बैकफुट पर मनोहर सरकार, नहीं बदलेगा बल्‍लभगढ़ का नाम

ओम प्रकाश | News18India.com
Updated: May 18, 2017, 7:41 PM IST
बैकफुट पर मनोहर सरकार, नहीं बदलेगा बल्‍लभगढ़ का नाम
बल्लरभगढ़: फोटो, भारतीय रेल
ओम प्रकाश | News18India.com
Updated: May 18, 2017, 7:41 PM IST
हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल ने एनसीआर में आने वाले बल्‍लभगढ़ का नाम बदलकर 24 अप्रैल को बलरामगढ़ कर दिया था. लेकिन एक युवा की जिद, कोशिश और मुहिम ने उन्‍हें अपना यह फैसला बदलने पर मजबूर कर दिया. अब इसे पुराने यानी बल्‍लभगढ़ नाम से ही जाना जाएगा.

इससे पहले मनोहरलाल साइबर सिटी गुड़गांव का नाम बदलकर गुरुग्राम और मेवात का नाम बदलकर नूंह कर चुके हैं. गुरुग्राम का नाम बदलने पर कारपोरेट ने विरोध जताया था लेकिन सरकार अपने फैसले पर अडिग रही.

बल्‍लभगढ़ का नाम बदलने के मामले में 28 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता जसवंत सैनी ने आवाज उठाई. उन्‍होंने अपने संगठन युवा आगाज के बैनर तले साथियों को लेकर लोगों से फार्म भरवाकर रायशुमारी करवाई. सैनी के मुताबिक पूरे बल्‍लभगढ़ शहर में करीब 15 हजार लोगों की राय ली गई.

पूछा गया कि क्‍या वे नाम बदलने के पक्ष में हैं. इस पर करीब 95 फीसदी लोगों ने ‘नहीं’ में जवाब दिया. जिन लोगों से राय ली गई उनके नाम और मोबाइल नंबर भी दिए गए ताकि सरकार चाहे तो फोन करवाकर खुद उनकी राय ले सके. फार्म की फोटोकॉपी ज्ञापन के साथ सीएम को भेजी गई.

ballabgarh_faridabad_haryana, manohar lal khattar बल्‍लभगढ़ के युवाओं ने इस तरह से लोगों से राय ली

प्रदेश के उद्योग मंत्री विपुल गोयल और बल्‍लभगढ़ के विधायक मूलचंद शर्मा को ज्ञापन दिया. लोगों की राय जानने के बाद अधिकारियों, विधायकों और बीजेपी नेताओं ने सीएम तक यह बात पहुंचाई.

शर्मा ने सीएम से कहा कि नाम को लेकर विवाद हो रहा है. इसके बाद सीएम ने अपने अतिरिक्‍त प्रधान सचिव डॉ. राकेश गुप्‍ता को नाम बदलने की कागजी प्रक्रिया को रोकने के आदेश दिए.

ballabgarh_faridabad_haryana, chief minister manohar lal khattar नाम बदलने पर रायशुमारी के लिए ऐसा बनाया गया था फार्म

क्‍या है बल्‍लभगढ़ का इतिहास

फरीदाबाद के कस्‍बे बल्लभगढ़ में एक जाट रियासत थी, जिसकी स्‍थापना सन् 1739 में बलराम सिंह ने की थी. बलराम सिंह को 1753 में मुगलों ने मरवा दिया. इसके बाद उनके मित्र और भरतपुर रिसायत के राजा सूरजमल ने बलराम सिंह के बेटों को फिर बल्लभगढ़ की गद्दी दिलवाई. बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह ने 1857 के स्‍वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया. अंग्रेजों ने राजा नाहर सिंह, उनके सेनापति गुलाब सिंह सैनी और साथी भूरा सिंह को 9 जनवरी 1858 को लालकिले के सामने चांदनी चौक में फांसी दे दी.
First published: May 18, 2017
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