर हथियारों के भी हमले में सक्षम होते हैं
- उन्हें व्यक्तिगत सुरक्षा की ट्रेनिंग भी मिलती है.

(रिपोर्ट- -डोलन चटर्जी)
First published: June 20, 2017
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